प्रेमिका

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एक प्रेमिका हूँ मैं
हर पल तुम्हारा और
तुम्हारे स्पर्श का साथ
कितने अधीर हो उठते
तुम मेरे बिन
फिर तुम्हारी उँगलियों पर
थिरकती मैं
तुम्हारे अधर पर विराजती
तुम्हारी सांसों में घुलती मेरी सांसें
और मैं
जलती, मचलती, बिखरती
मिटती धुआं होती,
कितना अभिशप्त जीवन है मेरा!!!!!
जिस किसी ने भी चाहा मुझे
उस ने यूँ ही मिटा दिया मुझे
फिर भी मन मुदित है
जानती हूँ
त्यजे, जाने कितने ही जीवन
मैंने जिसके लिए
त्यजेगा वो भी, एक दिन
अपनी सांसें मेरे लिए
तब होगी पूर्णाहुति मेरे प्रेम की
आखिर सिगरेट जो हूँ मैं
bahut khub likha hai aapne....
जवाब देंहटाएंbadhai...
सुन्दर अभिव्यक्ति ....एक सन्देश भी छिपा है
जवाब देंहटाएंत्यजे, जाने कितने ही जीवन
मैंने जिसके लिए
त्यजेगा वो भी, एक दिन
अपनी सांसें मेरे लिए
तब होगी पूर्णाहुति मेरे प्रेम की
पूर्णाहुति से पहले ही लोग समझ जाएँ ...
बहुत अच्छा सन्देश दे रही है आपकी रचना. लेकिन लोगो ने कहाँ संभालना है...शायद मृत्यु को बपौती माने बैठे हैं.
जवाब देंहटाएंसुंदर शब्द.
वाह वाह -------------बहुत सुन्दर !
जवाब देंहटाएंइस त्याज्य प्रेमिका को दूर से ही सलाम । जब प्रेमिकाएं ऐसी हों तो , किसी दुश्मन की क्या ज़रुरत ।
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर ढंग से शिक्षक दिवस पर शिक्षा दी है आपने ।
बहुत अच्छी सीख दी हैं आपने.
जवाब देंहटाएंमुझे पसंद आई आपकी सीख.
फोटो मुझे सबसे ज्यादा पसंद आई हैं.
धन्यवाद.
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premikaa ka ehsaas achchaa prstutikrn he. akhtar khan akela kota rajsthan
जवाब देंहटाएंकविता के प्रारंभ में मैं तो इसे लेखनी समझ बैठा था |
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर| आजकल की तथाकथित प्रेमिकाओं से मेल खाती हुई यह प्रेमिका भी अपने कार्य में मग्न है|
जवाब देंहटाएंब्रह्माण्ड
सुन्दर अभिव्यक्ति ....एक सन्देश भी छिपा है
जवाब देंहटाएंत्यजे, जाने कितने ही जीवन
मैंने जिसके लिए
त्यजेगा वो भी, एक दिन
अपनी सांसें मेरे लिए
तब होगी पूर्णाहुति मेरे प्रेम की
प्रेम मे इतनी बडी सजा? प्रेम त्याग मांगता है बद्दुआ नही देता। वैसे रचना बहुत अच्छी है। बधाई।
बहुत भावपूर्ण और सुन्दर प्रम कविता-----।
जवाब देंहटाएंसुन्दर प्रयोग।
जवाब देंहटाएंkya anti climax hai!
जवाब देंहटाएंआपकी कविता पर एक शे'र याद आ गया...
जवाब देंहटाएंखाली प्याले, निचुड़े निम्बू, टूटे बुत सा अपना हाल
कब सुलगी दोबारा सिगरेट , होकर जूते से पामाल
और हाँ,
जवाब देंहटाएंअपने ब्लॉग पर आपका कमेन्ट पढ़ कर जोर कि हंसी आई थी हमें...
fir hamne apni puri post..और kaments ..दोबारा padhe...
:)
बढ़िया सन्देश... छुपा नहीं उजागर है.. :)
जवाब देंहटाएंसचमुच प्रेमिका सी कविता लगी.. क्या सोचा और क्या निकली... वैसे बहुत सुंदर रचना.. नए प्रकार का आधुनिक जीवन से बिम्ब... यही तो आपका ट्रेड मार्क बन गया है..
जवाब देंहटाएंसारगर्भित रचना..बहुत भावपूर्ण.
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर और शानदार प्रस्तुती!
जवाब देंहटाएंशिक्षक दिवस की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें!
तुम्हारे अधर पर विराजती
जवाब देंहटाएंतुम्हारी सांसों में घुलती मेरी सांसें
और मैं
जलती, मचलती, बिखरती
मिटती धुआं होती
अभुत!
अंत तो और भी अद्भुत!
चौंकाने वाला! बिम्ब का सुंदर प्रयोग।
जाने कितने ही जीवन
मैंने जिसके लिए
त्यजेगा वो भी, एक दिन
अपनी सांसें मेरे लिए
तब होगी पूर्णाहुति मेरे प्रेम की
आखिर सिगरेट जो हूँ मैं
गीली मिट्टी पर पैरों के निशान!!, “मनोज” पर, ... देखिए ...ना!
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जवाब देंहटाएंअन्त इतना चोट देने वाला कि प्रारम्भ का सारा प्यार फुस्स हो जाये। बेहतरीन अन्दाज में शिक्षा। वैसे मजे की बात कि मैं नहीं पीता।
जवाब देंहटाएंत्यजेगा वो भी, एक दिन
जवाब देंहटाएंअपनी सांसें मेरे लिए
तब होगी पूर्णाहुति मेरे प्रेम की
आखिर सिगरेट जो हूँ मैं
...ek samajik jagrukta bhara sandesh.... aabhar
bhut hi sundar manvikrn kiya . kvita ke ant tk yhi smjhti rhi ki kisi estri ka aakrosh hai mgr aakhiri pnkti ne dubara shuru se pdhne pr mjboor kr diya . shandar post .
जवाब देंहटाएंbdhaai.
बहुत अच्छी कविता।
जवाब देंहटाएंरोचक!
हिन्दी का प्रचार राष्ट्रीयता का प्रचार है।
हिंदी और अर्थव्यवस्था, राजभाषा हिन्दी पर, पधारें
कविता बहुत अच्छी लगी।
जवाब देंहटाएंत्यजे, जाने कितने ही जीवन
जवाब देंहटाएंमैंने जिसके लिए
त्यजेगा वो भी, एक दिन
अपनी सांसें मेरे लिए
तब होगी पूर्णाहुति मेरे प्रेम की
गहरे भावों के साथ, बेहतरीन अभिव्यक्ति ।
त्यजे, जाने कितने ही जीवन
जवाब देंहटाएंमैंने जिसके लिए
त्यजेगा वो भी, एक दिन
अपनी सांसें मेरे लिए
तब होगी पूर्णाहुति मेरे प्रेम की
आखिर सिगरेट जो हूँ मैं!
रचना जी,
अस्वीकार है आपका सिगरेट होना।
दरअस्ल मैं सिगरेट नहीं पीता न। इसलिए।
धूम्रपाननिषेध पर बढ़िया कविता।
रचना जी,
शब्दों की जादूगरी के चलते ,पहले पहल तो हमीं कश लेने लगे थे। धुवां लगा तो होश में आए और खांसने लगे।
आखरी सिगरेट , जवाब नहीं ।
जवाब देंहटाएं...तो ये प्रेमिका सिगरेट है!....बहुत खूब...मजा आ गया!
जवाब देंहटाएंrachna ji..badi tajgi bhari rachna hai..kuch hatkar1
जवाब देंहटाएंजोर का झटका धीरे से देने की जबरदस्त क्षमता होती है आपकी रचनाओं में उसी का एक और सबूत और तस्वीर भी हमेशा की तरह अनूठी.
जवाब देंहटाएंवाह बेहद खुबसूरत लिखा है आपने ...सन्देश बहुत अच्छा है इस में
जवाब देंहटाएं.
जवाब देंहटाएंRachna ji,
very inspiring creation ! Congrats !
" Smoking is injurious for health "
..
तब होगी पूर्णाहुति मेरे प्रेम की
जवाब देंहटाएंआखिर सिगरेट जो हूँ मैं
प्रेम के साथ कितनी भ्रान्तिया
हैं !पर लोग भी तो जाने किन किन चीजों को प्यार करते हैं !
कविता की सार्थकता सिद्ध हो रही है !बहुत बहुत बधाई
आपको एवं आपके परिवार को गणेश चतुर्थी की शुभकामनायें ! भगवान श्री गणेश आपको एवं आपके परिवार को सुख-स्मृद्धि प्रदान करें !
जवाब देंहटाएंकि हम चल भी नहीं सकते हैं और वो दौड़े जाते हैं,
जवाब देंहटाएंधाराप्रवाह प्रस्तुतियां वाह!!
Rachana mai to tumharee creative soch par pooree tour par fida hoo .......
जवाब देंहटाएंabhee bhee USA me hoo.grand child ke sath samay ud raha hai.....next wk london grand daughter ke paas aur fir vaapsee hogee ....... jo kuch choota hai usame mera hee nuksaan hai aise hone nahee dungee.......
allways with best wishes
शायद आज आपको पहली बार पढ़ रही हूँ...
जवाब देंहटाएंगज़ब की कल्पना है... वाकई अब तो वो प्रेमिका ही लगने लगेगी...