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रविवार, 6 मार्च 2011

रुमाल


रुमाल
 

पुरानी फ़िल्में...
वो नायक नायिका का रूठना मनाना.    
नायिका के आंचल का उड़ना, 
नायक का उसे पकड़ना और फिर मान जाना.   
नायिका का रोना.
नायक का रुमाल निकालना,
आंसू पोंछना. 
रुमाल का कभी नायक के पास,
कभी नायिका के पास रह जाना.   
सारी उम्र उसे पास रखना.
सहेजना, प्यार करना, कभी उलाहना देना.
मैं भी तो तुम्हारे जीवन की नायिका हूँ. 
जब भी रूठी हूँ ,
उठा लाते हो कुछ पेपर नेपकिन. 
मेरे गालों के भीगने से भी पहले,
भीग जाते हैं वो, 
कहाँ सहेजूं, कैसे सहेजूं,
उन्हें दोनों हाथों के बीच गोल गोल घुमाते हो
फैंक देते हो डस्ट बिन में.
कई बार सोचती हूँ पूछूं तुमसे,
क्यों नहीं रखते हो इक रुमाल बस मेरे लिए. 
पर डरती हूँ कहीं  पूंछ न बैठो तुम,
तुम भी तो कहाँ रखती हो आंचल आज कल.

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