इस आसमां को छूने की हसरत रही है दिल में
मैं पांवों पे उड़ के जाऊं, हाथों को भी बढाऊँ
जितना भी पास जाऊं, वो दूर ही रहा था
गर्दन उठायी जब भी, वो उड़ता ही जा रहा था
मैंने उड़ना नहीं था सीखा, सो दूर जा गिरी थी
बैसाखियों के बल पर, कुछ पाना नहीं है सीखा
बेबस खड़ी थी मैं, यूँ हवा में कोहनियाँ टिकाये
कि चुपके से कोई बोला
आसमां को पहले सिर्फ तू छूना ही चाहती थी
अब सिर्फ आसमां को छूना मकसद नहीं है तेरा
आसमां है ऊँचा कोई बात अब नहीं है
आसमां को छूने का सवाल ही नहीं है
अब आसमां को मैं पाना ही चाहती हूँ
उस को पाकर आजमाना भी चाहती हूँ
क्यों, दूसरो के आसमां, में तारे बहुत हैं ज्यादा
क्यों मेरे आसमां में एक चाँद भी नहीं है
कानों में शोर कैसा?
क्या, कुछ पा लिया है मैंने?
ये जोशे जुनूं, मेरे जिगर का ही असर है
कि आसमां पिघल कर नीचे को आ रहा है
ये उँगलियों का मेरे चुम्बक सा, असर है
कि आसमां खिंचा सा मेरी ओर आ रहा है
मैंने उसको पा लिया है उसने मुझको पा लिया है





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