रविवार, 10 अप्रैल 2011

तुम्हारी


तुम्हारी 



पिछली कविता में तुमसे इक सवाल पूंछा था,

"मेरी हर धड़कन में बस तुम ही हो 
और तुम्हारी धड़कन में .....???"
अजीब  सी बैचैनी हो रही है 
तुम्हारा  जवाब जो नहीं आया.
हर इक आहट तुम्हारी मिस कॉल सी लगती है.
पुरानी यादों को ताज़ा करना चाहा तो पाया 
मेरी रिंग टोन आज भी वही है 
"चलो दिलदार चलो चाँद के पार चलो......." 
पर तुम्हारी कॉलर ट्यून 
कुछ बदल सी गई है.
तुम्हारी सांसे जैसे ही मेरी सांसों में घुलने लगती हैं.
अचानक ही  सिग्नल वीक हो जाता है !
सारा का सारा सिग्नल पकड़ने की चाह में अपना टावर,
अपने दिल पर ही लगा रखा है.
तुम्हारे ख्वाब को जब जब अपना बनाना चाहा 
अचानक इक महिला का चिर परिचित सा स्वर बीच में आ गया
"उपभोक्ता अभी व्यस्त है" 
"नेटवर्क के बाहर है" 
"कॉल सम्भव नहीं है"  
असमंजस में हूँ 
कहीं तुम "नंबर पोर्टेबिलिटी"  के मोह पाश में तो नहीं हो 
या  फिर २ जी से ३ जी होने की कोई चाहत???
अगर ऊपर  लिखी बातें सिर्फ मेरा भरम है तो अच्छा है
यदि लेश मात्र भी सच है,
तो तुम्हें आगाह किये देती हूँ
कि अक्सर मोह पाश, माया जाल पर मोह दंश भारी पड़ जाता है. 
सो लौट आओ अपने "ओरिजनल सर्विस प्रोवाइडर" के पास   
क्योंकि सिर्फ वो ही तुम्हारा अपना है.
मिस... कॉल.... नहीं इस बार तुम्हारी कॉल की प्रतीक्षा में,
आज भी तुम्हारी ही मैं. 

40 टिप्‍पणियां:

  1. प्रेम को परिभाषित करती आधुनिकतावाद की छाप लिये एक सेलुलर कविता !

    उत्तर देंहटाएं
  2. अजीब सी बैचैनी हो रही है
    तुम्हारा जवाब जो नहीं आया।
    इस नेटवर्क ने न जाने कितनों के दिल तोड़े हैं ।

    बहुत खूबसूरत प्रस्तुति है जी । फोटो में आप ही हैं ना।

    उत्तर देंहटाएं
  3. mujhe apna hi ek halka-fulka sher yaad aa gaya !
    हैं वो सामने, उनकी बेरुख़ी को क्या कहिए ...
    हमसे कहते हैं कि 'कवरेज़ एरिया' से बाहर हो !

    हम चाहें 2G से 4G में पहुँच जाएँ हमारी भावनाएँ वही रहेंगी । अच्छी मोबाइलमयी कविता..

    उत्तर देंहटाएं
  4. आज ही मैं सोच रहा था कि कहाँ हैं आप, काफी समय निकल गया कुछ नया नहीं मिला फिर सोचा आपको मेल करूँ, बस सोच कर ही रह गया शायद व्यस्त कर दिया होगा मुझे समय उस वक्त. आज ही एक नयी कविता मिली, जिसमें तकनीकी थी खिली-खिली, अच्छा लगा कि एक और कविता मिली बांटने को. थोड़ी लंबी जरुर लगी पर कहा ना मैंने है खिली-खिली. कविता की अंतिम पंक्ति तो लाजवाब है. ख़ूबसूरती से शब्दों, भावनाओं की बुनाई है जिसमें खिलता प्यार है.

    उत्तर देंहटाएं
  5. 2जी हो या 3जी, मन की बतों को कितनी बैंडविथ चाहिये।

    उत्तर देंहटाएं
  6. is anokhi ada ka jawab nahi ,

    हर इक आहट तुम्हारी मिस कॉल सी लगती है.पुरानी यादों को ताज़ा करना चाहा तो पाया मेरी रिंग टोन आज भी वही है "चलो दिलदार चलो चाँद के पार चलो......." पर तुम्हारी कॉलर ट्यून कुछ बदल सी गई है
    aksar samne waale badal jaate hai magar hum wahi hi khade rah jaate hai .samjhauta to karne ki koshish karte hai par kahi se toote bhi rahte hai ,tabhi bachne ke liye aesi chetvani deni padti hai .bahut badhiya .rachna jo rache bhala achchhi kaise na hogi .

    उत्तर देंहटाएं
  7. तो तुम्हें आगाह किये देती हूँ
    कि अक्सर मोह पाश, माया जाल पर मोह दंश भारी पड़ जाता है.
    सो लौट आओ अपने "ओरिजनल सर्विस प्रोवाइडर" के पास
    क्योंकि सिर्फ वो ही तुम्हारा अपना है.
    मिस... कॉल.... नहीं इस बार तुम्हारी कॉल की प्रतीक्षा में,...
    ye sahi baat hui, ghanti baji?

    उत्तर देंहटाएं
  8. Mobile poem.. pehli baar aapki kavita me virodh mukhjar ho raha h... achha h.. apne adhikaro ko le k jaagruk rehna zaruri h.. i wish k is baar miss call nahi,call aaye :)

    उत्तर देंहटाएं
  9. यह बढ़िया मूड रहा ....हार्दिक शुभकामनायें !!

    उत्तर देंहटाएं
  10. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (11-4-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  11. wah kya baat hai....
    prabhavit kartee hai aapkee har rachana.

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत ही बढ़िया .... कुछ अलग तरह से मनोभाव सामने रखे हैं....

    उत्तर देंहटाएं
  13. आधुनिकतावाद की छाप लिये प्रेम को परिभाषित करती कविता !

    उत्तर देंहटाएं
  14. वाह क्या मोबाइली कविता है! आज की स्थितियों में एकदम सटीक.

    उत्तर देंहटाएं
  15. :) :) मोबाईल फोन का अच्छा प्रयोग ...सटीक बिम्ब चुने हैं ...कविता का यह हिस्सा बहुत शानदार है ...


    अचानक इक महिला का चिर परिचित सा स्वर बीच में आ गया
    "उपभोक्ता अभी व्यस्त है"
    "नेटवर्क के बाहर है"
    "कॉल सम्भव नहीं है"
    असमंजस में हूँ
    कहीं तुम "नंबर पोर्टेबिलिटी" के मोह पाश में तो नहीं हो
    या फिर २ जी से ३ जी होने की कोई चाहत???
    अगर ऊपर लिखी बातें सिर्फ मेरा भरम है तो अच्छा है..

    बहुत अच्छी रचना

    उत्तर देंहटाएं
  16. आदरणीय रचना दीक्षित जी
    नमस्कार !
    आपकी रचनाओं में एक अलग अंदाज है,
    कविता की अंतिम पंक्ति तो लाजवाब है

    उत्तर देंहटाएं
  17. कई दिनों व्यस्त होने के कारण  ब्लॉग पर नहीं आ सका

    उत्तर देंहटाएं
  18. मिस... कॉल.... नहीं इस बार तुम्हारी कॉल की प्रतीक्षा में,...

    बहुत खूबसूरत प्रस्तुति है

    उत्तर देंहटाएं
  19. बहुत अच्छी कविता
    नए बिब्म के साथ,
    प्रेम का कितना अच्छा मोबाइल संस्करण है
    बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  20. प्रेम को परिभाषित करती आधुनिकतावाद की छाप लिये एक सेलुलर कविता !

    बहुत खूबसूरत प्रस्तुति है

    उत्तर देंहटाएं
  21. प्रेम को परिभाषित करती आधुनिकतावाद की छाप लिये एक सेलुलर कविता अपने नएपन और खूबसूरत प्रस्तुति के साथ.

    उत्तर देंहटाएं
  22. सो लौट आओ अपने "ओरिजनल सर्विस प्रोवाइडर" के पास
    क्योंकि सिर्फ वो ही तुम्हारा अपना है.
    मिस... कॉल.... नहीं इस बार तुम्हारी कॉल की प्रतीक्षा में,
    आज भी तुम्हारी ही मैं.

    sunder hai aapki rachna -Rachna ji
    badhai.

    उत्तर देंहटाएं
  23. बहुत ही सुन्दर रचना नए बिम्बो के साथ आपने दिल की बात को बड़ी दिलकश अदा के साथ रखी है ...

    उत्तर देंहटाएं
  24. अक्सर मोह पाश, माया जाल पर मोह दंश भारी पड़ जाता है. सो लौट आओ अपने "ओरिजनल सर्विस प्रोवाइडर" के पास क्योंकि सिर्फ वो ही तुम्हारा अपना है...

    गज़ब की ख़ूबसूरत रचना..हरेक शब्द अंतस को छू गया..बहुत भावपूर्ण अभिव्यक्ति..

    उत्तर देंहटाएं
  25. bhautikta ka aavran pahne bahut sunder rachna aur sare gile shikve bhi kar dale...kamaal ki prastuti.

    उत्तर देंहटाएं
  26. "सो लौट आओ अपने "ओरिजनल सर्विस प्रोवाइडर" के पास
    क्योंकि सिर्फ वो ही तुम्हारा अपना है"

    इससे ज्यादा और स्पष्ट सन्देश नहीं हो सकता - अपने शब्द और शैली आपकी विशेषता है उसी का एक और प्रमाण.

    उत्तर देंहटाएं
  27. नए बिंब..नव प्रयोग...2जी, 3जी का जवाब नहीं..वाह!

    उत्तर देंहटाएं
  28. क्या बात है, कया बात है, क्या बात है!!!
    एक आइडिया जो बदल दे दुनिया।

    उत्तर देंहटाएं
  29. ये दिल की धडकन....... हमेशा बेचैन करती है ....बहुत सुन्दर रचना

    रचनाजी मेरे Foodeterian में ज्वाइन होने के लिए धन्यवाद......

    उत्तर देंहटाएं
  30. हर इक आहट तुम्हारी मिस कॉल सी लगती है.पुरानी यादों को ताज़ा करना चाहा तो पाया मेरी रिंग टोन आज भी वही है "चलो दिलदार चलो चाँद के पार चलो......." पर तुम्हारी कॉलर ट्यून कुछ बदल सी गई है.तुम्हारी सांसे जैसे ही मेरी सांसों में घुलने लगती हैं

    beautiful concept. nicely used mobile termology.
    Thans for vising the blog Jodo Tinka Tinka and for your valuable comment.

    उत्तर देंहटाएं
  31. वाह .... बहुत खूब कहा है आपने ... ।

    उत्तर देंहटाएं
  32. मोबाइलमयी कविता.. चित्ताकर्षक लगी ...बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  33. rachna ji
    bilkul sateek aur marm-sparshi rachna .dilko chhoo gai.
    vastav me agla to badal jaata hai par ham usase ummid ka daman juda hi samjhte hain .yahi to nari man ka bhola pan hai .jisse ham jald kinaara nahi kar paate
    .bahut hi stylis tareke se aapne sabhi ke dilki sachchai ko bayaan kiya hai
    bahut khoob shandar prastuti ke liye bahut bahut badhai
    poonam

    उत्तर देंहटाएं
  34. आप की कविता में बिम्ब कमाल के होते है . मन अह्वलादित हुआ .

    उत्तर देंहटाएं
  35. You truly outdid yourself today. Great work

    उत्तर देंहटाएं

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...