रविवार, 20 जनवरी 2013

रातें


रातें

काली सी स्याह रातें
हर तरफ कांटे ही कांटे.
पथरीली सी ये धरती
रेतीली हैं चक्रवातें.

बुझता हुआ सा दीपक
उखडी हुई हैं साँसें.
व्याकुल सा है ये तन-मन
बोझिल हुई हैं ऑंखें.

आतुर सा ये जिगर है
कोई आह़त से दिल में झांके.
पल पल मरी हूँ इतना
कोई मेरा ग़म क्यों बांटे.

दो पल की ख़ुशी आस में
अटकी हैं चंद साँसें.
काली सी स्याह रातें
हर तरफ कांटे  ही कांटे.

31 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 23/01/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  2. दर्द को समेटे बेहद भावपूर्ण रचना।।।।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत बढ़िया ....व्याकुल मन भी आशावादी बना रहता है...

    उत्तर देंहटाएं
  4. गम,व्याकुलता,और दर्द को प्रदर्शित करती सार्थक रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  5. गम के रेत आँखों में हों तो कुछ दिखाई नहीं देखता .... हाथ में टिकता नहीं, पर चिपका रहता है

    उत्तर देंहटाएं
  6. बढ़िया प्रस्तुति |
    बधाई स्वीकारें |
    शुभकामनायें आदरेया ||

    उत्तर देंहटाएं
  7. जिंदगी में कभी कभी ऐसा एक दौर भी आता है।
    उम्दा रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  8. पल पल मरी हूँ इतना
    कोई मेरा ग़म क्यों बांटे.
    दो पल की ख़ुशी आस में
    अटकी हैं चंद साँसें.

    निशब्द हूँ !!

    उत्तर देंहटाएं
  9. कई बार दर्द रातों को ही उभर के आता है ... रात के साए इस व्याकुलता को बढा देते हैं ...

    उत्तर देंहटाएं
  10. दर्द का अहसास कराती बेहतरीन अभिव्यक्ति,,,,

    recent post : बस्तर-बाला,,,

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत बढ़िया रचना....बेहतरीन :)

    उत्तर देंहटाएं
  12. दर्द भरी रात जल्दी गुजरे,,, और खुशियों का सवेरा आए ,,,
    उम्दा लेखन !
    सादर !

    उत्तर देंहटाएं
  13. दो पाक ख़ुशी की आस में अटकी है चंद सांसें. बहुत प्यारी अभिव्यक्ति.

    उत्तर देंहटाएं
  14. इतने दर्द के बाद ही तो दवा का असर होता है..

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत ही सुन्दर किन्तु दर्द ही क्यों खुशियों के संग प्रेम क्यों नहीं

    उत्तर देंहटाएं
  16. सुन्दर प्रस्तुति..सच कई रातें बेहद दर्दनाक होती हैं और उनका एक-एक पल गुजार पाना बहुत मुश्किल होता है।

    उत्तर देंहटाएं
  17. बेह्तरीन अभिव्यक्ति .शुभकामनायें.

    उत्तर देंहटाएं
  18. काली स्याह रात में दर्द अक्सर उभर के आता है

    उत्तर देंहटाएं
  19. बहुत अच्छी रचना.... रचना जी!:)
    पल पल मरी हूँ इतना
    कोई मेरा ग़म क्यों बाँटे ~ बहुत ही सुंदर और सच भी!
    ~सादर!!!

    उत्तर देंहटाएं
  20. बहुत अच्छी रचना.... रचना जी!:)
    पल पल मरी हूँ इतना
    कोई मेरा ग़म क्यों बाँटे ~ बहुत ही सुंदर और सच भी!
    ~सादर!!!

    उत्तर देंहटाएं
  21. दर्द को समझे कौन ...???
    शुभकामनायें !

    उत्तर देंहटाएं
  22. काली सी स्याह रातें हर तरफ कांटे ही कांटे....


    रचना जी एक दर्द भरी लय में बखूबी बाँधा है आपने शब्दों को ....!!

    उत्तर देंहटाएं
  23. एक दर्द भरा मन दर्द को बखूबी समझता है ...बहुत बढ़िया

    उत्तर देंहटाएं
  24. कांटो से खींचना ही होगा आँचल को..

    उत्तर देंहटाएं

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...