आशीष
मैं एक माँ हूँ ...
पर मैं तुम्हे हर माँ की तरह
ये आशीष नहीं दूंगी,
कि सूरज बनो, सूरज की तरह चमको,
छा जाओ पूरे ब्रह्माण्ड पर,
वश में कर लो पूरी धरती,
बंध जाओ एक समय सीमा में
अपितु, मैं तुम्हें आशीष दूंगी
तुम चाँद बनो, कुछ कम चमको,
यथार्थ में होते हुए भी
कभी अपनी उपस्थिति
न दर्ज करा पाने का दर्द समझो
अमावस के चाँद से
अपने पास बिखरे नन्हे सितारों से
घुलो, मिलो, उन्हें भी चमकने का अवसर दो.
दूज के चाँद की तरह,
कभी वेदना, संवेदना, प्रणय और बिछोह को
व्यक्त करने का माध्यम बनो,
कहीं किसी प्रेमी युगल को संरक्षण दो,
अपने उजाले में,
एक पूनम के चाँद की तरह
और हाँ !
कभी सूरज की पूर्ण उपस्थिति में
दिन के उजाले में,
आकाश के किसी कोने में,
सूरज से सिर्फ चंद क़दमों के फ़ासले पे,
अपने होने को प्रमाणित करो
ताकि लोग पूंछे
ये किसका चाँद है ??
जो आकाश में सूरज के सामने भी टिका है.