मंगलवार, 9 जुलाई 2024

अज़रबैजान यात्रा (भाग 4)

 अज़रबैजान यात्रा (भाग 4) - बाकू की गुलाबी सुबह

अज़रबैजानी कवि के सामने एक चित्र

कल की खुशनुमा शाम के बाद आज अज़रबैजान की राजधानी बाकू में गुलाबी सुबह जाग चुकी थी और उसके साथ ही हम भी तैयार हो कर नाश्ता कर अपने गंतव्य की ओर चल दिए। आज हमारा गंतव्य था पुराना बाकू शहर। जैसा हम सभी जानते हैं हमारे देश में भी आमतौर पर हर शहर में एक पुराना शहर होता ही है वैसे ही यहां भी पुराना है बाकू शहर है। बाकू को दो भागों में बांटा गया है इचारी शाहर और बायर शाहर, इचारी शाहर या इनर सिटी  में रहने वाले यहां के मूल निवासी थे। धीरे धीरे शहर बढ़ा और लोग बाहर आए तबसे ही इसे पुराना बाकू कहा जाता है पुराना बाकू शहर अज़रबैजान की राजधानी का ऐतिहासिक केंद्र है। ये बाकू का सबसे प्राचीन हिस्सा है। जो दीवारों से घिरा है। पुराने शहर में रहने वाले ही 2007 में पुराने शहर की आबादी 3000 थी। दिसंबर 2000 में शिरवानशाह के महल और मेडेन टावर सहित बाकू का पुराना शहर यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में वर्गीकृत होने वाला इस देश का पहला स्थान बन गया था। पुराने शाहर का मेडेन टावर 12 शताब्दी का माना जाता है। इसमें प्रवेश के लिए मुख्य द्वार है, जिससे हो कर आप इस पुराने शहर में प्रवेश कर सकते हैं। इसके अंदर है एक महल या पैलेस, एक मिनिएचर बुक म्यूजियम, पुराना बाजार, पुरानी इमारतें, बलखाती खूबसूरत संकरी गलियां।

एक बड़े लकड़ी के  दरवाजे से प्रवेश करते ही दिखती है सामने अज़रबैजानी कवि और ग़ज़ल गायक अलीघा वाहिद (1895-1965) के सम्मान में बना स्मारक। इसे 1990 में बनाया गया था। तीन कलाकरों द्वारा किए गए निरंतर गहन प्रयासों को स्मारक में कलात्मक और स्थापत्य रूप से संबोधित किया गया है। स्मारक के रूप और आकार की मौलिकता कवि के प्रसिद्ध हेमिस्टिच पर आधारित है जिसका उपनाम "ग़ज़लखान” (गजलों की खान) है। इस मूर्ति  के स्वरूप को हम देखते हैं तो इसमें अलग अलग प्रकरण दिखते हैं। सब कुछ उनके चेहरे और सर पर अंकित किया गया है।  इसमें वाहिद की शादी की पार्टी, उनका अंतिम संस्कार, अंतिम संस्कार में विलाप करती स्त्रियां, कवि के दोस्त और सहकर्मी कविता पाठ और ग़ज़ल गाते हुए, सर के निचले भाग में विधानसभा सब कुछ मिल जाएगा। मूर्ति में कवि का सर पेड़ की तरह बढ़ता और जड़ पकड़ता हुआ दिखता है यही ग़ज़लखान का जीवन दर्शन है, यही वाहिद का रहस्य है।

इस मूर्ति के बाद कुछ सकरी गलियां गलियां है जिन्हें पार करते हुए बीच में पड़ता है मिनिएचर बुक म्यूजियम या इसे बाकू का लघु पुस्तकों का संग्रहालय कह सकते हैं। यह दुनिया का एकमात्र लघु पुस्तकों का संग्रह है जो पुराने बाकू में स्थित है, इसका संचालन 2 अप्रैल 2002 में शुरू किया गया।  2015 में लघु पुस्तकों के संग्रहालय को लघु पुस्तकों के सबसे बड़े निजी संग्रहालय के रूप में गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।  इस संग्रहालय में  प्रदर्शित पुस्तकों को जरीफा सलाहोवा  ने 30 वर्षों की अवधि में एकत्र किया था। उनके संग्रह में 64  विभिन्न देशों की 6500 से अधिक  पुस्तके शामिल है इस संग्रहालय में दुर्लभ प्राचीन धार्मिक पुस्तक भी हैं जो 100 साल से ज्यादा पुरानी है सबसे पुरानी किताब कुरान है जिसे 1672 में सऊदी अरब में प्रकाशित किया गया था।  इसके अलावा एक लघु पुस्तक है जिसमें बीटल्स के गाने शामिल हैं।  संग्रहालय में संग्रह में नियमित रूप से प्रकाशन जोड़े जाते रहते हैं।  पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और तुर्की के राष्ट्रपति नेता मुस्तफ़ा कमाल आता तुर्क के जीवन को समर्पित लघु पुस्तक भी है।  संग्रहालय में रूसी साहित्य पर एक अलग खंड है अजरबैजानी भाषा में बच्चों के लिए लघु पुस्तक भी हैं। संग्रहालय में हजारों परी आकार की पुस्तक हैं। यहां मैक्रो-मिनी, मिनिएचर, माइक्रो-मिनी, अल्ट्रा-मिनी और माइक्रो पुस्तके हैं। पुस्तक के दुनिया की तीन सबसे छोटी किताबें जिनका आकार 2 मिलीमीटर x दो मिलीमीटर है जिन्हें केवल आवर्धक कांच के उपयोग से पढ़ा जा सकता है। संग्रहालय में सबसे चमत्कारी चीज में एकमात्र ऐसी पुस्तक है जो 6 मिलीमीटर x 9 मिलीमीटर आकार की लघु पुस्तक वाली श्रेणी में है।  यह पुस्तक 1985 में मास्को में प्रकाशित हुई थी इसका चार भाषाओं में अनुवाद किया गया है कुल मिलाकर यह संग्रहालय बहुत खूबसूरत है और अजूबा भी लगता है और साहित्य प्रेमियों के लिए एक तोहफा है। 

यहां से आगे जाते ही पड़ता है शिरवानशाह का महल।  शिरवानशाह द्वारा निर्मित 15वीं शताब्दी का यह महल है और इसे यूनेस्को द्वारा "अजरबेजान की वास्तुकला के मोतियों में से एक" के रूप में वर्णित किया गया है। यह भीतरी शहर में स्थित है इस परिसर में महल की मुख्य इमारत दीवान, दफन कोठरी, एक मीनार के साथ शाह की मस्जिद, सैयद याहिया बाकूवी का मकबरा, दक्षिण पूर्व में पोर्टल, मुराद का गेट, एक जलाशय और स्नान घर के अवशेष हैं। पहले मकबरे के बगल में प्राचीन मस्जिद थी। मकबरे के पश्चिम में स्नान गृह के खंडहर अभी भी मौजूद है। ये एक बहुत ही खूबसूरत महल है।

महल से आगे जाने पर पड़ती है बहुत सी सकरी खूबसूरत गलियां इन गलियों को पार करने के बाद आता है यहां का बाजार जो यहां के लोकल सामानों के लिए मशहूर है। इनको पार करते हुए पुरानी इमारत का मजा लेते हुए आगे बढ़ो तो एक चर्च है। उसके पास में ही पूरे शहर का एक नक्शा है जो यह बताता है कि पुराने बाकोई शहर में कौन सी गली कहां है इसको पार करने के बाद बाहर निकले पुराने बाकू से, तो नया शहर आ जाता है सामने सड़क है सड़क को पार करके आगे चले जाएं तो एक मैदान है। मैदान के बाहर आपको दिखाई देता है आलीशान फैला हुआ कैस्पियन सी या समुद्र। कैस्पियन सागर यह बताता है कि पुराना शहर क्यों था? लोग इसमें क्यों रहते थे? क्योंकि यहां से समुद्र तट भी पास था तो लोगों को आने जाने या सामान लाने की भी सुविधा रही होगी।

बीच में हमने वहाँ के एक अजुबे वाद्ययंत्र (जिसे हैण्ड पैन कहते हैं) की सुरीली धुन और उसके कलाकार को आंखों कानों में बसाया, कैमरे में कैद किया और चल पड़े कैस्पियन सागर के तट की ओर वहाँ सागर की ठंडी हवाओं का आनंद ले कर दोपहर के खाने के लिए लौट आए दोपहर खाना हमने प्रीमियर पैलेस होटल के रेस्टोरेंट में किया। सुहानी शाम का आनंद लेने के लिए शरीर को कुछ आराम चाहिए था तो हम अपने होटल लौट आए।

इस पोस्ट में इतना ही, बाकू की सुहानी शाम का विवरण अगली पोस्ट में...

पुराने बाकू शहर का मुख्यद्वार

अज़रबैजानी कवि का वर्णन


इस मूर्ति में बहुत कुछ उकेरा गया है 

(एन्लार्ज कर देखें)


शिरवानशाह पैलेस


बुक म्यूजियम या किताब म्यूजियम यहाँ भी बुक को किताब कहते हैं

बुक म्यूजियम या किताब म्यूजियम


बुक म्यूजियम या किताब म्यूजियम


वर्ल्ड रिकॉर्ड सर्टिफिकेट


एक पल चैन का


शहर के अन्दर की सजावट 


शहर के अन्दर की सजावट



शहर के अन्दर की सजावट


एक दुकान में प्रवेश करते


शहर के नज़ारे



शहर के नज़ारे


सीढियां उतरकर


पूराने बाकू शहर का पूरा नक्शा एक लोहे की प्लेट में बना कर लगाया हुआ है


कैस्सपियन समुद्र के किनारे सुस्ताते हुए


अज़रबैजान का अजब वाद्ययंत्र जिसे हैण्ड पैन कहते हैं










सोमवार, 8 जुलाई 2024

अज़रबैजान यात्रा (भाग 3)

 

अज़रबैजान यात्रा (भाग 3) - बाकू की एक हसीन शाम


फ्लेम टावर्स और मैं 

21 मई की शाम निर्धारित थी शहर को एक चित्रमाला की तरह देखने और विहंगम दृश्य का आनंद लेने की। हम निकल पड़े हाई लैंड पार्क की ओर जो एक पहाड़ी पर स्थित है। ये शहर की खूबसूरती देखने के लिए एक उपयुक्त स्थान है। वहाँ पहुंचते ही सामने दिखता है अज़रबैजान फ्लैग स्क्वायर और यहाँ पर लगा है अज़रबैजान का एक विशाल झंडा जो विश्व के सबसे ऊंचे झंडों में से एक है। इसे  शहर के कई स्थानों से देखा जा सकता है। यहाँ एक ज्योत हमेशा जलती रहती है। अपनी भाषा में कहूँ तो ये यहाँ का शहीद स्मारक और कब्रिस्तान है। फ्लैग स्क्वायर के दूसरी तरफ एक मस्जिद है जिसका नाम शहीदी मस्जिद है। उसके आगे शुरू होता है फूलों से लदा एक खूबसूरत गलियारा।  यहाँ बनी हैं चमचमाती हुई कब्रें। बता दूँ कि ये एक नवजवान देश है  जिसने अभी 30- 32 साल पहले ही तो आजादी पाई है। सड़क किनारे जहां - तहां कहीं भी मिल जाएंगी कब्रें। कोई धर्म कोई जाति कोई भी देश क्यों न हो देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वालों के लिए सर श्रद्धा से झुक ही जाता है, हाथ बरबस ही जुड़ जाते हैं। तस्वीर लेने को दिल नहीं होता, लगता है जो देश के लिए मर-मिट कर अब अपनी कब्र में आराम कर रहा है उसकी तस्वीर लेना शायद अन्याय हो, उसकी चिर निद्रा में खलल हो। यहाँ कब्रें थोड़ी ऊंचाई पर हैं। उनके आस पास बहुत तरतीब से फूलों को लगाया गया है। यूँ  लगता है जैसे देशवासी कहना चाहते हों हे वीर तुमने अपना बलिदान देकर हमारे जीवन में जो रंग भरे हैं तो हम भी पूरी श्रद्धा से तुम्हारी कब्रों पर फूलों के पौधे लगा कर तुम्हारी कब्रों को थोड़ी हरियाली फूल और खुशबू देना चाहतें है, स्वीकार करो। उससे आगे चल कर थोड़ी दूर पर आ जाती है रेलिंग, वहाँ से  दिखता है विशाल कैस्पियन सागर और उसी के तट पर स्थित है बाकू आई फेरिस व्हील। इसकी ऊंचाई 200 फीट है इसमें 30 केबिन हैं। सागर के विपरीत दिशा में दिखता है सबसे अद्भुत नजारा। वे हैं फ्लेम टावर या ज्वाला मीनार ये आग की ज्वाला के आकर की तीन गगन चुंगी मीनार जैसी इमारतों का समूह है। जो दक्षिण, पूर्व और पश्चिम में स्थित हैं।  ये आग तत्व के प्रतीक हैं, यहाँ प्राकृतिक रूप से गैस की लपटें जमीन से निकलती हैं। इसीलिए अज़रबैजान का उपनाम "द लैंड ऑफ फायर" भी है सबसे ऊंची मीनार 597 फीट है। तीनों इमारतों में 33 मंजिलों पर 130 आवासीय अपार्टमेंट्स हैं। एक इमारत में पांच सितारा होटल फेयरमांट है जिसमें 250 कमरे हैं। एक इमारत में कार्यालय ब्लॉक है। ये तीनों इमारतें बाहर से पूरी तरह से एल ई डी स्क्रीन से ढकी हुई हैं।  ये तीनों इमारतें बड़ी डिस्प्ले स्क्रीन की तरह काम करती हैं। शाम का धुंधलका होते ही धधकने लगती हैं ज्वालाएं, बिखरने लगते हैं शरारे। शुरू हो जाता है आग की विशाल लपटों की छाती पर शरारों का करतब। कभी अज़रबैजानी झंडों के रंग, कभी झंडों को लहराती एक आकृति, कभी पानी से भरे विशाल टैंक। हर आकृति का समय लगभग दो मिनट होता है। इस खूबसूरती को यूँही छोड़कर निकल आना बहुत मुश्किल था इसलिए कैद कर लिया अपने कैमरे में। समय हो चुका था बहुत सारी सीढ़ियां उतर कर नीचे आना था नीचे आकर जब देखा तो सारी सीढियों में लाइट जल रही थी ऐसा लग रहा था कि हम सोने की सीढियों से उतर कर नीचे आ रहे हों। देर हो चुकी थी अब समय था रात के खाने का तो रात के खाने के लिए हम पहुंचे फ्लेवर्स फ्यूजन क्यूज़ीन रेस्टोरेंट जो कि हुसैन जावेद एवेन्यू पर था। यहाँ भी भारतीय भोजन उपलब्ध था। हमने अपने उदर को शांत कराया, यहाँ का चावल बहुत स्वदिष्ट था, खुशबूदार हल्का प्राकृतिक मिठास लिए हुए और मुलायम। आज का दिन हो चला था हम भी चल दिए अपने गंतव्य होटल की तरफ। अगले दिन 10.30 निकलना था तो समय पर पहुंच कर आराम करना था फिर सबेरे तैयार हो नाश्ता करना। समय तो लगना ही था। हम समय पर होटल पहुंच गए एक एक प्याली चाय पी और बिस्तर के कोने थाम लिए।

इस पोस्ट में इतना ही, बाकू की गुलाबी सुबह का विवरण अगली पोस्ट में


फ्लैग स्क्वायर 


शहीदी मस्जिद 

लाइट टावर 


फ्लेम टावर्स 


फ्लेम टावर्स के साक्षी 


फ्लेम टावर्स 


चमकती सीढियां 


चमकती सीढियां 


फ्लेवर्स  रेस्तराँ


   फ्लेवर्स  रेस्तराँ

रविवार, 7 जुलाई 2024

अज़रबैजान यात्रा (भाग 2)

 

अज़रबैजान यात्रा (भाग 2)

पिछली पोस्ट में आपने अज़रबैजान देश के बारे में कुछ सामान्य बातें की थीं।

आज से अगले कुछ पोस्ट में आपको अज़रबैजान की विस्तृत जानकारी देती हूँ हर वो जगह जो मैंने देखी है अपने नजरिए से आपको दिखाने का प्रयास करूंगीं। ये हमारी एक बहुत छोटी सी यात्रा थी, मात्र 5 दिन की, हमारी यात्रा 21 मई से 25 मई तक की थी, 26 मई को सुबह हम वापस आ गए थे। हमने अपना टिकेट और होटल एक महीना पहले ही बुक कर दिया था।  हमारी फ्लाइट 21 मई को सुबह 6।33 पर अज़रबैजान एयरलाइंस की थी।  चूंकि हम दो साल पहले ही ग्रेटर नोएडा में रहने आए हैं एक तो बियाबान जंगल और दूसरी एअरपोर्ट से दूरी जिसमें यहाँ से एयरपोर्ट पहुंचने में 2 घंटे तो लग ही जाते हैं फिर एअरपोर्ट पहुंच कर बड़ी भगदड़ हो जाती है। हम ऐसा सोचते थे कि रात 11–12 बजे तक टैक्सी मिल जाती होगी उसके बाद मुश्किल होगी लेकिन बहुत जल्दी एअरपोर्ट पहुँच कर भी क्या करेंगे। यही सोचते रात 1:30 टैक्सी बुक की लेकिन यह क्या टैक्सी तो 5 मिनट में ही आ गई। अब क्या करें तो सोचा कि चलो चलते हैं। हम दोनों  20 मई की रात 1:30 घर से निकले सड़क एकदम खाली थी सो 2:30 पहुंच भी गए। हम लोगों के जल्दी पहुचने का एक फायदा हुआ कि अज़रबैजान काउंटर पर भीड़ नहीं थी। लगभग 4 बजे सारी औपचारिकताएं पूरी करके हम निश्चिंत हो गए, इस बार समय काफी मिल गया था तो भागदौड़ और गहमागहमी से बच गए। 4 बजे लाउंज में  पहुंच कर आराम और कुछ चाय नाश्ता किया। 5:30 बजे लाउंज से निकले बोर्डिंग के लिए ज्यादातर लोग अपनी सीटों में धंस चुके थे। हमने भी अपनी सीट पकड़ी बाहर की तरफ बैठे सज्जन को अनुरोध करके उठाया और बैठ गए। यहाँ ये बताती चलूं कि टिकट तो अप्रैल के पहले हफ्ते में हो गया था और इधर 28 अप्रैल को मेरा बांया पैर खौलती हुई चाय से जल गया। घुटने के नीचे का हिस्सा और पंजा। फफोले भी निकले भयंकर कष्ट था। उम्मीद पर दुनिया कायम है सो मैं भी रही। बहुत मनुहार के बाद 18-19 तारीख तक पैर ने जाने की हामी भर दी। घाव कच्चा था कपड़े पहनने की मुश्किल थी फिर भी न मैंने, न मेरे पैर ने हार मानी। आखिरकार 21 मई को भारतीय समयानुसार 10:30 बजे अज़रबैजान की राजधानी बाकू पहुंच गए। जल्दी ही सामान ले कर हम बाहर आ गए। हवाई अड्डे से होटल तक की यात्रा बहुत मनोहारी थी, सड़क के दोनों ओर जहां तक देखो सिर्फ हरियाली ही थी। यहाँ हमारे देश के विपरीत  सड़कों पर न कहीं धूल थी न ही कूड़ा करकट। हमारे देश के विपरीत यहाँ के दरख्तों और उनके नीचे उगने वाली घास और माटी का आपस में  घनिष्ठ प्रेम दिखा। हर दरख़्त के तने तक फैली हरी घास मानों अपने देश की मिट्टी को अपने अंदर समेटे हो कहीं माटी का कोई कण उड़ न जाए क्योंकि ये मिट्टी तो मेरे वतन की है। एक से डेढ़ घंटे में हम होटल पहुंच गए होटल बहुत अच्छा था हर सुविधा थी। जल्दी ही फ्रेश हो कर हम निकल पड़े सैर को। दोपहर के खाने के लिए पहुंचे माया रेस्टोरेंट,जैसा कि आपको नाम से ही पता चल गया होगा ये इंडियन रेस्टोरेंट है। ये एक पार्क के दूसरे कोने में स्थित है। पार्क का नाम पोर्ट बाकू पार्क है।  यहाँ भारतीय शाकाहारी खाना उपलब्ध है। हमने पहले से ही बुक कर लिया था वहाँ बफेट और अलाकार्ट मेनू दोनों थे हमने दाल रोटी सब्जी रायता सलाद और साथ में स्वीट डिश खाई फिर बाहर निकल आए।

माया रेस्टोरेंट के सामने सड़क के उस पार समुद्र तट और उस तट से सटी दुनियाभर के मशहूर डिजाइनर के बड़े-बड़े शो रूम ऐसा लग रहा रहा था मानों किसी बहुत बड़े देश में पहुंच गए हैं इतना छोटा देश आजाद हुए अभी 30 –33साल ही हुए हैं और इतनी प्रगति सोची समझी नीतियां और पर्यटन को बढ़ावा की दिशा में किए गए कार्य दिखते हैं जिन्होंने जैसे मुझे प्रभावित किया, औरों को भी जरूर ही किया होगा। उस खूबसूरत फूलों और हरियाली से लदे पार्क में फोटो खिंचवाने से हम अपने आपको रोक नहीं पाए फिर क्या शुरू हो गया फोटो सेशन बताती चलूं आम लोगों के विपरीत मुझे फोटो खिंचवाना पसंद नहीं है फिर भी यादें संजोना तो बनता ही है।

इस पोस्ट में इतना ही बाकू की आज की हसीन शाम का विवरण अगली पोस्ट में















शनिवार, 6 जुलाई 2024

एक छोटी सी यात्रा अज़रबैजान की (भाग 1)

 एक छोटी सी यात्रा अज़रबैजान की


एशिया और यूरोप के चौराहे पर स्थित काकेशस पर्वत श्रंखला के पूर्वी भाग में एक गणराज्य है जो पूर्वी यूरोप और पश्चिमी एशिया के मध्य बसा हुआ है। भौगोलिक रूप से यह एशिया का ही भाग है। यह आर्मेनिया, जॉर्जिया, रूस, ईरान और तुर्की से घिरा हुआ है। इसका तटीय भाग कैस्पियन सागर से लगता है। अज़रबैजान 1918 से 1920 तक एक स्वतंत्र राष्ट्र था लेकिन फिर इसे सोवियत संघ में शामिल कर लिया गया और 1936 में यह एक गणराज्य बन गया।  अजरबेजान में 23 सितंबर 1989 को संप्रभुता की घोषणा की और 30 अगस्त 1991को एक स्वतंत्र देश बन गया। यह एक धर्मनिरपेक्ष देश है, इसकी अधिकांश जनसंख्या इस्लाम धर्म की अनुयाई है।  यह देश धीरे-धीरे सत्तावादी लोकतंत्र की ओर बढ़ रहा है। यहाँ की जनसंख्या लगभग एक करोड़ है।  यहाँ की मुद्रा को मनत कहते हैं और यह इस समय 1 मनत लगभग 50 भारतीय रुपए के बराबर है। इस छोटे से देश में अलग-अलग जलवायु क्षेत्र हैं इसलिए यहाँ का मौसम बताना मुश्किल होता है। यहाँ अगर पहाड़ हैं, तो वहीं तटीय शहर भी हैं।  सबसे अच्छी बात यह है कि आप जब भी जाना चाहें, आपको अपने पसंद के अनुसार इस देश में कहीं ना कहीं मौसम अच्छा मिल जाएगा।  आमतौर पर देखा जाए तो जून में औसत तापमान ऊंचे इलाकों में पहाड़ों की तरफ 5 डिग्री और निचले इलाकों में 27 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। यही जनवरी में ऊंचे इलाकों में माइनस 10 डिग्री और निचले लाखों में प्लस 3 डिग्री रहता है और गर्मियां जब यहाँ पड़ती है तो यहाँ की गर्मियों में सबसे गर्म दिनों में तापमान 45 डिग्री तक पहुंच जाता है और सर्दियों में माइनस 40 डिग्री तक। वसंत ऋतु यहाँ की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय होता है। मई के महीने में अगर आप अजरबेजान की यात्रा करते हैं तो आपको वसंत के आखिरी निशान और गर्मियों की पहली आहट का आनंद लेने का मौका मिलेगा। यह समय कैस्पियन तट के पास काफी शानदार लगता है। यदि आप छुट्टियां समुद्र तट पर धूप भरे दिन और पहाड़ों में पैदल यात्राएं करके मनाना चाहते हैं तो मई के मध्य से सितंबर तक का समय आपके लिए सर्वोत्तम है। इस देश की राजधानी का नाम बाकू है। जिसका अर्थ यहाँ की भाषा में हवा होता है। वाकई में बाकू शहर हवा का शहर ही है। यह घूमने के लिए एक अच्छी जगह है। बाकू की जनसंख्या 11 लाख के आसपास है। हमारे देश से अज़रबैजान जाने वाली फ्लाइट्स इंडिगो एयरलाइंस, अज़रबैजान एयरलाइंस और एयरोकैरेबियन एयरलाइंस की हैं। दिल्ली से बाकू की अज़रबैजान एयरलाइंस डायरेक्ट फ्लाइट है। इस उड़ान की अवधि 3 घंटे 59 मिनट है। हमारे देश और अज़रबैजान के समय में भी थोड़ा अंतर है। हमारे देश में समय अज़रबैजान के समय से एक घंटा तीस मिनट आगे है। यहाँ का वीसा भी ऑनलाइन तीन से चार दिन में मिल जाता है। आजकल ज्यादातर फोन में गूगल ट्रांसलेटर होता है तो हम आमतौर पर कहीं भी जाने के पहले उस देश की डिक्शनरी डाउनलोड कर लेते हैं। फिर गूगल ट्रांसलेटर बिना वाई फाई के भी काम करती है। इसकी हर जगह जरूरत पड़ती है फिर चाहें टैक्सी बुक करनी हो या खरीददारी। अपनी बात अंग्रेजी या हिंदी में कहें और उसको यह एप वहाँ की भाषा में अनुवाद कर के दिखा देता है। लीजिये हो गया काम फिर चल पड़िए मनमर्जी से, जहां भी जाना हो या जो करना हो। आप चाहें तो उस लिखे हुए को सुना भी सकते हैं आप चाहें तो उसे बोल कर टाइप कर सकते हैं, क्योंकि फिर आपको इंटरनेट की जरूरत इस काम के लिए नहीं पड़ेगी। टैक्सी ड्राइवर भी आपको सारे रास्ते अनुवाद कर-कर के समझाता और दिखाता रहेगा। यहाँ पर टैक्सी आसानी से उपलब्ध हैं। यहाँ की प्रचलित टैक्सी सेवा बोल्ट एप से बुक होती है जो उबर की ही तरह काम करती है। उसका एप डाउनलोड करना पड़ता उसे भी आप यहीं से डाउनलोड कर ले जाएँ। यहाँ टैक्सी सस्ती है कारण पेट्रोल का उत्पादन है और यही अज़रबैजान का मुख्य आय का स्रोत है। अब उन्होंने भी तेल के अलावा अन्य देश जैसे दुबई या सऊदी जैसे पर्यटन को बढ़ावा देना शुरू किया है। यहाँ पेट्रोल 2 मनत का एक गैलन है मतलब लगभग 20 रूपये लीटर है। अब बात करते हैं होटलों और रहने की व्यवस्था और सुविधा की। यहाँ पर रहने की हर सुविधा उपलब्ध है जो हर किसी की अपनी जेब और जरूरत के हिसाब से मिल जाती है। सभी तरह के होटल हैं पांच सितारा, साधारण, अति साधारण और होस्टल भी। खाने की थोड़ी मुश्किल है विशेषकर शाकाहारियों के लिए। यहाँ लगभग हर जगह पब्लिक प्लेसेस प्रया रेस्टोरेंट्स में वाई फाई मिल जाता है, फिर भी यदि जरूरत हो तो Azercell का सिम कार्ड लिया जा सकता है। यहाँ एक हफ्ते वाला कार्ड है जिसमें 6 जी बी डेटा आपको 30 मनत में मिल जाता है जो एक सप्ताह के लिए पर्याप्त है।  कार्ड किसी एजेंट से लेंगे तो कुछ महंगा होगा और उसी को सेंट्रल मार्केट से या Azercell के शोरूम से लेंगे तो कुछ सस्ता मिल जाएगा।

अंत में इतना कहूँगी कि यदि आपको हरियाली, पहाड़, समुद्र, हवा के झोंके और खुली जगह सब कुछ एक ही जगह चाहिए तो ये देश और इसकी राजधानी बाकू आपके लिए एक अच्छा विकल्प है। यहाँ भीड़ नहीं है क्योंकि जनसंख्या सीमित है, सफाई गज़ब की है, वीसा आसानी से मिल जाता है । हां सड़कों पर वाहन बहुत हैं क्योंकि पेट्रोल सस्ता है। पर सड़कों पर अफरा-तफरी नहीं है। जिधर नजर दौड़ाइए उधर सिर्फ हरियाली और साफ सफाई। कहीं भी कुछ भी बिखरा हुआ नहीं है। बिखरा है तो मात्र प्राकृतिक सौंदर्य और खुशमिजाजी।




 

यात्रा वृतांत अगली पोस्ट से

रविवार, 30 अक्टूबर 2022

कुछ तो

कुछ तो 


सोचती हूं 

खोल दूं बचपन की कॉपियां और निकाल दूं 

सब कुछ जो छुपाती रही 

समय और समय की नजाकत के डर से 

निकालूँ वह इंद्रधनुष और निहारूं उसे 

जो निकलता था 

मेरे बचपन की बारिशों में 

तब जब मैं बनाती थी पापा के लिए भांग के पकौड़े 

मां के न होने पर या होते हुए भी न होने पर 

निकालूं नानी की दी वो नन्ही बिंदिया 

उन्हें छू कर महसूस करूं, सजा लूं माथे पर 

जो पाबंदियों के कारण कभी सज न सकीं 

निकालूं नेल पॉलिश लगाने को मेरी नन्ही उंगलियां 

जो मचलती रही पूरे बचपन रंग भरने को  

रंग दूं उन्हें तितलियों के रंग में और तितली हो जाऊं

निकालूं बचपन की अधूरी नींदें 

सो जाऊं कहीं दुबक कर 

जो कभी मेरे हिस्से न आयी  

तब जब बनाती थी पापा के लिए खाना 

कहीं उन्हें देर ना हो जाए 

निकालूं चढ़ी त्योरियों के डर से 

दबी छुपी वह हंसी वो खिलखिलाहट 

हंसूं दिखाऊँ दसों दिशाओं को 

कि मैं भी हंस सकती हूं 

निकालूं वो पलक पांवड़े 

बिछा दूं मात्र अपने लिए 

जो बिछाए सदा मैंने सबके लिए 

निकालूं बचपन में लिखी कविताएं मेरी 

जहां छुपे हैं कुछ दर्द और पीड़ाएं मेरी  

जो तूफान की आशंकाओं के कारण 

कभी बाहर में ना आ सके 

निकालूं वह मसोसा मन 

वह रूपसी नवयौवना सी स्वचित्रित अपनी ही तस्वीर 

तब जब सखी सहेलियां व्यस्त थीं यौवन की खुमारीं में 

और मैं घर के कामों में 

निकालूं वह क्लास के लड़कों की बातें 

जो रखी थी छुपा कर 

मौका देख कर पड़ोस वाली भाभी से कहने को 

हाथ हैं कि थक गए हैं पन्ने पलटते पलटते  

पर नहीं तैयार है  

पन्नों में कैद बचपन लड़कपन खत्म होने को 

सोचती हूं आजाद कर दूं 

अपनी कॉपियों में बंद 

उस बचपन और तमाम तितलियों को 

उड़ लेने दूं

जी लेने दूं उन्हें भी खुली हवा में 

आखिरकार उन्हें भी हक है 

अब आजाद होने का 

एक आकाश होने का


शनिवार, 6 अगस्त 2022

अमावस

 अमावस

 

यूँ कुछ दिनों से मेरे भीतर

बहुत कुछ बदल रहा था

घट रहा था बढ़ रहा था

यूँ पूरा एक चाँद

घटता,बढ़ता लड़ता रहा

आज अचानक यूँ लगा

अमावस का पूरा एक चाँद

मेरे भीतर पिघल रहा हो

मेरी अमावस में घुल रहा हो

भीतर एक तन्हा

आसमान मचलने लगा

सघन मौन पीड़ा को 

स्वर देने लगा

मन की प्रस्तर सतहें

टूटने लगीं चटखने लगीं

दरारों में चाँद उतरने लगा

वेदना की ज्योति के गले

लगने लगा 

मिलने लगा

आकाश न पाने की पीड़ा 

अनुभव करने लगा

एक निगाह

चेहरे पर गिर कर 

टूट कर बिखरने लगी

जख्मों के पैबन्दों के 

टांके टूटने लगे

मैं अंजुरी में तड़प भरने लगी

सन्नाटे के 

छंद और चौपाइयां 

फुसफुसाने लगे

चाँद के अनगिनत 

टुकड़ों को समेटने लगी

एक सुरक्षित एकांत भरने लगी

सोचने लगी

ये तो फिर भी अमावस का चाँद है

कभी तो उबर लेता होगा

मैं तो पूरी की पूरी

अलिखित, अपठित, अमिट

अमावस हूँ

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