इंसान
कहते हैं लोग
इन्सान पत्थर हो गया
अगर ये सच है तो
दिखा दे अपनी सख्ती,
अपना खुरदरा, पथरीला, कंकरीलापन
अपनी जड़ता,
जा, छू जा, कभी किसी राम के चरणों से
दे दे किसी अहिल्या को जीवन दान
बन राम सेतु,
जीत ले लंका, मार गिरा कभी रावण,
बचा ले, अबला सीताओं की लाज,
बन पारस, कभी निर्धनता के लिए,
डट जा, चीन की दीवार बन, साम्प्रदायिकता के आगे
पीस दे आपने दो पाटों के बीच महंगाई कभी
गिर, भर भरा के, बिना सीमेंट की छत की तरह,
कर दे लहू लुहान भ्रष्टता को कभी,
जा गिर, मर और मार
एक उल्का पिंड की तरह निकृष्टता को कभी
समा जा किसी देश द्रोही की आँखों, में किरकिरी बन
चुनवा दे अपनी दीवार में,
अनारकली की जगह, आतंकवाद कभी
पर अफ़सोस, ऐ इंसान
तू तो पूरा पत्थर भी न हुआ.
