मैनेक़ुइन हूँ , तो क्या हुआ
मैं भी इंसानों सा दिल रखती हूँ
मैं भी इंसानों सा दिल रखती हूँ
हर दिन मेरा पूनम होता
रात अमावस होती है
आधे कपड़े, पूरे कपड़े
ऐसे कपड़े, वैसे कपड़े
जाने कैसे, कैसे कपड़े
कभी दुल्हन बनूँ
कभी नग्न रहूँ
सारा सारा दिन खड़ी रहूँ
रातों को पूरी ढकी रहूँ
मुझको भी लज्जा आती है
ऑंखें मेरी भी भर आती हैं
सबकी बुरी नज़र सताती है
सारा दिन सब मुझको तकते हैं
मेरी बात न करते, थकते हैं
रात के अंधियारे में
हम सब मिल रोज़ सुबकते हैं
कोई मुझको भी आ कर ले जाये
घर में बिस्तर पर मुझे बिठाये
बिटिया जैसा प्यार जताए.
फिर क्यों न जीवन सफल हो जाये.
(Mannequin - A life-size full or partial representation of the human body, used for the fitting or displaying of clothes; a dummy)
