झूठ के पांव
झूठ के पांव निकलते देखा है
सच पे सवार होते देखा है
कान्हा की आड़ में,
लीला का नाम ले,
कदाचार देखा है
पवनसुतों के सीने में,
व्याभिचार देखा है
मर्यादा पुरुशोत्तमों को करते,
भ्रष्टाचार देखा है
भ्रष्टाचार देखा है
अपनी आयु लीलने को,
जानकी को लाचार देखा है
दूर क्यों जाऊं कहीं,
जब पतियों को,
करते दुश्शासन सा,
दुराचार देखा है
दुराचार देखा है
किस किस की गवाही दूँ,
कौन मानेगा
जब मैंने
झूठ के पांव निकलते देखा है
सच पे सवार होते देखा है
(फोटोग्राफ मेरी बेटी शाश्वती दीक्षित द्वारा हमारे व्यक्तिगत एल्बम से)
(फोटोग्राफ मेरी बेटी शाश्वती दीक्षित द्वारा हमारे व्यक्तिगत एल्बम से)