रविवार, 8 अगस्त 2010

जल प्रपात


" जल प्रपात" 




मेरे नैनों के जल प्रपात से, 
किंचित,गंधक के सोते सा 
पवित्र औषधीय जल बहता  है 
कितना व्यथित किया सबने, मुझे 
ये पावन नीर बहाने  को 
कोई निहारे खुश हो जाये 
कोई डिबिया भर घर ले जाये 
कोई पाप उतारे, कोई पांव पाखरे 
कोई भात बनाए, अपनों में बांटे  
कोई कलह उबाले, फिर छींटे मारे  
ये जग खारे जल से पोषित  
पर  मेरे दृग  दो  बूंद  न  आया  
सौ बार  मुझे यदि  जनम  मिले  तो  
मुझको  दरिया  जल में  देना  
मैं  बहूँ,  मेरे नैन  बहें
खारा पन दिन रैन रहे  
जीवन में कुछ चैन रहे  
फिर चाहें, सारा  जग  बेचैन रहे   




36 टिप्‍पणियां:

  1. मैं बहूँ, मेरे नैन बहें
    खारा पन दिन रैन रहे
    जीवन में कुछ चैन रहे
    फिर चाहें, सारा जग बेचैन रहे
    Kitna anootha khayal hai! Behad sundar rachana!

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  2. इस कविता में कवयित्री के मन की उहापोह स्थिति का आभास होता है ....
    नए बिम्बों से सजी रचना अच्छी लगी

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  3. नैनो से पवित्र औषधीय जल ! वाह रचना जी , आपने तो डॉक्टरों को भी एक नया विचार प्रदान कर दिया ।
    खारा पन दिन रैन रहे
    जीवन में कुछ चैन रहे
    फिर चाहें, सारा जग बेचैन रहे

    बहुत बढ़िया प्रस्तुति ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत बढ़िया रचना अभिव्यक्ति...बधाई...

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह...नारी की व्यथा को आंसूओं के माध्यम से
    कविता में बखूबी ढाला है आपने.

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाह जी बहुत बहुत खूबसूरत भावो को संजोया है. अरे भाई इतने भारी सावन में आप भी नैन बहाओगी तो यमुना का खतरे का निशाँन तो सारी हदें पार कर जायेगा ना.

    अभी इन्हें रोको
    फिर कभी....:) :)

    उत्तर देंहटाएं
  7. जल प्रपात के माध्यम से आपने जीवन दर्शन दे दिया है . नारी मन की व्यथा को भी छुआ है. सुंदर रचना . हम नदी को ही अपना विम्ब बनाते थे.. आपने जलप्रपात का विम्ब अच्छा लिया है .

    उत्तर देंहटाएं
  8. जल प्रपात के माध्यम से आपने जीवन दर्शन दे दिया है . नारी मन की व्यथा को भी छुआ है. सुंदर रचना . हम नदी को ही अपना विम्ब बनाते थे.. आपने जलप्रपात का विम्ब अच्छा लिया है .

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत अच्छी रचना. नारी मन के भाव को जल के माध्यम से व्यक्त किया है.. सुंदर है !

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत सुन्दर भावों से सजी हुई बेहतरीन रचना ...

    सौ बार मुझे यदि जनम मिले तो
    मुझको दरिया जल में देना
    मैं बहूँ, मेरे नैन बहें
    खारा पन दिन रैन रहे
    जीवन में कुछ चैन रहे
    फिर चाहें,सारा जग बेचैन रहे

    वाह क्या बात है !

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  11. बहुत अच्छा लिखा हैं आपने.
    सीधे दिल को छू गई हैं आपकी कविता.
    मैं विशेषकर आखिरी लाइनों से प्रभावित हूँ.
    बहुत बढ़िया, लिखते रहिये.
    धन्यवाद.
    WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

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  12. बहुत गहरी और उम्दा रचना.

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  13. बहुत बढ़िया प्रस्तुति...बधाई!
    www.gaurtalab.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  14. नयन जल के गरम सोतों की जीवंत व्याख्या..और पुष्प की अभिलाषा के बाद आपके नयन जल की अभिलाषा पढकर मन द्रवित हो गया..रचना जी इस रचना के लिए धन्यवाद!!

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  15. सौ बार जन्म दे तो दरियाजल में देना ...
    आंसुओं का खारापन वही सिमट जाए ...!
    सुन्दर अभिव्यक्ति ...!

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  16. खुद तो कविमन अशांत है फिर दुनिया क्यूं बेचैन रहे ....बात कुछ हजम नहीं हुयी :) ! j

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  17. बहुत सुन्दर कविता....
    ____________
    'पाखी की दुनिया' में आपका स्वागत है.

    उत्तर देंहटाएं
  18. "मुझको दरिया जल में देना
    मैं बहूँ, मेरे नैन बहें
    खारा पन दिन रैन रहे
    जीवन में कुछ चैन रहे
    फिर चाहें, सारा जग बेचैन रहे"
    aapki rachanaein hamesha mere liye prerana ka shrot rahi hain.shabdon mein bhaw ke sath-sath sarthak bimbon ke madhyam se unhein upasthiti dena,adbhut anubhaw hai.

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  19. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

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  20. बहुत बढ़िया प्रस्तुति.बेहतरीन रचना.

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  21. बहुत ही सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने लाजवाब रचना लिखा है! इस उम्दा रचना के लिए बधाई!

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  22. सौ बार मुझे यदि जनम मिले तो
    मुझको दरिया जल में देना

    मीठी सी अभिलाषा..सुन्दर गीत.

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  23. कोई कलह उबाले, फिर छींटे मारे
    ये जग खारे जल से पोषित
    पर मेरे दृग दो बूंद न आया
    -बहुत ही बढ़िया !
    आप की कविता में नए बिम्बों का प्रयोग हमेशा सुरुचिपूर्ण किया जाता है .
    इस में भी अच्छा लगा.अच्छी रचना है.

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  24. बहुत सुंदर भाव लिए रचना | बधाई
    आशा

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  25. आपकी टिपण्णी के लिए आपका आभार ...अच्छी कविता हैं...बहुत अच्छी .

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  26. बेहतरीन अभिव्यक्ति रचनाजी।

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  27. "मुझको दरिया जल में देना
    मैं बहूँ, मेरे नैन बहें
    खारा पन दिन रैन रहे
    जीवन में कुछ चैन रहे
    फिर चाहें, सारा जग बेचैन रहे

    Uljhan saaf dikh rahi hain....sukoon ki talash jaari hai yahan bhi aur wahan bhi

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  28. कोई कलह उबाले, फिर छींटे मारे
    ये जग खारे जल से पोषित
    पर मेरे दृग दो बूंद न आया

    - सुन्दर.

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  29. वह बहुत खूब दिल खरा नयन नीर औषधि जाल
    कितना अच्छा एक अच्छी पोस्ट.

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  30. bahut hi khoob...
    mai bahun, mere nain bahe,
    khara pan din rain rahe..
    bahut khoob.

    Meri Nayi Kavita aapke Comments ka intzar Kar Rahi hai.....

    A Silent Silence : Ye Kya Takdir Hai...

    Banned Area News : My morning drive is great independence for me: Big B

    उत्तर देंहटाएं
  31. अध्भुध कल्पना है .... कुछ नये बिंब हैं ... गंधक का पानी ... सहज ही सहस्त्र धारा की याद आ गयी ...

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