रविवार, 15 मई 2011

जन्म-जन्मान्तर


जन्म-जन्मान्तर 



इस दुनिया से जाने के नाम पर
डर, 
मरने का नहीं, 
बिछुड़ने का है 
अगला जन्म, 
मनुष्य योनी में,
मिलना जरूरी तो नहीं.
फिर 
हमारी जन्म जन्मान्तरों तक,
साथ निभाने वाली कसमों का क्या ?
चलो 
आज भगवान से प्रार्थना करें, 
हमें प्लास्टिक ही बना दें
पड़े रहेंगे सदियों तक जैसे के तैसे.
पर ये क्या .....
प्रकृति के प्रति असंवेदनशीलता.
ये प्रार्थना वापस,
फिर,
भगवान,
हमें कागज़ ही बना देना.
रिसायकिल हो हो कर ही सही 
कुछ जन्म तो  निकाल ही  लेंगें, 
एक ही योनी में.
सात  जन्म न सही, 
कुछ जन्मों का साथ तो मिले.  
आज के अनिश्चित जीवन में.

53 टिप्‍पणियां:

  1. यह सही प्रार्थना है ....:-)
    शुभकामनायें !

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  2. इस दुनिया से जाने के नाम पर
    डर,
    मरने का नहीं,
    बिछुड़ने का है

    bahut sundar bhav

    उत्तर देंहटाएं
  3. रचना जी , रिश्ते तो आजकल कागज़ के ही रह गए हैं । सात जन्म तो क्या सात साल की भी गारंटी नहीं होती ।
    लेकिन रचना में नवीकरण अच्छा लगा ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (16-5-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  5. भगवान,
    हमें कागज़ ही बना देना.
    रिसायकिल हो हो कर ही सही
    कुछ जन्म तो निकाल ही लेंगें,
    एक ही योनी में.
    सात जन्म न सही,
    कुछ जन्मों का साथ तो मिले.
    आज के अनिश्चित जीवन में.
    bas phir milen, yah aashirwaad dena prabhu

    उत्तर देंहटाएं
  6. अच्छी कामना ...पर क्या एक ही जन्म काफी नहीं है :):)

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत ही नायाब सोच..
    कुशलता से मन के भावों को शब्दों में ढाला है...

    उत्तर देंहटाएं
  8. प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता ! बहुत अच्छे भाव ...

    उत्तर देंहटाएं
  9. साथ हो और मधुर हो तो जन्म जन्मान्तर तक रहे।

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  10. वाह ! क्या कहने आपकी सोच के, प्रकृति के प्रति ही नहीं जड़ वस्तुओं के प्रति भी आपके हृदय की संवेदनशीलता अनुपम है ! बधाई !

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  11. अलग सोच प्रभावित करने में सक्षम है

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  12. प्लास्टिक प्रेम से अच्छा है कागजी प्रेम , कम से कम कुछ लिखा तो जा सकता है ना . अनूठा प्रयोग .

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  13. अब तो हर सप्ताह नए और अनूठा विम्ब का इंतजार रहता है आपकी कविता के माध्यम से .. सुन्दर कविता ..

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  14. एक ही योनी में. सात जन्म न सही, कुछ जन्मों का साथ तो मिले. आज के अनिश्चित जीवन में.
    kitni gahri baat kahi hai ,magar kaash tak hi sab thahar kar rah jaata hai .

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  15. चाहे सात घंटे हों या सात जन्म ..प्रेम जरुरी है ! अन्यथा वह जड़ ही समझिये ! सुंदर !

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  16. हिंन्दु मान्यताओं के अनुसार हम 84 लाख बार रिसाइकिल होकर ही यहां पहुंचे हैं :)

    उत्तर देंहटाएं
  17. हमें कागज़ ही बना देना.
    रिसायकिल हो हो कर ही सही
    कुछ जन्म तो निकाल ही लेंगें,
    एक ही योनी में.
    सात जन्म न सही,
    कुछ जन्मों का साथ तो मिले.
    आज के अनिश्चित जीवन में.
    Kitna anootha khayaal hai! Anoothee ichha hai!

    उत्तर देंहटाएं
  18. बहुत सुंदर रचना ....अलग से बिम्ब लिए....

    उत्तर देंहटाएं
  19. वाह!
    रचना जी,
    क्या लिखे जा रही हैं.
    अनूठा है.
    पर खूब है.
    बहुत ही खूब.
    कई बार पढ़ लिया है.

    उत्तर देंहटाएं
  20. उम्दा भाव...कविता पसंद आई..बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  21. सुंदर सकारात्मक रचना ,आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  22. बिल्कुल नई सोच और नए प्रतीक से सजी यह रचना बहुत अच्छी लगी।

    उत्तर देंहटाएं
  23. आज भगवान से प्रार्थना करें,
    हमें प्लास्टिक ही बना दें

    बहुत सुन्दर नए बिम्बो द्वारा सुसज्जित इस बेहतरीन रचना के लिए बधाई !

    उत्तर देंहटाएं
  24. सही फ़रमाया आपने! सुन्दर और सही सोच!बेहतरीन और भावपूर्ण रचना!

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  25. pahle to bandhai swikaren ..apke blog ki charcha ki katran aaj padhi yakinan
    aaj bhi dilli mein dil valon ki kami nahi hai ..

    प्रकृति के प्रति असंवेदनशीलता.
    ये प्रार्थना वापस,

    exceelent decision


    aapka chintan bahut hi shashakt or sarthak hai .

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  26. बहुत ही सार्थक सोच..क्या नए विम्बों का प्रयोग किया है..बहुत सुन्दर और भावमयी...

    उत्तर देंहटाएं
  27. विज्ञान और कवि मन का अनूठा प्रयोग .... लाजवाब रचना है ...

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  28. anokhee kalpana. par samvedana se pare sat janmon ke sath ke bhee kya mayane hain. ek alag see rachna.

    उत्तर देंहटाएं
  29. रचना जी!
    आपकी कविता का बिम्ब खड़े होकर सम्मान में ताली बजाने को बाध्य करता है.. रूमानी कविताओं से अलग प्रकृति की रूमानियत आपकी कविताओं में जब भी दिखाई देती है,मन उस प्रकृति के साथ हुए अन्याय के प्रति शर्म से गड जाता है!!

    उत्तर देंहटाएं
  30. kya sunhari soch hai
    हमें कागज़ ही बना देना. रिसायकिल हो हो कर ही सही कुछ जन्म तो निकाल ही लेंगें, एक ही योनी में. सात जन्म न सही, कुछ जन्मों का साथ तो मिले. आज के अनिश्चित जीवन में.
    abhubhut ho gai me
    rachana

    उत्तर देंहटाएं
  31. इस दुनिया से जाने के नाम पर
    डर,
    मरने का नहीं,
    बिछुड़ने का है

    बहुत अच्छे भाव
    विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  32. आपकी रचनाओं में गहरे दर्शन की अभिव्यक्ति मिलती है। बेमिसाल रचना । बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  33. कल हमने भी इसी विषय में एक रचना लिखी की मृत्यु से भय कयुं ? जबकि हमारा सारा आस्तित्व ही उस पर टिका है हमारे सफ़र का अंत मोक्ष जो हमारे जीवन का सत्य है और हम उसी से दूर हो जाना चाहते हैं |
    अच्छा विषय सुन्दर रचना |

    उत्तर देंहटाएं
  34. ग़ज़ब की कामना है.अल्लाह पूरी करे.

    उत्तर देंहटाएं
  35. जी बिल्कुल सही, डर मरने का नहीं बिछुड़ने का है। बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  36. बहुत ही खूब...रचना की संवेदनशीलता हृदय को छूती है ..शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  37. आदरणीया रचना जी ब्लाग पर आना बहुत अच्छा लगा |यहाँ बहुत अच्छी कविता पढ़ने को मिली बधाई और शुभकामनाएं |

    उत्तर देंहटाएं
  38. अनुपम सोच के साथ ....उत्‍कृष्‍ठ अभिव्‍यक्ति ।

    उत्तर देंहटाएं
  39. अच्छी कामना। सुन्दर प्रस्तुति.

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  40. क्या आप हमारीवाणी के सदस्य हैं? हमारीवाणी भारतीय ब्लॉग्स का संकलक है.


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  41. कागज संवेदनाओं के प्रवाह को सतत भी रखती है. आपके भाव के लिए धन्‍यवाद.

    उत्तर देंहटाएं
  42. बहुत अच्छे भाव ...
    हमें कागज़ ही बना देना.
    रिसायकिल हो हो कर ही सही
    कुछ जन्म तो निकाल ही लेंगें,
    एक ही योनी में.
    सात जन्म न सही,
    कुछ जन्मों का साथ तो मिले.
    आज के अनिश्चित जीवन में........
    बेमिसाल रचना !

    उत्तर देंहटाएं
  43. भगवान,
    हमें कागज़ ही बना देना.
    रिसायकिल हो हो कर ही सही
    कुछ जन्म तो निकाल ही लेंगें,
    एक ही योनी में.
    सात जन्म न सही,
    कुछ जन्मों का साथ तो मिले.
    आज के अनिश्चित जीवन में.
    ....saath janam kya aaj ek janam mein hi kitnee duriya bad jaati hai... bahut hi badiya rachna..aabhar

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  44. सुन्दर लेखन हेतु आपका आभार.
    मेरी हार्दिक शुभ कामनाएं आपके साथ हैं !!

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  45. rachna ji
    bahut hi sahi baat kahi hai aapne aaj ke anishchit jivan me bhi ham janm-janmantaro ka saath nibhane ka vaada karte hain jabki agle hi pal ka koi bahrosa nahi .
    aur bilkiul sach ki kamse kam kagaj banakar hi shayad kai janmpaa len
    .bahut hi badhaiya aur bahut baahut behatreen prastuti
    dhero badhai
    poonam

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  46. आदरणीय रचना दीक्षित जी
    नमस्कार !
    अद्भुत अभिव्यक्ति है| इतनी खूबसूरत रचना की लिए धन्यवाद|

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  47. कई दिनों व्यस्त होने के कारण ब्लॉग पर नहीं आ सका

    उत्तर देंहटाएं
  48. इतनी खूबसूरत रचना की लिए धन्यवाद|

    उत्तर देंहटाएं

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