शुक्रवार, 12 जुलाई 2024

अज़रबैजान यात्रा (भाग 7)

 अज़रबैजान यात्रा (भाग 7) - कीचड़ के ज्वालामुखी

गाड़ी जो हमें मड वोल्कानो ले कर गयी 

आज की सुबह कुछ अलग सी लगी उत्साह भरपूर था फिर भी मन के कोने में ऐसा लग रहा था कि कहीं कल जैसा उबाऊ न हो जाए पर दूसरी तरफ मन कह रहा था कि आज तो ज्वालामुखी देखने हैं कुछ रोमांचकारी तो होगा ही।  फिर क्या था होटल से नियत समय पर निकल पड़े। लगभग डेढ़ घंटे की यात्रा के बाद हम डैस गिल पहुंचे। यहां गोबिस्तान रिज़र्व में मिट्टी के ज्वालामुखी घूमने के लिए लोकप्रिय हैं मड ज्वालामुखी या मड डोम मिट्टी या गारे, पानी और गैसों के विस्फोट से निर्मित भू आकृतियां हैं मिट्टी के ज्वालामुखी भूगर्भीय संरचनाये हैं जो तब बनती है जब पृथ्वी की सतह के नीचे दबाव वाली गैस है और तरल पदार्थ मिट्टी, पानी और चट्टानों को जमीन में एक दरार के माध्यम से ऊपर धकेलते हैं। मिट्टी के ज्वालामुखी आकार में कुछ मीटर ऊंचे छोटे शंकु से लेकर कई किलोमीटर चौड़े बड़े पहाड़ों तक हो सकते हैं। मिट्टी के ज्वालामुखीओं से अक्सर मीथेन गैस और अन्य हाइड्रोकार्बन गसों की रिहाई होती हैं। ये खनिजों और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों का स्रोत भी हो सकते हैं। अज़रबैजान मिट्टी के ज्वालामुखियों की बहुतायत के लिए जाना जाता है। हमारी दुनिया में कुल 700 के लगभग मिट्टी ज्वालामुखी हैं  जिनमें से 350 से ज्यादा अजरबेजान देश में स्थित है। अजरबेजान में मिट्टी ज्वालामुखी के बनाने की प्रक्रिया 25 मिलियन साल पहले शुरू हुई थी जो अभी तक चल रही है। अजरबेजान में कैस्पियन सागर के पास स्थित डैस गिल एक उल्लेखनीय मिट्टी ज्वालामुखी स्थल है। यह कई बड़े मिट्टी के ज्वालामुखीओं के साथ-साथ गर्म झरनों और खनिज भंडारों का घर है।

वहाँ पहुंचकर हमें कच्चे और दुर्गम रास्तों पर चलने वाली फोर व्हील ड्राइव दूसरी टैक्सी लेनी पड़ी जो ज्वालामुखी तक ले जाने के लिए नियत होती है। टैक्सियों की हालत खस्ता से भी खस्ता थी देख कर बहुत अजीब लगा, बैठने को दिल भी नहीं हुआ पर वहाँ और कुछ था ही नहीं सिर्फ इन गाड़ियों के सिवाय जो इन रास्तों के लिए ही बनी थीं। जैसा पिछली पोस्ट में बताया वैसे ही पुरानी से भी पुरानी वाली गाड़ियां 1960 वाली गाड़ियां थी। गाड़ी में बैठने के बाद याद आया जैसलमेर के सैंड ड्यून्स, दुबई के सैंड ड्यून्स और वो रोमांचकारी यात्रा। वहाँ तो रेत ही रेत होती है। यहां थी महीन मिट्टी और पत्थर के पहाड़।  पहाड़ों का रंग पीला और सलेटी था।  मिट्टी स्लेटी सफेद और महीन से भी महीन थी। गाड़ी में बैठते ही वो जर्जर इमारत सी गाड़ी हवा से बातें करने लगी। यहां भी कोई रोड नहीं थी। कच्चे रास्ते  पर एक साथ बहुत सी टैक्सियां भागने लगीं, धूल उड़ती हुई हर तरफ गर्द ही गर्द उड़ाने लगी, हर टैक्सी वाला दूसरे से आगे जाने की होड भी करने लगा। ढंग से पकड़ कर न बैठो तो गिरने का डर। बीच-बीच में मिट्टी में पड़ी दरारें यह बता रही थी यहां कभी पानी था जो अब उड़ गया है। लगभग 10 से 15 मिनट की यात्रा के बाद टैक्सी ने हमें जहां उतारा वहाँ पर थोड़ी-थोड़ी दूर पर फैले हुए बहुत सारे ज्वालामुखी दिखे जिनमें सिर्फ कीचड़ के बुलबुले निकल रहे थे। दो एक ज्वालामुखी में हम ऊपर तक चढ़कर गए। वहाँ हर एक इंसान प्रकृति के इस दृश्य को निहार कर अभिभूत हो रहा था। कुछ लोग कीचड़ निकाल कर अपने चेहरे पर लगा रहे थे। हमारे टैक्सी ड्राइवर ने भी जल्दी ही वह कीचड़ एक बोतल में भरकर मुझे दे दिया। कहते हैं इसमें औषधीय गुण होते हैं।  मुख्य रूप से यह काली मिट्टी है जो धरती के गर्भ से निकल रही है, जिसमें तमाम किस्म के खनिज तत्व मिले हुए है इसलिए इसमें कुछ चमत्कारी गुण समावेषित हो गए हैं।

इन मड वोल्कानो में कुछ काफी बड़े हैं जिनमें आप स्नान भी कर सकते हैं क्योंकि इसके कीचड में जैसा मैंने पहले बताया औषधीय गुण होते और तमाम त्वचा संबंधी रोगों के साथ ही पेरिफेरल और सेंट्रल नर्वस सिस्टम की बीमारियों और कई अन्य बीमारियों में भी काफी कारगर माना जाता है। यह मिट्टी एकदम ठंडी होती है इसलिए स्नान के लिए भी उपयुक्त है। इसके पास ही एक साफ़ पानी की झील भी है जिसमें मड वोल्कानो में स्नान के बाद स्नान किया जाता है।

टैक्सी वाले को जल्दी थी, अगली सवारी लेने की इसलिए वापस जाने के लिए बार-बार कहने लगा फिर भी हम 20 से 25 मिनट वहाँ रुक छोटे बड़े सारे ज्वालामुखियों को देखा और लौट पड़े जाते समय थोड़ा उत्साह था, थोड़ा नहीं बहुत उत्साह था तो ध्यान दूसरी तरफ नहीं गया, लौटते समय ऐसा लग रहा था मानों गाड़ियों की रेस हो रही है। कोई प्रतिस्पर्धा चल रही हो और हम भी उसका हिस्सा हों। अपनी मुंबईया फिल्में याद आ गई मानो एक गाड़ी में बदमाश किसी को अपहृत करके ले जा रहा है और उसके पीछे बीसियों गाड़ियां पीछा कर रही हों या फिल्म का हीरो आगे भाग रहा हो या बदमाश भाग रहा हो और पुलिस उसका पीछा कर रही हो। यह सारे विचार दिमाग में हलचल पैदा करने लगे, बड़ा अच्छा लग रहा था कि हम भी किसी मुंबईया फिल्म के हिस्सा बन गए हैं। जल्दी ही हम पक्की सड़क पर लौट आए यह एक अद्भुत और रोमांचकारी अनुभव रहा जिसे आंखों और कैमरे में संजोया, सजाया गाड़ी की इतनी रफ्तार होने के बावजूद भी लौटते समय आप लोगों के लिए एक दो वीडियो भी बनाएं आप उनका आनंद लें।

बाकू में एक रोमांचकारी यात्रा के साथ इस पोस्ट में इतना ही, अनूठे संग्रहालय की सैर का विवरण अगली पोस्ट में...



मिट्टी के ज्वालामुखी की तस्वीर नज़दीक से 



मिट्टी के ज्वालामुखी का विडियो 


मिट्टी के ज्वालामुखी का विडियो 


गाड़ियों की दौड़ मिट्टी के ज्वालामुखी जाने के लिए 


कुछ हमारे पल 




गुरुवार, 11 जुलाई 2024

अज़रबैजान यात्रा (भाग 6)

 अज़रबैजान यात्रा (भाग 6) - गबाला की रोमांचक सैर 


आज की सुबह हम नियत समय पर अपने होटल से अपने गंतव्य की ओर चल पड़े आज का हमारा गंतव्य था अज़रबैजान में छुपा हुआ स्वर्ग जिसका नाम है गबाला यह एक शहर है जो बाकू से लगभग 225 किलोमीटर दूर ग्रेटर काकेशस पहाड़ों की दक्षिणी ढलान पर स्थित है।  आमतौर पर वसंत और पतझड़ में यहां मौसम सुहाना रहता है।  गर्मियों में गर्म और सर्दियों में सर्द रहता है। इस शहर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि इसके अस्तित्व की तरह ही रंगीन रही है। यह अज़रबैजान के इतिहास के सबसे चमकीले पन्नों में से एक है। इस क्षेत्र की प्राकृतिक पर्यावरण परिस्थितियां पर्यटन विकास के लिए नए द्वार खोलती हैं। यहां का मुख्य आकर्षण तुंफ़डाघ माउंटेन है जो गबाला के शहर के केंद्र से लगभग 4 किलोमीटर दूर है । यहां इस पर्वत श्रेणी पर गर्मियों और सर्दियों में मनोरंजन की सुविधाएं हैं । यहां विंटर समर टूरिज्म सेंटर है, स्कीइंग का मौसम यहां 15 दिसंबर से शुरू होकर 31 मार्च तक चलता है, तब तुंफ़डाघ माउंटेन  में स्नोमोबाइल राइडिंग, स्लेज ट्रिप्स, एडल्ट एटीवी क्वॉड बाइक और स्नोबोर्डिंग जैसे मनोरंजन कार्यक्रम भी होते हैं । पहाड़ के खूबसूरत नजारों को देखने के लिए रोपवे की सुविधा है। आप पहाड़ों पर जाकर वहाँ का खूबसूरत नजारा देख सकते हैं और सर्दियों के मौसम में सर्दियों के खेलों का लुत्फ उठा सकते हैं।

हम सबेरे 8 बजे निकले थे दूरी ज्यादा थी। 5 घंटे तो लग गए पहुंचने में रास्ते में हमने रुक कर एक राज रेस्टोरेंट में लंच किया । लंच बहुत अच्छा था उसके बाद हम फिर गबाला के लिए निकल गए इस देश में भी हमारे देश की तरह रास्ते में टॉयलेट की सुविधा है।  पेट्रोल पंप और कुछ रेस्टोरेंट और कुछ जगह पर टॉयलेट है। उसमें पैसे भी नहीं देने पड़ते हैं यहां पर होटल के बाहर जितने भी टॉयलेट आपको मिलेंगे वह सब इंडियन स्टाइल के मिलेंगे और होटल के अंदर टॉयलेट में पानी के लिए जेट और सारी सुविधा मिल जाती है। हम गबाला पहुंचने तक वैसे ही थक गए थे पर जोश भरपूर था। हमने यहां दो-तीन घंटे बिताए पर जैसा कि इसके बारे में  सुना और पढ़ा था यहां वैसा स्वर्ग जैसा हमें कुछ भी नहीं दिखा। हो सकता है, गर्मी बहुत थी और बर्फ भी नहीं थी, न ही कोई खेल और मनोरंजन का कोई साधन मिला फिर भी हमने वहाँ का जितना भी हो सका आनंद लिया, ऊपर तक गए, मजे किए, ठंडी हवा का आनंद लिया और और लौट चले अगले नए पड़ाव नेहूर झील की तरफ।

यह नेहूर झील गबाला से 3 किलोमीटर पूर्व में गुल्लुबुर, गोयदाग और युमुरू पहाड़ों के बीच प्राकृतिक रूप में स्थित है। नेहूर झील गबाला की सबसे खूबसूरत जगह में से एक है । यहां से काकेशस पर्वतों का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है।  शांत वातावरण में पक्षियों की आवाजें बहुत ही मनोहारी लगती हैं। इस झील का उपयोग जलाशय के रूप में किया जाता है और यह गबाला के आसपास के क्षेत्र को पीने का पानी प्रदान करती है । यह मछली पकड़ने के लिए बेहतरीन जगह है और आप यहां पर नौका विहार का भी आनंद ले सकते हैं । झील के बाहर के इलाकों में बहुत सारे रेस्टोरेंट है जहां आप यहां के लोकल खानपान और इंडियन खाने या शाकाहारी खाने और तरह-तरह के नाश्ते और बियर का आनंद ले सकते हैं। वहाँ पैडल बोट का आनंद लिया। वहाँ पर हमने आलू के स्पाइरल जो इंडिया में भी मिलते हैं वैसे स्पाइरल खाए। एक आलू स्पाइरल की कीमत पांच मनत थी जो लगभग ₹250 हुए और दो जूस लिए 8-8 मनत  के थे जो लगभग ₹800 के दो जूस हुए। यहां के मनोहारी दृश्य को आंखों में सहेज कर हम अगले स्थल की ओर निकल गए और यह था 7 ब्यूटी वॉटरफॉल ।

7 ब्यूटी वॉटरफॉल काकेशस पर्वत की सबसे ऊंची चोटियों से गिरने वाला चट्टानी झरना गबाला गांव वंदन में स्थित है। 7 ब्यूटी वॉटरफॉल का नाम उन सात पहाड़ी सड़कों के नाम से आया जिन्हें पार करके हम झरने तक पहुंच सकते हैं। सर्दियों में यहां पहुंचना इसलिए मुश्किल है क्योंकि झरना पूरी तरह से जम जाता है। वसंत और गर्मी में ही आप इसका आनंद उठा सकते हैं। वहाँ चढ़ाई बहुत थी फिर भी काफी ऊपर तक गए। झरनों और कलकल बहते पानी को देख सारी थकान दूर हो गई। फिर हम चल दिए वापस लौटने के लिए । वापस पहुंच कर बाकू के किसी एक रेस्टोरेंट पर कुछ पेट पूजा की। थकान बहुत हो गई थी एक ही दिन में 5 घंटा जाना और 5 घंटा आना । हम लोग शायद रात 12:00 बजे अपने होटल पहुंचे और अगले दिन फिर किसी नई मंजिल की तलाशकर, उस तक समय से पहुंचने का उपक्रम करना था। कुछ नया देखना था, जानना था इसलिए हमने सबसे पहले रात की मंजिल के लिए बिस्तर की ओर कदम बढ़ाए और सपनों में खोने के लिए लेट गए।

कुल मिलाकर कहूँ तो गबाला की यात्रा गर्मी के मौसम में मुझे बहुत सुखद नहीं लगी। जितना और जैसा बोला गया था, वैसा तो वहाँ कुछ भी नहीं था। कहते हैं एयरपोर्ट से सीधे गबाला जाओ वहाँ दो रात रुको। हो सकता है सर्दियों में अच्छा लगता हो पर गर्मियों में तो बिल्कुल नहीं। थकान ज्यादा हुई कुछ देखने को खास नहीं था। यह ठीक है कि 7 वॉटर फॉल्स तो अभी ही दिखेंगे सर्दियों में जमे हुए मिलेंगे और लेक अच्छी थी।  सेवन वॉटर फॉल्स अच्छे थे पर इतना देखने के लिए 10 -12 घंटे की यात्रा, एक मुश्किल सफर था। ये एक अच्छा फैसला और सुझाव नहीं था।

बाकू में एक अत्यन्त रोमांचक दिन की समाप्ति और बस इस पोस्ट में इतना ही, कल एक नये सफ़र का विवरण अगली पोस्ट में...


गबाला कैफ़े और रिसोर्ट 


गबाला में रवीन्द्र 


गबाला में हम तुम 


7 ब्यूटी फाल्स 


गबाला का दृश्य 


तुफानदाग केबल कार में 



रास्ते का भोजन स्थल राज रेस्तराँ


गबाला में हम 


गबाला में हम


गबाला कैफ़े में 


गबाला में दूसरी केबल कार में 


एक फोटो याद के लिए 

गबाला में कुआड बाईक 

गबाला की यादों में 


गबाला का दृश्य 


गबाला केबल कार स्टेशन 


गबाला केबल कार


गबाला कैफ़े में





बुधवार, 10 जुलाई 2024

अज़रबैजान यात्रा (भाग 5)

अज़रबैजान यात्रा (भाग 5) - बाकू की सुहानी शाम


बाकू आइ 

एक रोमांचकारी सुबह की यात्रा के बाद अब बादलों से लदी खुशमिजाज शाम की बारी थी। नियत समय पर होटल से बाहर आ गए। रास्ते के नज़ारे, खूबसूरत इमारतें सब कैद कर लिए, कुछ इमारतें देशभक्ति की जीवंत मिसाल सी लगीं। यहां हर घर कुछ कह रहा था, हर घर अपने देश का झंडा अपने दरवाजे बाल्कनी पर लगा कर अपने देशभक्त होने को प्रमाणित कर रहा था। सभी दृश्य आंखों में समा गए। यहां गाड़ियों के अजब गजब नज़ारे देखने को मिले। अपनी मुंबईया  फिल्मों में जो गाड़ियां 1950 से 1980 तक विलेन से ले कर हीरो तक दौडाते रहे, जो अपने देश में विरले ही दिखती हों, जो शायद सरकारी नियमों  के तहत चलाना जुर्म हो, वहाँ धड़ल्ले से चल रही हैं साथ ही नई गाड़ियां भी एक से बढ़कर एक। आधुनिकता की दौड़ में आलीशान इमारतों, महंगी गाड़ियों, साफ सफाई किसी भी बात में ये देश किसी से पीछे नहीं है, भले इसे आजाद हुए अभी बहुत समय न हुआ हो।  आज की शाम हमें जाना था निजामी स्ट्रीट मतलब दिल्ली का  कनाट प्लेस।  जब हम बाकू आई तक आ पहुंचे तो पता चला कि वहाँ के राष्ट्रपति कहीं जाने को निकले हैं तो कुछ खास रास्ते बंद हैं। बूंदा बांदी भी शुरू हो चुकी थी। बाकू आई भी बंद हो गई थी। अब बारी आई वहाँ के माल में जाने की जो कि वहाँ की बेगम की शाही अंगूठी की डिजाइन पर बनाया गया है यानि कि कमल फूल की आकृति का। इसका नाम डेनिस माल है इसे न्यू पर्ल ऑफ कैस्पियन से भी कहते हैं। वहीं पास में है कार्पेट म्यूजियम है जहां भांति भांति के कार्पेट उपलब्ध हैं और उनका म्यूजियम भी है। डेनिज माल हमारे माल जैसा ही था पर वहाँ झाड़ा-तलाशी नहीं हो रही थी, हमारे यहां की तरह। कुछ देर माल में घूमे फिर रात के खाने के लिए फिर फ्लेवर्स क्यूज़ीन रेस्टोरेंट पहुंचे। रात्रि भोजन के बाद फिर हम निकल पड़े निजामी स्ट्रीट की ओर। इस सड़क का नाम 12वीं शताब्दी के एक प्रसिद्ध कवि निजामी गांजवी के नाम पर रखा गया है, जिन्हें इस्लामी स्वर्ण युग के सबसे  महान कवियों में से एक माना जाता है। यहां फाउंटेन, ओपेरा, बैले थिएटर, निजामी संग्रहालय सब कुछ मिलेगा आपको। एक तरफ कतारबद्ध खाने के रेस्टोरेंट गाना बजाना शोर शराब था। दूसरी तरफ करीने से सजी दुकानें हैं। यहां की मशहूर मिठाई बकलावा की दुकानों पर ज्यादा लोग जमा दिखे। याद तो अपना कनाट प्लेस भी आया पर यहां की भव्यता, सजावट और सफाई कुछ और ही स्तर की थी। दो घंटे पैदल निजामी स्ट्रीट पर रोमिंग करने के बाद रात 12 बजे हम खुशगवार भीगे मौसम का आनंद लेते हुए वापस अपने होटल लौट आए। अगली सुबह 8 बजे निकलना था वो भी नाश्ता करके तो सबेरे जल्दी उठना भी था। एक नई जगह जाने के रोमांच का सपना आंखों के भर कर हमने अपने आपको गहरी नींद में उलझा लिया।


बाकू आई या हैरिस व्हील 


डेनिज मॉल का दृश्य 



डेनिज मॉल का दृश्य 


निजामी स्ट्रीट रात में 

इस पोस्ट में इतना ही, बाकू में एक अत्यन्त रोमांचक दिन, एक नये सफ़र का विवरण अगली पोस्ट में...


मंगलवार, 9 जुलाई 2024

अज़रबैजान यात्रा (भाग 4)

 अज़रबैजान यात्रा (भाग 4) - बाकू की गुलाबी सुबह

अज़रबैजानी कवि के सामने एक चित्र

कल की खुशनुमा शाम के बाद आज अज़रबैजान की राजधानी बाकू में गुलाबी सुबह जाग चुकी थी और उसके साथ ही हम भी तैयार हो कर नाश्ता कर अपने गंतव्य की ओर चल दिए। आज हमारा गंतव्य था पुराना बाकू शहर। जैसा हम सभी जानते हैं हमारे देश में भी आमतौर पर हर शहर में एक पुराना शहर होता ही है वैसे ही यहां भी पुराना है बाकू शहर है। बाकू को दो भागों में बांटा गया है इचारी शाहर और बायर शाहर, इचारी शाहर या इनर सिटी  में रहने वाले यहां के मूल निवासी थे। धीरे धीरे शहर बढ़ा और लोग बाहर आए तबसे ही इसे पुराना बाकू कहा जाता है पुराना बाकू शहर अज़रबैजान की राजधानी का ऐतिहासिक केंद्र है। ये बाकू का सबसे प्राचीन हिस्सा है। जो दीवारों से घिरा है। पुराने शहर में रहने वाले ही 2007 में पुराने शहर की आबादी 3000 थी। दिसंबर 2000 में शिरवानशाह के महल और मेडेन टावर सहित बाकू का पुराना शहर यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में वर्गीकृत होने वाला इस देश का पहला स्थान बन गया था। पुराने शाहर का मेडेन टावर 12 शताब्दी का माना जाता है। इसमें प्रवेश के लिए मुख्य द्वार है, जिससे हो कर आप इस पुराने शहर में प्रवेश कर सकते हैं। इसके अंदर है एक महल या पैलेस, एक मिनिएचर बुक म्यूजियम, पुराना बाजार, पुरानी इमारतें, बलखाती खूबसूरत संकरी गलियां।

एक बड़े लकड़ी के  दरवाजे से प्रवेश करते ही दिखती है सामने अज़रबैजानी कवि और ग़ज़ल गायक अलीघा वाहिद (1895-1965) के सम्मान में बना स्मारक। इसे 1990 में बनाया गया था। तीन कलाकरों द्वारा किए गए निरंतर गहन प्रयासों को स्मारक में कलात्मक और स्थापत्य रूप से संबोधित किया गया है। स्मारक के रूप और आकार की मौलिकता कवि के प्रसिद्ध हेमिस्टिच पर आधारित है जिसका उपनाम "ग़ज़लखान” (गजलों की खान) है। इस मूर्ति  के स्वरूप को हम देखते हैं तो इसमें अलग अलग प्रकरण दिखते हैं। सब कुछ उनके चेहरे और सर पर अंकित किया गया है।  इसमें वाहिद की शादी की पार्टी, उनका अंतिम संस्कार, अंतिम संस्कार में विलाप करती स्त्रियां, कवि के दोस्त और सहकर्मी कविता पाठ और ग़ज़ल गाते हुए, सर के निचले भाग में विधानसभा सब कुछ मिल जाएगा। मूर्ति में कवि का सर पेड़ की तरह बढ़ता और जड़ पकड़ता हुआ दिखता है यही ग़ज़लखान का जीवन दर्शन है, यही वाहिद का रहस्य है।

इस मूर्ति के बाद कुछ सकरी गलियां गलियां है जिन्हें पार करते हुए बीच में पड़ता है मिनिएचर बुक म्यूजियम या इसे बाकू का लघु पुस्तकों का संग्रहालय कह सकते हैं। यह दुनिया का एकमात्र लघु पुस्तकों का संग्रह है जो पुराने बाकू में स्थित है, इसका संचालन 2 अप्रैल 2002 में शुरू किया गया।  2015 में लघु पुस्तकों के संग्रहालय को लघु पुस्तकों के सबसे बड़े निजी संग्रहालय के रूप में गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।  इस संग्रहालय में  प्रदर्शित पुस्तकों को जरीफा सलाहोवा  ने 30 वर्षों की अवधि में एकत्र किया था। उनके संग्रह में 64  विभिन्न देशों की 6500 से अधिक  पुस्तके शामिल है इस संग्रहालय में दुर्लभ प्राचीन धार्मिक पुस्तक भी हैं जो 100 साल से ज्यादा पुरानी है सबसे पुरानी किताब कुरान है जिसे 1672 में सऊदी अरब में प्रकाशित किया गया था।  इसके अलावा एक लघु पुस्तक है जिसमें बीटल्स के गाने शामिल हैं।  संग्रहालय में संग्रह में नियमित रूप से प्रकाशन जोड़े जाते रहते हैं।  पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और तुर्की के राष्ट्रपति नेता मुस्तफ़ा कमाल आता तुर्क के जीवन को समर्पित लघु पुस्तक भी है।  संग्रहालय में रूसी साहित्य पर एक अलग खंड है अजरबैजानी भाषा में बच्चों के लिए लघु पुस्तक भी हैं। संग्रहालय में हजारों परी आकार की पुस्तक हैं। यहां मैक्रो-मिनी, मिनिएचर, माइक्रो-मिनी, अल्ट्रा-मिनी और माइक्रो पुस्तके हैं। पुस्तक के दुनिया की तीन सबसे छोटी किताबें जिनका आकार 2 मिलीमीटर x दो मिलीमीटर है जिन्हें केवल आवर्धक कांच के उपयोग से पढ़ा जा सकता है। संग्रहालय में सबसे चमत्कारी चीज में एकमात्र ऐसी पुस्तक है जो 6 मिलीमीटर x 9 मिलीमीटर आकार की लघु पुस्तक वाली श्रेणी में है।  यह पुस्तक 1985 में मास्को में प्रकाशित हुई थी इसका चार भाषाओं में अनुवाद किया गया है कुल मिलाकर यह संग्रहालय बहुत खूबसूरत है और अजूबा भी लगता है और साहित्य प्रेमियों के लिए एक तोहफा है। 

यहां से आगे जाते ही पड़ता है शिरवानशाह का महल।  शिरवानशाह द्वारा निर्मित 15वीं शताब्दी का यह महल है और इसे यूनेस्को द्वारा "अजरबेजान की वास्तुकला के मोतियों में से एक" के रूप में वर्णित किया गया है। यह भीतरी शहर में स्थित है इस परिसर में महल की मुख्य इमारत दीवान, दफन कोठरी, एक मीनार के साथ शाह की मस्जिद, सैयद याहिया बाकूवी का मकबरा, दक्षिण पूर्व में पोर्टल, मुराद का गेट, एक जलाशय और स्नान घर के अवशेष हैं। पहले मकबरे के बगल में प्राचीन मस्जिद थी। मकबरे के पश्चिम में स्नान गृह के खंडहर अभी भी मौजूद है। ये एक बहुत ही खूबसूरत महल है।

महल से आगे जाने पर पड़ती है बहुत सी सकरी खूबसूरत गलियां इन गलियों को पार करने के बाद आता है यहां का बाजार जो यहां के लोकल सामानों के लिए मशहूर है। इनको पार करते हुए पुरानी इमारत का मजा लेते हुए आगे बढ़ो तो एक चर्च है। उसके पास में ही पूरे शहर का एक नक्शा है जो यह बताता है कि पुराने बाकोई शहर में कौन सी गली कहां है इसको पार करने के बाद बाहर निकले पुराने बाकू से, तो नया शहर आ जाता है सामने सड़क है सड़क को पार करके आगे चले जाएं तो एक मैदान है। मैदान के बाहर आपको दिखाई देता है आलीशान फैला हुआ कैस्पियन सी या समुद्र। कैस्पियन सागर यह बताता है कि पुराना शहर क्यों था? लोग इसमें क्यों रहते थे? क्योंकि यहां से समुद्र तट भी पास था तो लोगों को आने जाने या सामान लाने की भी सुविधा रही होगी।

बीच में हमने वहाँ के एक अजुबे वाद्ययंत्र (जिसे हैण्ड पैन कहते हैं) की सुरीली धुन और उसके कलाकार को आंखों कानों में बसाया, कैमरे में कैद किया और चल पड़े कैस्पियन सागर के तट की ओर वहाँ सागर की ठंडी हवाओं का आनंद ले कर दोपहर के खाने के लिए लौट आए दोपहर खाना हमने प्रीमियर पैलेस होटल के रेस्टोरेंट में किया। सुहानी शाम का आनंद लेने के लिए शरीर को कुछ आराम चाहिए था तो हम अपने होटल लौट आए।

इस पोस्ट में इतना ही, बाकू की सुहानी शाम का विवरण अगली पोस्ट में...

पुराने बाकू शहर का मुख्यद्वार

अज़रबैजानी कवि का वर्णन


इस मूर्ति में बहुत कुछ उकेरा गया है 

(एन्लार्ज कर देखें)


शिरवानशाह पैलेस


बुक म्यूजियम या किताब म्यूजियम यहाँ भी बुक को किताब कहते हैं

बुक म्यूजियम या किताब म्यूजियम


बुक म्यूजियम या किताब म्यूजियम


वर्ल्ड रिकॉर्ड सर्टिफिकेट


एक पल चैन का


शहर के अन्दर की सजावट 


शहर के अन्दर की सजावट



शहर के अन्दर की सजावट


एक दुकान में प्रवेश करते


शहर के नज़ारे



शहर के नज़ारे


सीढियां उतरकर


पूराने बाकू शहर का पूरा नक्शा एक लोहे की प्लेट में बना कर लगाया हुआ है


कैस्सपियन समुद्र के किनारे सुस्ताते हुए


अज़रबैजान का अजब वाद्ययंत्र जिसे हैण्ड पैन कहते हैं










सोमवार, 8 जुलाई 2024

अज़रबैजान यात्रा (भाग 3)

 

अज़रबैजान यात्रा (भाग 3) - बाकू की एक हसीन शाम


फ्लेम टावर्स और मैं 

21 मई की शाम निर्धारित थी शहर को एक चित्रमाला की तरह देखने और विहंगम दृश्य का आनंद लेने की। हम निकल पड़े हाई लैंड पार्क की ओर जो एक पहाड़ी पर स्थित है। ये शहर की खूबसूरती देखने के लिए एक उपयुक्त स्थान है। वहाँ पहुंचते ही सामने दिखता है अज़रबैजान फ्लैग स्क्वायर और यहाँ पर लगा है अज़रबैजान का एक विशाल झंडा जो विश्व के सबसे ऊंचे झंडों में से एक है। इसे  शहर के कई स्थानों से देखा जा सकता है। यहाँ एक ज्योत हमेशा जलती रहती है। अपनी भाषा में कहूँ तो ये यहाँ का शहीद स्मारक और कब्रिस्तान है। फ्लैग स्क्वायर के दूसरी तरफ एक मस्जिद है जिसका नाम शहीदी मस्जिद है। उसके आगे शुरू होता है फूलों से लदा एक खूबसूरत गलियारा।  यहाँ बनी हैं चमचमाती हुई कब्रें। बता दूँ कि ये एक नवजवान देश है  जिसने अभी 30- 32 साल पहले ही तो आजादी पाई है। सड़क किनारे जहां - तहां कहीं भी मिल जाएंगी कब्रें। कोई धर्म कोई जाति कोई भी देश क्यों न हो देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वालों के लिए सर श्रद्धा से झुक ही जाता है, हाथ बरबस ही जुड़ जाते हैं। तस्वीर लेने को दिल नहीं होता, लगता है जो देश के लिए मर-मिट कर अब अपनी कब्र में आराम कर रहा है उसकी तस्वीर लेना शायद अन्याय हो, उसकी चिर निद्रा में खलल हो। यहाँ कब्रें थोड़ी ऊंचाई पर हैं। उनके आस पास बहुत तरतीब से फूलों को लगाया गया है। यूँ  लगता है जैसे देशवासी कहना चाहते हों हे वीर तुमने अपना बलिदान देकर हमारे जीवन में जो रंग भरे हैं तो हम भी पूरी श्रद्धा से तुम्हारी कब्रों पर फूलों के पौधे लगा कर तुम्हारी कब्रों को थोड़ी हरियाली फूल और खुशबू देना चाहतें है, स्वीकार करो। उससे आगे चल कर थोड़ी दूर पर आ जाती है रेलिंग, वहाँ से  दिखता है विशाल कैस्पियन सागर और उसी के तट पर स्थित है बाकू आई फेरिस व्हील। इसकी ऊंचाई 200 फीट है इसमें 30 केबिन हैं। सागर के विपरीत दिशा में दिखता है सबसे अद्भुत नजारा। वे हैं फ्लेम टावर या ज्वाला मीनार ये आग की ज्वाला के आकर की तीन गगन चुंगी मीनार जैसी इमारतों का समूह है। जो दक्षिण, पूर्व और पश्चिम में स्थित हैं।  ये आग तत्व के प्रतीक हैं, यहाँ प्राकृतिक रूप से गैस की लपटें जमीन से निकलती हैं। इसीलिए अज़रबैजान का उपनाम "द लैंड ऑफ फायर" भी है सबसे ऊंची मीनार 597 फीट है। तीनों इमारतों में 33 मंजिलों पर 130 आवासीय अपार्टमेंट्स हैं। एक इमारत में पांच सितारा होटल फेयरमांट है जिसमें 250 कमरे हैं। एक इमारत में कार्यालय ब्लॉक है। ये तीनों इमारतें बाहर से पूरी तरह से एल ई डी स्क्रीन से ढकी हुई हैं।  ये तीनों इमारतें बड़ी डिस्प्ले स्क्रीन की तरह काम करती हैं। शाम का धुंधलका होते ही धधकने लगती हैं ज्वालाएं, बिखरने लगते हैं शरारे। शुरू हो जाता है आग की विशाल लपटों की छाती पर शरारों का करतब। कभी अज़रबैजानी झंडों के रंग, कभी झंडों को लहराती एक आकृति, कभी पानी से भरे विशाल टैंक। हर आकृति का समय लगभग दो मिनट होता है। इस खूबसूरती को यूँही छोड़कर निकल आना बहुत मुश्किल था इसलिए कैद कर लिया अपने कैमरे में। समय हो चुका था बहुत सारी सीढ़ियां उतर कर नीचे आना था नीचे आकर जब देखा तो सारी सीढियों में लाइट जल रही थी ऐसा लग रहा था कि हम सोने की सीढियों से उतर कर नीचे आ रहे हों। देर हो चुकी थी अब समय था रात के खाने का तो रात के खाने के लिए हम पहुंचे फ्लेवर्स फ्यूजन क्यूज़ीन रेस्टोरेंट जो कि हुसैन जावेद एवेन्यू पर था। यहाँ भी भारतीय भोजन उपलब्ध था। हमने अपने उदर को शांत कराया, यहाँ का चावल बहुत स्वदिष्ट था, खुशबूदार हल्का प्राकृतिक मिठास लिए हुए और मुलायम। आज का दिन हो चला था हम भी चल दिए अपने गंतव्य होटल की तरफ। अगले दिन 10.30 निकलना था तो समय पर पहुंच कर आराम करना था फिर सबेरे तैयार हो नाश्ता करना। समय तो लगना ही था। हम समय पर होटल पहुंच गए एक एक प्याली चाय पी और बिस्तर के कोने थाम लिए।

इस पोस्ट में इतना ही, बाकू की गुलाबी सुबह का विवरण अगली पोस्ट में


फ्लैग स्क्वायर 


शहीदी मस्जिद 

लाइट टावर 


फ्लेम टावर्स 


फ्लेम टावर्स के साक्षी 


फ्लेम टावर्स 


चमकती सीढियां 


चमकती सीढियां 


फ्लेवर्स  रेस्तराँ


   फ्लेवर्स  रेस्तराँ

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