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रविवार, 18 सितंबर 2011

बाज़ार


बाज़ार 

एक तरफ शेयर बाज़ार की अस्थिरता
रोज गिरते चढ़ते भाव 
आसमान छूते 
सोने चांदी के दाम.
बाजार से दुखी 
हार्ट अटैक और आत्मा हत्या से मरते लोग 
दुसरी तरफ मेरी जमा पूंजी 
बाज़ार के उतार चढ़ाव से बेपरवाह. 
सोने चांदी के आभूषण
लॉकर की चहारदीवारी में
इत्मिनान से हैं 
ई टी एफ गोल्ड
सुस्ता रहा है मस्ता रहा है.
मेरा इकलौता शेयर..... 
कब लिया था....याद ही नहीं 
शायद बीस पच्चीस बरस पहले.  
याद है तो बस इतना
कि लोगों ने 
उसके बाज़ार भाव को टटोला  
उसके तिमाही, छमाही और सालाना 
नतीजों की पड़ताल की  
उसमे मेरे भविष्य की संभावनाओं को तलाशा  
और नकार दिया.  
पर मैं दृढ थी 
नहीं तलाशा मैंने उसमे भविष्य.
वो भी आम शेयर की तरह घटता बढ़ता है. 
पर वो जब भी घटा 
घटा है मेरे अंदर 
क्रोध, इर्ष्या, अशांति 
और समाज से अलग रहने की प्रवृति.
जब भी बढ़ा वो 
बढ़ा है मेरे अंदर, मेरे लिए 
प्रेम, आत्म सम्मान, आत्म विश्वास. 
उसके और दूसरों के लिए
प्रेम, सम्मान व निष्ठा.   
आज लोग
पूछते हैं मुझ से 
पिछले जन्म में 
बहुत गहरी गंगा में जौ बोये थे क्या?
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