राजनीति
राजनीति मेरे रग रग में बसी है
लूट, खसोट, सेंधमारी और क़त्ल करवाए मैंने.
फिर उन्हीं के आशियाने भी बसवाये मैंने.
हर राजनीतिज्ञ की तरह अपने इर्द गिर्द,
अभेद्य सुरक्षा आवरण भी रचाए मैंने.
हर सुरक्षा चूक की तरह,
यहाँ भी एक चूक हो गयी.
मेरे जीवन की सबसे बड़ी भूल हो गयी.
करवाती थी, लोगो से, लोगो के लिए, जो मैं.
अपने लिए अपने आप ही कर बैठी वो मैं.
तख्ता पलट गया मेरा.
मोहल्ले की संसद में मजबूर हो गयी मैं.
आम राजनेता की तरह, मायूस हो नहीं,
बड़े अभिमान से नैतिक जिमेद्दारी भी ले बैठी मैं.
आज तक कर रही हूँ,
अपनी भूल का प्रायश्चित मैं.
जो लोग किया करते थे,
कभी दर पर मेरे.
वो आमरण अनशन आज भी किये बैठी हूँ मैं.
जो किया करती थी कभी,
हजारों दिलों पर राज, मैं.
तेरे दिल के द्वार पर
दरबान बनी बैठी हूँ, मैं.
हाँ, इस प्रेम की राजनीति में,
जो कुछ कबूला है मैंने,
वो सच है.
पर कैसे गिर गयी,
मेरी मग़रूर सरकार.
इसका मुझे आज भी अचरज है.
