रविवार, 11 अगस्त 2013

दस्तक

दस्तक 

 रोती बिलखती हर गली मोहल्ले में,
सांकल अपना पुराना घर ढूंढती है.

सजी थी कभी मांग में जिसकी,
वो चौखट वो दीवार ओ दर ढूंढती है.

डाले बांहों में बांहे, किवाड़े किवडियाँ,
आज भी अपना वो घर ढूंढती हैं.

जहाँ छत ओ मुंडेरें थी सखी सहेली, 
आंगन पनाले वाला घर ढूंढती हैं.

छोटे ओ गहरे घरों की लंबी कतारे,
अपना पुराना शहर ढूंढती हैं.

थकी हारी टूटी हुई दस्तक, 
खुले दरों वाला घर, शहर ढूंढती है.

30 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब!

    दस्तक सुनाई पड़ी, खोज पूरी हुई!

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  2. बहुत खूब .. वो सांकल वो कुण्डी अब कहां होती हैं घरों में ...
    दर भी नहीं खुले रहते आज ...
    मन की भाव लिखे हैं .... लाजवाब ...

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  3. बहुत सुन्दर.....
    थकी हारी दस्तक को दर मिलेगा ज़रूर....

    सादर
    अनु

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  4. इस सच्चाई पर कमेंट क्या करूँ
    सादर

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  5. सब कुछ पराया सा हो गया है .... बहुत गहन अभिव्यक्ति ।

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  6. समय के साथ साथ सब बदल जाता है..सांकल भी अब बेगानी हुई..

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  7. थकी हारी टूटी हुई दस्तक,
    खुले दरों वाला घर, शहर ढूंढती है.
    Kya gazab kee rachana hai....!Wah!

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  8. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  9. बहुत सुंदर रचना.... रचना जी !
    शायद हर दिल इसी तरह... अपने दिल की धड़कन ढूँढता है...

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  10. वाकई हर दस्तक खुले दर वाले घर शहर ढूंढती है

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  11. बेहतरीन रचना. वाकई बहुत कुछ बदल चुका है.

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  12. सांकल अपना पुराना घर ढूंढ़ती है ...
    सजी थी कभी मांग में जिसकी
    वो चौखट वो दीवार-ओ-दर ढूंढ़ती है ...


    वाऽहऽऽ… !आदरणीया रंजना जी !
    कविता का मूल स्वर मार्मिक है ।

    आपकी रचना से कुछ पंक्तियां याद हो आईं -
    कुछ ऐसे बंधन होते हैं जो बिन बांधे बंध जाते हैं
    जो बिन बांधे बंध जाते हैं वो जीवन भर तड़पाते हैं
    कुछ ऐसे बंधन होते हैं

    जाने ये कैसा नाता है जो बिन जोड़े जुड़ जाता है
    इक दिन मन का पागल पंछी बिन पंख लगे उड़ जाता है
    सूरज छूने की कोशिश में पंछी के पर जल जाते हैं
    कुछ ऐसे बंधन होते हैं जो बिन बांधे बंध जाते हैं

    :)

    हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !
    -राजेन्द्र स्वर्णकार


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  13. बहुत ही अच्छी रचना ....सुंदर प्रस्तुतिकरन!थोड़ी मार्मिक कटु सत्य युक्त रचना |
    नई पोस्ट-“प्रेम ...प्रेम ...प्रेम बस प्रेम रह जाता हैं|”

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  14. सुन्दर ,सरल और प्रभाबशाली रचना। बधाई। कभी यहाँ भी पधारें।
    सादर मदन
    http://saxenamadanmohan1969.blogspot.in/
    http://saxenamadanmohan.blogspot.in/

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत सुन्दर रचना @ हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच} के शुभारंभ पर आप को आमंत्रित किया जाता है। कृपया पधारें आपके विचार मेरे लिए "अमोल" होंगें | आपके नकारत्मक व सकारत्मक विचारों का स्वागत किया जायेगा |

    उत्तर देंहटाएं

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