उस त्यौहार में
पाप धोने के
उस प्रयास में
इंसान ही नहीं
जानवरों ने भी दी दुआएं
वो रुपहली प्लेटे,
प्लास्टिक की
डिज़ाइनर कटोरियाँ,
जरूर जानती हैं
कोई वशीकरण मंत्र
खींचती हैं सबको अपनी ओर
कुत्तों ने सूंघा, चाटा, खाया
कुछ ने ढूंढी हड्डियां.
इतना सब कुछ
सब तरफ देख
होश खो बैंठीं गाय
बतियाती हुईं आयीं
लो हो गई आज की
किटी पार्टी पूरी
फिर क्या था
क्या प्लेट
क्या कटोरी
वाह...वो रंग बिरंगे
पालीथीन
लाल, हरे, नीले, पीले, बैंगनी
मिनटों में चट
मानों सफाई कर्मचारियों का दल था
नहीं जानती
कहाँ सहेजेंगे ये लोग
इतनी दुआओं को.
