रविवार, 18 दिसंबर 2011

बाल कवितायेँ


आज दो कवितायेँ बच्चों के लिए 
(१)
हँसना

हँसना और हँसाना सीखो 
हर पल तुम मुस्काना सीखो. 
कली कली से फूल फूल से 
खुशबू तुम महकाना सीखो.
इस प्यारी सी धरती को  
सूरज सा चमकाना सीखो. 
अपनी धरती के दुश्मन को 
दुनिया से पार लगाना सीखो. 
हँसना और हँसाना सीखो  
हर पल तुम मुस्काना सीखो. 
(२)

                                                                धरती माँ



धरती माँ के वीर सिपाही 
इतना तो बतला देंगे. 
दुश्मन की हो बुरी नज़र 
तो उसको पाठ पढ़ा देंगे
                       
                              

धरती माँ के हर कोने में 
खुशियाँ हम बिखरा देंगे. 
खुशिओं पर जो ग्रहण लगाये
उसको मज़ा चखा देंगे.
                                                              



धरती माँ की बगिया में 
हम सुंदर फूल खिला देंगे. 
इन फूलों को जो मसलेगा 
उसको सही सजा देंगे. 
                       
धरती माँ की ताकत को 
                       दुनिया के आगे कर देंगे. 
                       इसको जो ना माने तो 
                          उसको भी सबक सिखा देंगे. 
                  
धरती माँ के वीर सिपाही 
इतना तो बतला देंगे. 
दुश्मन की हो बुरी नज़र 
तो उसको पाठ पढ़ा देंगे.

36 टिप्‍पणियां:

  1. वाह! रचना जी,कमाल की प्रेरक प्रस्तुती है आपकी.पढकर मेरा बाल मन दीक्षित हुआ जी.
    आभार.

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  2. धरती माँ की बगिया में
    हम सुंदर फूल खिला देंगे.
    इन फूलों को जो मसलेगा
    उसको सही सजा देंगे.

    बच्चों को प्रेरित करता हुआ सुंदर बालगीत।
    केवल बच्चों को ही नहीं, हमें भी प्रेरणा मिली।

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  3. बहुत प्यारी रचनाएँ हैं दोनों ।
    दूसरी को पढ़कर तो बड़ों में भी देश भक्ति ज़ज़्बा जग सकता है ।

    लेकिन बच्चे तो फिर हंस लेते हैं । बस बड़े ही हँसना भूल गए हैं ।

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  4. वाह दोनों ही कविताएं सुंदर हैं.

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  5. बहुत ही अच्छी लगी आपकी दोनों कवितायें । बच्चों के लिए ही क्यूँ ये तो हम तथाकथित बड़ों के लिए भी हैं ।

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  6. बहुत ही अच्छी लगी आपकी दोनों कविताएं । सिर्फ बच्चों के लिए ही क्यूँ , ये तो हम तथाकथित बड़ों के लिए भी हैं ।

    उत्तर देंहटाएं
  7. गहरी कवितायें लिखने वाली रचना जी के शिशु गीत पढकर उनके विस्तृत आयाम का पता चलता है!!!
    बहुत प्यारी कवितायें हैं दोनों!!

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  8. दोनों ही बाल कविताएँ सार्थक सन्देश देती हुई ..बहुत अच्छी प्रस्तुति

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  9. प्रसन्न रहना और लग कर कार्य करना, बच्चों को यही सीखना है।

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  10. दोनो हीबाल कवितायें शानदार्।

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  11. प्रेरक और सुंदर कविताएँ...चित्र भी बहुत सुन्दर लगाया है,बधाई|

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  12. दोनों बाल रचनाएं लाजवाब हैं ... बहुत मधुर ...

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  13. धरती माँ के वीर सिपाही
    इतना तो बतला देंगे.
    दुश्मन की हो बुरी नज़र
    तो उसको पाठ पढ़ा देंगे.

    अत्यंत सरस प्रेरक गीत....
    सादर.

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  14. सुन्दर, मासूम, प्यारी और प्रेरणादायक कवितायेँ! बहुत बढ़िया लगा!
    मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/
    http://seawave-babli.blogspot.com/

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  15. दोनों ही कविताएँ बहुत ही प्यारी हैं

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  16. अरे वाह ....
    आज आपका ब्लॉग खोलते ही चेहरे पर मुस्कान आ गयी ! आभार आपका ...इनसे अच्छा कोई नहीं !

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  17. बच्चों की तरह ही प्यारी कवितायेँ !

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  18. प्रेरक रचना सुंदर चित्र सुंदर पोस्ट,...आभार
    काव्यान्जलि मे click करे

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  19. bachon sa hi saras ho jate to kya baat hoti .....bahut sundar kavy .

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  20. वाह ....
    बहुत ही प्यारी कवितायेँ..नन्हे मुन्नों के लिए..

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  21. अरे,आप तो बालकविता लिखने में भी माहिर हैं रचना जी.कमाल कर दिया आपने सच में.

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  22. वाह ...बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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  23. पहली बार आप के ब्लॉग पर आना हुआ,प्यारा सा ब्लॉग है आप का,और ये बच्चों पर लिखी रचनाये भी मन को खूब अच्छी लगी ....बधाई रचना जी....

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  24. बिलकुल बच्चों की भाषा में बच्चों के विषय की कविता, बहुत खूब दीदी।

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  25. वाह खिली खिली सी कविताओं से मन भी खिल उठा ...

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  26. प्रेरणादायी बाल कविताएं....

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  27. सुन्दर,सरस,प्रेरक बाल कवितायें.!
    आभार !

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  28. बाल कवितायेँ.... जोश से भरी बेहतरीन रचनाओं का आभार.

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  29. बहुत खूब! बहुत प्रेरक और सुंदर रचनाएँ...

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  30. उर्जा भी, उत्साह भी , सुंदर प्रेरक गीत
    संग चितेरे चित्रों ने,लिया हृदय को जीत.

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  31. You truly outdid yourself today. Great work

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