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रविवार, 19 फ़रवरी 2012

बस...एक दिन


बस...एक दिन 



सात फेरों में, सात जन्मों के, वादे किये हैं
एक दिन में इतने जन्म बिताऊँगी कैसे? 

प्यार करने को एक उम्र भी कम है,
एक दिन में एक उम्र जी पाऊँगी कैसे?


पाने संवरने में जिसको बरसों लगे हैं, 
एक दिन में वो प्यार दिखाउंगी कैसे?

प्यार में किसी के खोया पाया बहुत है, 
एक दिन में, ये सब, जता पाऊँगी कैसे? 

प्यार में इस तरह फली फूली हूँ इतना, 
एक दिन में इतना सिमट पाऊँगी कैसे? 

प्यार में किसी के रूठना मान जाना, 
एक दिन में ये सब निबाहूँगी कैसे?

हर पल जो मेरी आँखों सांसों में बसा है, 
बस..एक दिन में उसे दिखा पाऊँगी कैसे?

किसी ने कहा था, हर  रोज चाहूँगा तुझको, 
बस..एक दिन के प्यार में मान जाउंगी कैसे? 
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