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रविवार, 23 अगस्त 2015

दुआएं

दुआएं
कल के 
उस त्यौहार में 
पाप धोने के 
उस प्रयास में 
इंसान ही नहीं 
जानवरों ने भी दी दुआएं
वो रुपहली प्लेटे,
प्लास्टिक की 
डिज़ाइनर कटोरियाँ,
जरूर जानती हैं 
कोई वशीकरण मंत्र
खींचती हैं सबको अपनी ओर 
कुत्तों ने सूंघा, चाटा, खाया 
कुछ ने ढूंढी हड्डियां. 
इतना सब कुछ 
सब तरफ देख
होश खो बैंठीं गाय
बतियाती हुईं आयीं
लो हो गई आज की
किटी पार्टी पूरी
फिर क्या था 
क्या प्लेट
क्या कटोरी 
वाह...वो रंग बिरंगे
पालीथीन   
लाल, हरे, नीले, पीले, बैंगनी 
मिनटों में चट
मानों सफाई कर्मचारियों का दल था 
नहीं जानती 
कहाँ सहेजेंगे ये लोग 
इतनी दुआओं को.

रविवार, 15 मई 2011

जन्म-जन्मान्तर


जन्म-जन्मान्तर 



इस दुनिया से जाने के नाम पर
डर, 
मरने का नहीं, 
बिछुड़ने का है 
अगला जन्म, 
मनुष्य योनी में,
मिलना जरूरी तो नहीं.
फिर 
हमारी जन्म जन्मान्तरों तक,
साथ निभाने वाली कसमों का क्या ?
चलो 
आज भगवान से प्रार्थना करें, 
हमें प्लास्टिक ही बना दें
पड़े रहेंगे सदियों तक जैसे के तैसे.
पर ये क्या .....
प्रकृति के प्रति असंवेदनशीलता.
ये प्रार्थना वापस,
फिर,
भगवान,
हमें कागज़ ही बना देना.
रिसायकिल हो हो कर ही सही 
कुछ जन्म तो  निकाल ही  लेंगें, 
एक ही योनी में.
सात  जन्म न सही, 
कुछ जन्मों का साथ तो मिले.  
आज के अनिश्चित जीवन में.

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