पुल
एक पुल ने दिल लगाया भी तो पहियों से,
छोटे-बड़े, मोटे-पतले.
दिल भले ही साफ़ रहा हो
पर दिखने में एकदम काले.
देता रहा अपने चौड़े सीने पर
सबको सहारा,
प्यार, लाड, दुलार
रौंदते रहे पहिये उसे हर दम
नहीं मिला उसे एक पल भी आराम
बदले में
नहीं माँगा उसने कभी
सीमेंट, सरिया, पानी, पेंट.
कभी सुना था उसने
बिन मांगे मोती मिले
मांगे मिले न भीख.
पर एक दिन
टाटा, बजाज, महिंद्रा, मारुती,
सबका प्यार सीने में दफ़न किये
अपने ही मौत मर गया बेचारा.
पर एक दिन
टाटा, बजाज, महिंद्रा, मारुती,
सबका प्यार सीने में दफ़न किये
अपने ही मौत मर गया बेचारा.
