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रविवार, 3 मार्च 2013

अहसास


अहसास
 

मेरे बालों में रह रह के,
महकता बादल.
मेरे होंठों पे,बसने को,
मचलता बादल.

मेरे बाजुओं में आकर के,
पिघलता बादल.
मेरी पाजेब से मिलकर के,
फिसलता बादल.

ये बादल नहीं,
स्पर्ष है किसी का.
जो तन मन भिगोये,
ये प्यार है उसी का.

मेरी सांसों में आकर के,
सुलगता ये बादल.
मेरी आँखों से जब तब,
छलकता ये बादल.

मेरी धडकनों में रह-रह के,
धधकता ये बादल
जिगरे नासूर से रह-रह के,
रिसता ये बादल.

ये बादल नहीं
अवसाद है किसी का.
जो मन को भिगोये,
ये अहसास है उसी का.

रविवार, 12 जून 2011

अनुभव


अनुभव     


जीने का तरीका समझने लगी हूँ.
अपना नजरिया बदलने लगी हूँ. 
जीवन का अनुभव है या...
सकारात्मक सोच में रहने लगी हूँ. 
पीछे देखती हूँ अवसाद, अपराध, 
ईर्ष्या मवाद से भरी हूँ. 
बैठ जाती हूँ याद करती हूँ,
इन अहसासों को भरने वाले कारक 
गिन गिन कर निकालने लगी हूँ...
सुबह खिड़की के पास 
फैले रेत के ढ़ेर पर
एक एक नाम लिखने लगी हूँ.
जीने का तरीका समझने लगी हूँ.
अपना नजरिया बदलने लगी हूँ.
पीछे घूम कर देखती हूँ,
प्यार, मीठे, अहसास, खूबसूरत पल, 
खुशियों से भरने लगी हूँ. 
बैठ जाती हूँ याद करती हूँ, 
इन अहसासों को भरने वाले कारक 
गिन गिन फिर निकालने लगी हूँ...
सुबह आंगन में रखे पत्थरों  पर
एक एक नाम उकेरने लगी हूँ.
जीने का तरीका समझने लगी हूँ. 
अपना नजरिया बदलने लगी हूँ. 
अब तो दिन दिन भर
खिड़की पे खड़े हो 
रेत और पत्थर को निहारने लगी हूँ. 
रेत पर तो निशान हैं ही नहीं, 
पत्थरों पे लिखे नाम,
पढ़ मुस्कुराने लगी हूँ. 
कहते हैं इंसान पत्थर सा हो गया है,
कुछ सुनहरे अहसास उकेर कर 
दिमाग को अपने पत्थर समझने लगी हूँ. 
जीने का तरीका समझने लगी हूँ. 
अपना नजरिया बदलने लगी हूँ. 
जीवन का अनुभव है या...
सकारात्मक सोच में रहने लगी हूँ.  
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