बुधवार, 4 नवंबर 2009

नागफनी





नागफनी


दिल को ग़म के गर्द औ गुबार और धुएँ से बचाने को ,हमने

दिल में एक बगिया लगा रखी है

फूल खिल के गुलाब के चार दिन को

बगिया को सूनी बना जाते हैं

दिल की बगिया में सावन लहलहाने को सदा, हमने

नागफनी ही लगा रखी है

खुशबू होती है गुलाब की चार दिन

औ इतर से भी पाई जा सकती है

याद रखने को दिल की चुभन ता उम्र, हमने

दिल में नागफनी की बाड़ लगा रखी है

जीने को गुलाब को चाहिए

एक खुशगावर माली हवा औ पानी

जीवित रखने को नागफनी को,हमने

दिल में हरारत औ आँखों में नमी छुपा रखी है

झड़ जाता है गुलाब इश्क की हवा से भी

मेरी नागफनी ने दिल में गहरे

अपनी जड़ें बिछा रखी हैं

सताने वालों मेरे भूल न पाऊं तुम्हें

सो तुम्हारी तस्वीर हर कांटे पे लगा रखी है

तुम क्या दोगे हमें जीने के सहारे

उधार की सांसों पे जीने वालों

हमने तो काँटों में भी महफ़िल सजा रखी है

डाली है हम पर भी बुरी नज़र फूलों ने यारों

ये तो कांटे हैं जिन्होंने अस्मत बचाए रखी है

दिल को ग़म के गर्द औ गुबार और धुएँ से बचाने को ,हमने

दिल में एक बगिया लगा रखी है

16 टिप्‍पणियां:

  1. याद रखने को दिल की चुभन ता उम्र, हमने
    दिल में नागफनी की बाड़ लगा रखी है

    बड़े गहरे जज्बात

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  2. डाली है हम पर भी बुरी नज़र फूलों ने यारों

    ये तो कांटे हैं जिन्होंने अस्मत बचाए रखी है

    दिल को ग़म के गर्द औ गुबार और धुएँ से बचाने को ,हमने

    दिल में एक बगिया लगा रखी है...bahut kuhbsurat rachna jo man ko jhakjor ti hai...mere blog par aapka swagat hai

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  3. वाह, बहुत बढ़िया!
    घुघूती बासूती

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  4. हमने तो काँटों में भी महफ़िल सजा रखी है
    खूबसूरत ज़ज्बात.
    वैसे आजकल के गुलाबों में भी खुशबू कहाँ.

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  5. कैसे -कैसे तो बीतती है शामें फिर आपने एक कविता से और सितम ढाया है, बहुत खूब ! कहीं मेरे भीतर के हाल को बयां करती और हौसला देती हुई.

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  6. जीवन दर्शन को सटीक ढंग से
    परिभाषित करती हुई अच्छी रचना
    और वैसे भी....
    काँटों को मुरझाने का खौफ नहीं होता

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  7. सुन्दर बहुत सही लिखा है आपने बढ़िया पसंद आई यह रचना

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  8. दिल की बगिया में सावन लहलहाने को सदा, हमने
    नागफनी ही लगा रखी है.

    लाजबाब लफ्ज़

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  9. तुम क्या दोगे हमें जीने के सहारे



    उधार की सांसों पे जीने वालों



    हमने तो काँटों में भी महफ़िल सजा रखी है



    डाली है हम पर भी बुरी नज़र फूलों ने यारोंये तो कांटे हैं जिन्होंने अस्मत बचाए रखी है

    -सचमुच बहुत सख्त होता हर तल्ख अनुभव। पर मुंहतोड़ जवाब सारे संतोष वापस ले आता है। और सच ही है ‘ गुलांे से खार बेहतर है जो दामन थाम लेते हैं।’

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  10. jiwan ke katu anubhvon ki kalatmak abhivykti !
    bahut sunder hai bdhai swikaren !

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  11. दिल को ग़म के गर्द औ गुबार और धुएँ से बचाने को ,हमने

    दिल में एक बगिया लगा रखी है


    वाह बहुत सुंदरतम रचना. शुभकाम्नाएं.

    रामराम.

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  12. तुम क्या दोगे हमें जीने के सहारे

    उधार की सांसों पे जीने वालों

    हमने तो काँटों में भी महफ़िल सजा रखी है

    Rachna ji ye panktiyaan bahut hi jaandaar lagin .....!!

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  13. bhavo mein sagar ki gahraai hai..
    bhavo ko acche shabdo mein piroya hai aapne.

    चना हूँ मैं रचनाकार हूँ मैं , सपना हूँ मैं या साकार हूँ मैं, रिश्तों में खो के रह गया संसार हूँ मैं, शून्य में लेता नव आकार हूँ मैं, अपने आप को ही खोजता इक विचार हूँ मैं, लेखनी में भाव का संचार हूँ मैं, स्वयं से ही पूंछती की कौन हूँ मैं, इसी से रहती अक्सर मौन हूँ मैं,


    vyaktitav ki khoobsurat abhivyakti ..

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  14. नागफनी मन में चुभी, रचना हुई कमाल.
    'सलिल' मौन हो देखता, मन को रुचे जमाल.

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  15. सुन्दर बहुत सही लिखा है आपने बढ़िया पसंद आई यह रचना

    उत्तर देंहटाएं

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