प्रणय पर्व लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
प्रणय पर्व लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 12 फ़रवरी 2012

परीक्षण


परीक्षण

वो मिश्री से मीठे बोल तुम्हारे 
पहली बार सुने थे जब मैंने 
कितना सकुचाई थी लजाई थी मैं 
लाज में लपेट कर,
छुपा दिए थे कहीं वो बोल तुम्हारे 
आज इतने बरसों बाद .....
याद नहीं कितने ..
बीस पच्चीस ....
तुम्हारे छुवन की 

सिहरन का अहसास भूले 
वो बोल तुम्हारे 
समय कि चादर ओढ़े 
आज भी वहीँ पड़े हैं बेसुध 
क्या इस वसंतोत्सव प्रणय पर्व पर 
अपनी उँगलियों कि पोरों से सहलाकर
जीवंत कर दोगे उन बोलों को      
या इस बार भी 
मात्र कनखियों से देखोगे मुझे और मुस्कुरा दोगे 
यदि ये सच है तो
तो इस बार मैं 
उन बोलों कि तह तक जाना  चाहूंगी 
जानना चाहूंगी 
कि इतने बरसों 
क्षण क्षण हर क्षण 
क्या इतना क्षरण हो चुका है .... 

रविवार, 13 फ़रवरी 2011

प्रणय पर्व

प्रणय पर्व 







इतने बरसों बाद सही,  
इस बार सफल हो जाऊं... 
आँखों में बसने को तेरी,
मैं काजल हो जाऊं...

उर द्वार बसा लो जो मुझको, 
मैं सांकल हो जाऊं...
तेरे हांथों में आने को,
मैं आंचल  हो जाऊं...

ऐसे मुझे लजाओ आज, 
मै जमुना जल हो जाऊं...
प्रतिबिम्ब निहारो तुम अपना मुझमें 
मैं खिल के, कमल हो जाऊं...
देहावरण,  मुझे बनालो,
मैं मलमल हो  जाऊं...
तेरा स्पर्श पाते ही,
मैं निर्मल हो जाऊं...

धोकर के  सारी शंकाएं, 
मैं आज  धवल हो जाऊं... 
प्रणय पर्व मनाओ ऐसे, 
कि मैं ताजमहल हो जाऊं... 
इतने बरसों बाद सही,
इस बार सफल हो जाऊं... 

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...