रविवार, 19 फ़रवरी 2012

बस...एक दिन


बस...एक दिन 



सात फेरों में, सात जन्मों के, वादे किये हैं
एक दिन में इतने जन्म बिताऊँगी कैसे? 

प्यार करने को एक उम्र भी कम है,
एक दिन में एक उम्र जी पाऊँगी कैसे?


पाने संवरने में जिसको बरसों लगे हैं, 
एक दिन में वो प्यार दिखाउंगी कैसे?

प्यार में किसी के खोया पाया बहुत है, 
एक दिन में, ये सब, जता पाऊँगी कैसे? 

प्यार में इस तरह फली फूली हूँ इतना, 
एक दिन में इतना सिमट पाऊँगी कैसे? 

प्यार में किसी के रूठना मान जाना, 
एक दिन में ये सब निबाहूँगी कैसे?

हर पल जो मेरी आँखों सांसों में बसा है, 
बस..एक दिन में उसे दिखा पाऊँगी कैसे?

किसी ने कहा था, हर  रोज चाहूँगा तुझको, 
बस..एक दिन के प्यार में मान जाउंगी कैसे? 

42 टिप्‍पणियां:

  1. बेहतरीन भाव पूर्ण सार्थक रचना,

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  2. प्यार का गुबार पूरे व्यक्तित्व को ढक लेता है..

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  3. मान भी जाइए...सताना अच्छी बात नहीं हैः)
    प्रस्तुति अच्छी है...

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  4. प्यार में हर दिन वेलेंटाइन डे होता है ।
    मनाते रहें ।

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  5. पाने संवरने में जिसको बरसों लगे हैं,
    एक दिन में वो प्यार दिखाउंगी कैसे?

    Behad Sunder.... Gahari Baat

    उत्तर देंहटाएं
  6. हर पंक्ति हर शब्द भावनाओं को बेहतर तरीके से सामने लाता है .......!

    उत्तर देंहटाएं
  7. प्यार में दिन- ब -दिन गुणात्मक वृद्धि , एक दिन में कैसे समेटी जाय .

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  8. एक दिन में मान जाइए.. फिर बाकी के हर दिन आपके...प्यार जताइये...फिर रूठ जाइए...
    :-)
    सुन्दर रचना..

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  9. वाह! खूबसूरत प्रस्तुति रचना जी.

    भावपूर्ण प्रश्न करती हुई.

    सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

    मेरे ब्लॉग पर आईएगा.

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  10. हर पल जो मेरी आँखों सांसों में बसा है,
    बस..एक दिन में उसे दिखा पाऊँगी कैसे?... बहुत खूब, मुश्किल तो है

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  11. वाह..!!..रचना जी,भावपूर्ण बहुत अच्छी प्रस्तुति सुंदर खूबशूरत बेहतरीन रचना..

    MY NEW POST ...सम्बोधन...

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  12. अहा !..लाख टके की अदा पर न्योछावर तो होना ही है..

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  13. कल 20/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  14. अनुपम भाव संयोजन के साथ बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  15. एक गाना था - सौ बरस की ज़िंदगी से अच्छे हैं प्यार के दो-चार दिन ! हाँ एक दिन थोड़ा कम लगता है ...

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  16. लाज़व्वाब ,... सुदर पोस्ट है , rachna jee ॥ ॥
    बचपन,न समझने का ही दूसरा नाम है मेरे भी ब्लॉग पर आयें

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  17. उफ़ ………क्या मोहब्बत है …………बहुत ही प्यारी मनभावन रचना।

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  18. बहुत खुबसूरत..... वाह!
    सादर बधाई.

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  19. pyar astittv nishchay hi vishal hai ....bahut hi sundar rachana ....badhai dixit ji .

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  20. प्रेम दिवस पर बहुत संशय कि क्या क्या और कैसे अपनी भावनाओं को बताया जाए ...आप तो 24*7 करो जी ... बहुत सुंदर प्रस्तुति

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  21. बहुत बढ़िया प्रस्तुति
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार के चर्चा मंच पर भी लगा रहा हूँ! सूचनार्थ!
    --
    महाशिवरात्रि की मंगलकामनाएँ स्वीकार करें।

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  22. किसी ने कहा था, हर रोज चाहूँगा तुझको,
    बस..एक दिन के प्यार में मान जाउंगी कैसे?

    सही बात..प्यारी सी चुहल भरी कविता ..

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  23. एक दिन तो बहुत है रचना जी, जिस पल यह सब कहने, जतलाने को ठान लें तो सारी कायनात ठहर जाती है और समय रुक जाता है!!
    बहुत अच्छी कविता.. आपके ट्रेड मार्क सी!!

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  24. ज़िंदगी प्यार की दो-चार घडी होती है
    चाहे थोडी भी हो ये उम्र बडी होती है :)

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  25. रचना जी,भावपूर्ण बहुत अच्छी प्रस्तुति

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  26. बहुत खूब! एक दिन में वाकई मुश्किल है इतना कुछ कर पाना.
    सुन्दर अभिव्यक्ति!

    सादर

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  27. पाने संवरने में जिसको बरसों लगे हैं,
    एक दिन में वो प्यार दिखाउंगी कैसे?

    बूंद-बूंद कर सहेजा गया प्यार एक दिन सागर-सा हिलोरें लेने लगता है।
    अच्छी रचना।

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  28. बहुत अच्छा लेखन है आपका.महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें.

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  29. बहुत सार्थक और भावपूर्ण रचना..

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  30. तो आज आजमाने का इरादा है ! शुभकामनाएं. :-)

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  31. वह एक दिन पूरे जीवन पर फैल जाता है...बहुत सुंदर अहसास !

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  32. बेहतरीन रचना । इसएक दिन में जिंदगी जी जाती है ।

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  33. प्यार में किसी के रूठना मान जाना,
    एक दिन में ये सब निबाहूँगी कैसे? ...

    बहुत खूब ... इस्ता सब कुछ एक जनम में निभाना आसान तो नहीं पर पर जीवन थोडा भी नहीं ...

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  34. किसी ने कहा था, हर रोज चाहूँगा तुझको,

    अब तो उम्र बीत गई .....
    बताइए बात सच्च थी .....??

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  35. अनुपम भाव लिए बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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  36. बहुत सुन्दर रचना..... रचना जी .... :)

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