माँ
(एक बाल कविता)
(एक बाल कविता)
मेरी माँ जैसी कोई माँ हो,
ऐसा कभी हुआ न होगा।
स्नो व्हाइट सिन्ड्रेला सी,
शांत सौम्य और सुन्दरता में,
उसका जैसा हुआ न होगा।
रात अँधेरी सुबह सवेरे,
जब भी देखो जब भी मांगो
उसका प्यार बरसता होगा।
मेरी माँ जैसी कोई माँ हो,
ऐसा कभी हुआ न होगा।
दुर्गा काली सी गरिमा और,
सरस्वती सा ज्ञान लिये,
कहीं कोई भी हुआ न होगा।
सोते -जगते आते -जाते ,
अपनी बिटिया से मिलने को,
सपना एक तरसता होगा।
मेरी माँ जैसी कोई माँ हो,
ऐसा कभी हुआ न होगा।

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