दुल्हन लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
दुल्हन लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 26 मई 2013

दिल्ली का दिल

दिल्ली का दिल 

हमारे शहर में
कोई व्याकुल है
ब्याह रचाने को
तैयार हैं बाराती
बैंड बाजा घोड़ी गाड़ी.

पंडित करता है हर बार
एक तिथि की घोषणा
दुल्हन की तरफ से हर बार
आता है एक जवाब डाक्टर का
दुलहन को समय चाहिए.

दुलहन बीमार है
हर बार एक नई बीमारी
मलेरिया, डेंगू, अपच, लकवा, पीलिया
मुहसे और अब चेचक
पूरी देह पर बड़े बड़े गड्ढे धब्बे.

गर्द माटी से सनी देह
हाँ मेरे शहर का दिल
कनाट प्लेस बेताब है
पिछले चार सालों से
दुलहन बनने को.

हम सब उसे देखने को
इस बार फिर एक नई तिथि
मिली है उसको
तीस जून.

रविवार, 11 जुलाई 2010

मैनेक़ुइन

" मैनेक़ुइन"



मैनेक़ुइन हूँ , तो क्या हुआ  

मैं भी इंसानों सा दिल रखती हूँ

हर दिन मेरा पूनम होता

रात अमावस होती है

आधे कपड़े, पूरे कपड़े

ऐसे कपड़े, वैसे  कपड़े

जाने कैसे, कैसे कपड़े

कभी दुल्हन बनूँ

कभी नग्न रहूँ

सारा सारा दिन खड़ी रहूँ

रातों को पूरी ढकी रहूँ

मुझको भी लज्जा आती है

ऑंखें मेरी  भी भर आती हैं

सबकी बुरी नज़र सताती है

सारा दिन सब मुझको तकते हैं

मेरी बात न करते, थकते हैं

रात के अंधियारे में

हम सब मिल रोज़ सुबकते हैं

कोई मुझको भी आ कर ले जाये

घर में बिस्तर पर मुझे बिठाये

बिटिया जैसा प्यार जताए.

फिर क्यों न जीवन सफल हो जाये.


(Mannequin  - A life-size full or partial representation of the human body, used for the fitting or displaying of clothes; a dummy)





Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...