मौत से बातें
आज फिर मेरी मौत हो गयी.
अपनों से बिछुड़ने का ग़म क्या कम था
जो सारी दुनिया खफा हो गयी.
आज फिर मेरी मौत हो गयी
कब से पड़ा था मेरा जनाज़ा,
कोई कांधा देने को न था.
एक बची थी में अकेली
आज फिर मेरी मौत हो गयी.
अपना जनाज़ा अपने
कांधों पर ले के जो निकली
एक अजनबी की बददुआ लग गयी.
आज फिर मेरी मौत हो गयी
यूँ तिल तिल जीना,
यूँ तिल तिल मरना.
आज मौत इतनी बेखौफ हो गयी.
आज फिर मेरी मौत हो गयी.
यूँ चिंदा चिंदा जिंदगी
यूँ लम्हा लम्हा मौत
आज मौत जिंदगी से बड़ी हो गयी
आज मेरी आखिरी मौत हो गयी.




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