रविवार, 1 मई 2011

डोन


डोन



मैं डोन हूँ ग्यारह मुल्कों की पुलिस
मुझे ढूंढ़ रही है.
अलग मुल्क, अलग लोग,
अलग उन्हें निपटाने के तरीके 
कैसे-कैसे पार लगाया उन्हें,
कितने क़त्ल किये  
कितनों को मौत के घाट उतारा,
कितनों को जिन्दा भून डाला,
कोई भट्टी में पका,कोई तवे में सिंका
कितनों को तो यूँ ही धो डालती हूँ मिनटों में, 
पर अब भागते- भागते थक गयी हूँ 
किचेन से, माइक्रो वेव से, ओ टी जी से 
मिक्सी से वाशिंग मशीन से फोन, डोर बेल, 
मेहमान, बच्चे, पति
नहीं जानती क्या करूँ 
बेमौत मरना भी नहीं चाहती 
हाँ, आत्मसमर्पण से डरती हूँ 
कहीं ये ग्यारह मुल्क ही
मुझे पहचानने से इंकार न कर दें        
पर अब समझने जरुर लगी हूँ.
ग्यारह मुल्कों की पुलिस मुझे ढूंढ़ नहीं रही,
न ही मेरे लिए पलक पांवड़े बिछाए बैठी है,
वो तो मुझे उँगलियों पे नचा रही है.
हाँ.... मैं अपने पूरे होशो हवास में,
ये स्वीकार करती हूँ 
कि मैं ग्यारह मुल्कों की पुलिस की 
उँगलियों पर नाचने वाली 
इक डोन हूँ.


(चित्र गूगल से साभार)

51 टिप्‍पणियां:

  1. इस डान की नियति तो यही है इसलिये यदि ये छुपकर बैठ भी जावे तो ये सभी मुल्क लगातार ढूंढते ही रहेंगे । पहचानने से इन्कार का तो सवाल हो ही नहीं सकता ।

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  2. छुप कर कहाँ जाओगे ?

    रचना अच्छी लगी

    केले पर की गयी कलाकारी का भी जवाब नहीं

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  3. एक नई परिभाषा निराले अंदाज़ में !

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  4. इस डोन के बगैर दुनिया भी तो नहीं चलती ।
    केले पर केलाकारी ! अद्भुत ।

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  5. रचना अच्छी लगी

    केले पर की गयी कलाकारी का भी जवाब नहीं

    उत्तर देंहटाएं
  6. क्या बात है!...एक अनूठी रचना है यह!..स्वागत है!..मेरे ब्लौग 'बात का बतंगड' पर आइए...यहां भी कुछ अनूठा ही है!

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  7. सुंदर रचना लेकिन इस डोन जी को दुर से ही राम राम :)

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  8. बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति।नया अंदाज बहुत ही अच्छा लगा।मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है।धन्यवाद।

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  9. बहुत सुन्दर..एक नया अंदाज़

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  10. डान तो पुलिस को उँगलियों पे नचाते हैं!

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  11. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (2-5-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  12. waah kya baat hai ,sahi kaha chhupna namumkin hai ,hansi aa gayi padhkar ,tippani bahut pyari di hai ,shukriyaan .

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  13. बिल्कुल निराले अंदाज़ की कविता है।

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  14. ओह! डॉन का ये अनोखा रूप रहा.............

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  15. डान की नियति ही यही है.. एक बार फिर नवीन विम्ब...

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  16. • इस कविता में आपकी वैचारिक त्वरा की मौलिकता नई दिशा में सोचने को विवश करती है।

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  17. kele ka bhi man badha gayi kala, aur kavita ka man badha gayin aap ji ,sunder srijan . kalpana -shilata sarhniy hai .

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  18. वाह वाह क्या बात है जो ग्यारह देशों की पुलिस भी नचाने लगी, आज के हालत ही कुछ ऐसे है हम सभी रोबोट बन गए हैं उन्मुक्तता तो बच्चों तक से छिन गयी है...

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  19. अगर मनोज कुमार जी इस कविता के विषय में यह कहते हैं कि "इस कविता में आपकी वैचारिक त्वरा की मौलिकता नई दिशा में सोचने को विवश करती है " तो सही कहते है.बहुत अच्छी रचना. आभार

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  20. केले की कलाकारी और कविता दोनो ही अलग अंदाज़ लिए हैं ...

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  21. वाह ... बहुत ही खूबसूरत से शब्‍द और चित्र तो अति-सुन्‍दर ।

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  22. रचना जी,
    विषय में प्रयोग के सहारे नारी की स्थिति का सटीक चित्रण एक नए अंदाज में बहुत अच्छा लगा.

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  23. rachna ji
    is baar ki aapki post nisandeh sabse alag aur ek naye andaaz me lagi ..bhaut hi behatreenv gahan abhivykti
    ke saath likhi aapki ye post baar -baar padhne ko man karta hai .fir se inhe dubaara padhungi .
    bahut bahut badhai
    poonam

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  24. आप फिर भी डोन ही हैं.

    ब्लॉग की पुलिस का ज़िक्र नहीं किया आपने.

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  25. क्या बात है इस दों को तो ११ मुल्को भी पुलिस पगड नहीं पायेगी .....

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  26. उस डॉन को तो जंगली बिल्लियाँ पसंद थीं, इस डॉन की पसंद क्या है? :-)

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  27. बेचारे अभिताभ और शाहरुख। एक डान और 11 मुल्क । ढूंढ रही है के बदले नचा रही है एक निराली अभिव्यक्ति। सच में लेखनी में भाव का संचार हैं आप

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  28. बहुत सुन्दर..एक नया अंदाज़

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  29. अद्भुत .....!!

    अगर आप क्षणिकाएं लिखती हों तो अपनी दस, बारह क्षणिकाएं 'सरस्वती-सुमन' पत्रिका के लिए भेजिए
    साथ में अपना संक्षिप्त परिचय और छाया चित्र भी .....
    इस पते या मेल पर ......

    harkirat 'heer'
    18 east lane , sunderpur
    house no. 5
    Guwahaati-781005
    ASSAM

    ya

    harkiratheer@yahoo.in

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  30. एकदम नए अंदाज़ की कविता....बहुत ही रोचक लगी...

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  31. एक अलग ..अनूठी सी रचना...... शाब्दिक अलंकरण हमेशा की तरह कमाल का.....

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  32. डोन का यह अंदाज भी पसंद आया
    जिन केलों को आपने दिखाया
    उनको किसने खाया
    पहली दफा आपके ब्लॉग पर आना हुआ
    क्या बताऊँ कि मैंने क्या क्या पाया.

    अब समय निकाल कर आप भी मेरे ब्लॉग पर आजाईये.
    अपने सुविचारों की मोहक बरसात कर बस छा जाईये.

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  33. आपकी टिपण्णी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया!
    बहुत ख़ूबसूरत और लाजवाब रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! बधाई!

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  34. कविता के भाव के साथ केले पर बने चित्र बहुत अच्‍छे लगे।

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  35. adbhut. DON ka yah roop bhi. isme stri ki vah peeda he jo mujhe hameshaa se sochane par mazboor karti rahi he..., kyaa 21 vi sadi me bhi koi parivartan nahi? aakhir aur kitane yug dekhne honge?

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  36. वाह भई डॉन तेरे खेल भी निराले

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  37. क्या बात है बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

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  38. केले पर की गयी कलाकारी का भी जवाब नहीं!
    बढ़िया प्रस्तुति

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  39. जैसे शमा जलती जाती है लेकिन रौशनी देती रहती है , वैसे ही पेन्सिल भी छिलती जाती है , लेकिन अपना लेखन कर्म नहीं छोडती। बहुत सुन्दर सबक इस रचना में।

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