स्पर्श लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
स्पर्श लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 13 फ़रवरी 2011

प्रणय पर्व

प्रणय पर्व 







इतने बरसों बाद सही,  
इस बार सफल हो जाऊं... 
आँखों में बसने को तेरी,
मैं काजल हो जाऊं...

उर द्वार बसा लो जो मुझको, 
मैं सांकल हो जाऊं...
तेरे हांथों में आने को,
मैं आंचल  हो जाऊं...

ऐसे मुझे लजाओ आज, 
मै जमुना जल हो जाऊं...
प्रतिबिम्ब निहारो तुम अपना मुझमें 
मैं खिल के, कमल हो जाऊं...
देहावरण,  मुझे बनालो,
मैं मलमल हो  जाऊं...
तेरा स्पर्श पाते ही,
मैं निर्मल हो जाऊं...

धोकर के  सारी शंकाएं, 
मैं आज  धवल हो जाऊं... 
प्रणय पर्व मनाओ ऐसे, 
कि मैं ताजमहल हो जाऊं... 
इतने बरसों बाद सही,
इस बार सफल हो जाऊं... 

रविवार, 5 सितंबर 2010

प्रेमिका

प्रेमिका

एक प्रेमिका हूँ मैं

हर पल तुम्हारा  और

तुम्हारे स्पर्श का साथ

कितने  अधीर हो उठते

तुम मेरे बिन

फिर तुम्हारी उँगलियों पर

 थिरकती मैं

 तुम्हारे अधर  पर विराजती

 तुम्हारी सांसों में घुलती मेरी सांसें

और मैं

जलती, मचलती, बिखरती

मिटती धुआं होती,

कितना अभिशप्त जीवन है मेरा!!!!!

जिस किसी ने  भी चाहा मुझे

उस ने यूँ ही मिटा दिया मुझे

फिर भी मन मुदित है

जानती हूँ

त्यजे, जाने कितने ही जीवन

मैंने जिसके लिए

त्यजेगा वो भी, एक दिन

अपनी सांसें मेरे लिए

तब होगी पूर्णाहुति मेरे प्रेम की

आखिर सिगरेट जो हूँ मैं



Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...