रविवार, 12 फ़रवरी 2012

परीक्षण


परीक्षण

वो मिश्री से मीठे बोल तुम्हारे 
पहली बार सुने थे जब मैंने 
कितना सकुचाई थी लजाई थी मैं 
लाज में लपेट कर,
छुपा दिए थे कहीं वो बोल तुम्हारे 
आज इतने बरसों बाद .....
याद नहीं कितने ..
बीस पच्चीस ....
तुम्हारे छुवन की 

सिहरन का अहसास भूले 
वो बोल तुम्हारे 
समय कि चादर ओढ़े 
आज भी वहीँ पड़े हैं बेसुध 
क्या इस वसंतोत्सव प्रणय पर्व पर 
अपनी उँगलियों कि पोरों से सहलाकर
जीवंत कर दोगे उन बोलों को      
या इस बार भी 
मात्र कनखियों से देखोगे मुझे और मुस्कुरा दोगे 
यदि ये सच है तो
तो इस बार मैं 
उन बोलों कि तह तक जाना  चाहूंगी 
जानना चाहूंगी 
कि इतने बरसों 
क्षण क्षण हर क्षण 
क्या इतना क्षरण हो चुका है .... 

43 टिप्‍पणियां:

  1. Hmmm pata nahee kyon chand ehsaas bhula diye jaate hain? Bada dukh hota hai!

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  2. ये क्षरण नहीं, मर्यादाओं की लुकाछिपी है।

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  3. बसंतोत्सव पर बहुत सुंदर रचना।

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  4. सुन्दर कविता. वक़्त के साथ मन भी बदलता है ...

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  5. सुहानी यादों का सफर मुबारक हो :-)))
    शुभकामनाएँ!

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  6. क्या इस वसंतोत्सव प्रणय पर्व पर
    अपनी उँगलियों कि पोरों से सहलाकर
    जीवंत कर दोगे उन बोलों को
    या इस बार भी
    मात्र कनखियों से देखोगे मुझे और मुस्कुरा दोगे
    यदि ये सच है तो
    तो इस बार मैं
    उन बोलों कि तह तक जाना चाहूंगी
    जानना चाहूंगी
    कि इतने बरसों
    क्षण क्षण हर क्षण
    क्या इतना क्षरण हो चुका है ....मन में उद्वेलित गहन एहसास

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  7. मर्मस्पर्शी सृजन बधाईयाँ जी /

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  8. कभी कभी प्रेम मुखरता भी चाहता है………सुन्दर अभिव्यक्ति।

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  9. प्रेम भले ही दबा रहे पर बना रहे...शुभकामनाएँ!

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  10. क्या इस वसंतोत्सव प्रणय पर्व पर
    अपनी उँगलियों कि पोरों से सहलाकर
    जीवंत कर दोगे उन बोलों को....

    अत्यंत सुन्दर रचना...
    सादर.

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  11. सुन्दर भावपूर्ण आत्मानुभव.

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  12. क्या बात है रचना जी!!! शब्द-शब्द अन्तर्मन तक उतर गया जैसे!!

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  13. कमाल की अभिव्यक्ति है.. प्रथम की प्रणय की उष्णता और दबे पलों के अंदर उसकी सुगबुगाहट.. यह क्षरण नहीं है बस आँख मिचौनी है!!

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  14. बहुत सुन्दर लाजबाब प्रस्तुतीकरण|

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  15. भावों की आँख मिचौली
    अहसास तो वही रहते हैं...अपने पूरे वजूद के साथ

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  16. ये क्षरण नहीं..अभिव्यक्ति का काएदा बदला है शायद..

    सुन्दर रचना..

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  17. दिल को छू गई पंक्तियाँ .

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  18. विचारणीय ...समय के साथ प्रेम बढ़ा या कमी आई ....सच में कहना भी तो ज़रूरी है....

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  19. RACHNA JI GAHAN BHAVON SHABDON PR LANA ....ASAN NAHI HOTA .....PR APNE TO BADI SAHJATA SE SB KUCHH PATHKON TK PAHUCHA DENE KI KALA ME PRVEEN HAIN .....APKI YAH RACHANA BEHAD JEEVANT HAI....BADHAI SWEEKAREN

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  20. अब तक तह तक तो पहुँच ही गयी होंगी :):)
    सुंदर भावाभिव्यक्ति

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  21. समय और परिपक्वता के साथ प्रेम के सूत्र भी बदलते रहते हैं। अक्षुण्ण कुछ रह सकता है तो बस अंतस ही। वहीं प्रेम का मूल है,वहीं सहचर का वास है।

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  22. वाह ! बसंती अहसास !
    सुन्दर प्रस्तुति ।

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  23. जरुरी है इन बोलों की तह तक जाना...

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  24. कहीं न कहीं छू गया बहुत कुछ अपना सा...

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  25. वक्त दर वक्त बदलती धारणाएँ...

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  26. rachna ji
    ye prem ke bol jivan bhar kaano me amrit ras gholta raheisse badh kar aur prem ki abhivykti kya ho sakti hai.
    behatrren premabhivykti----
    poonam

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  27. भावों की खूबसूरत अभिव्यक्ति है.

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  28. dena aur pana hamare vash me nahi tabhi to aesi sthiti hoti hai khadi ,
    bahut khoobsurat .rachna ji yaad karne ke liye shukriyaa .

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  29. वाह ....बहुत बढि़या। अत्यंत सुन्दर रचना...

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  30. वो मिश्री से मीठे बोल तुम्हारे पहली बार सुने थे जब,jane kya-kya mahsoos hua tha tab....gazab ki prastuti.............

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  31. बहुत ही खूबसूरत एवं भावपूर्ण प्रस्तुति....
    कृपया इसे भी पढ़े-
    नेता- कुत्ता और वेश्या (भाग-2)

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  32. BEHAD KHOOB SOORAT RACHAN PR AK BAR PUNH BADHAI ...HAN MERE NAYE POST PR AP KE LIYE KUCHH KHAS HAI .

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  33. प्रेम का क्षरण कभी नहीं होता ... ये कुछ और होगा प्रेम नहीं ...

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