अहसास
मेरे बालों में रह रह के,
महकता बादल.
मेरे होंठों पे,बसने को,
मचलता बादल.
मेरे बाजुओं में आकर के,
पिघलता बादल.
मेरी पाजेब से मिलकर के,
फिसलता बादल.
ये बादल नहीं,
स्पर्ष है किसी का.
जो तन मन भिगोये,
ये प्यार है उसी का.
मेरी सांसों में आकर के,
सुलगता ये बादल.
मेरी आँखों से जब तब,
छलकता ये बादल.
मेरी धडकनों में रह-रह के,
धधकता ये बादल
जिगरे नासूर से रह-रह के,
रिसता ये बादल.
ये बादल नहीं
अवसाद है किसी का.
जो मन को भिगोये,
ये अहसास है उसी का.

