होंठ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
होंठ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 24 फ़रवरी 2013

पर तुम न आये


पर तुम न आये


होंठों ने कितने ही गीत गाये
आँखों ने सपने सजाये
कितने ही मौसम गुज़रे
कितने ही सावन आये
पर तुम न आये.

कभी सोचा तेरे होंठों की छू पायें
पर आस पास थे भौरों के साये
ये बात और है कि हमने
कुछ ज्यादा ही सपने सजाये
पर तुम न आये.

बिछुड़ गए अपने ही सब साए
आज मेरे ख्वाब ही ख्वाब होने की आये
शुक्र है तुम आज मेरी मजार पर आये
फूल चढाने न सही,
ले जाने तो आये.
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...