रविवार, 19 दिसंबर 2010

वियोग

वियोग




काया पूरी सिहर उठी,

हुई उष्ण रश्मि बरसात.

अघात वर्धिनी बातों ने,

था तोड़ा उर का द्वार.

सांसें सिमट गयीं सिसकी में,

आया ऐसा ज्वार.

हुआ रोम रोम मूर्छित,

धमनी में वेदना संचार.

पलक संपुटों में उलझे बिंदु,

गिर गिर लेने लगे शून्य आकार.

मैं खोल व्यथा की गांठ उजवती,

बिछोह का रो रो त्योहार.

वो जाने कैसा पल था,

जब बही वियोग बयार.

58 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीय रचना जी
    नमस्कार !
    बहुत से गहरे एहसास लिए है आपकी रचना ...
    बहुत मार्मिक लिखती हैं आप..गहन भावनाओं से परिपूर्ण...कई दिन तक मस्तिष्क में घुमड़ती रहती हैं आपकी पंक्तियाँ..बहुत सुन्दर..आभार

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  2. बिरह व्यथा को खूब उबारा है ..सुन्दर शब्दों से रची अच्छी कविता ...

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  3. आपकी कविताओं पर टिप्पणी के लिये मेरे शब्द मूक हो जाते हैं ।

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  4. कविता की लय देकते ही बनती है.वियोग के एहसास को खूबसूरती से उभारा है.

    सादर

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  5. in shabdon ke uchhal prawah mein main kuch kahun to kya kahun ... mahsoos karti hun , ji bhi leti hun

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  6. मधुर लय में बह रही हो कविता जैसे ... बहुत खूब ...

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  7. रचना जी
    आपके ब्लॉग पर आकर अच्छा लगा...
    हरी-भरी ज़मीं पर भावपूर्ण कविता मन को छू गई...

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  8. विरह की वेदना का मार्मिक और खूबसूरत अहसास दे रही है यह रचना । अति सुन्दर ।

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  9. मैं खोल व्यथा की गांठ उजवती,

    बिछोह का रो रो त्योहार.
    viyog bhi pariskrit ho utha

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  10. विछोह का अति मार्मिक चित्रण करती कविता बेहद पसंद आई.. और मैं तो युं भी आपकी fan हूं ... :)

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  11. विरह से भरी कविता... विरह में होते हुवे भी सुन्दर कह रही हूँ.. अच्छी रचना..

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  12. विरह की इतनी सुन्दर अनुभूति की विरह को आत्मसात करने को जी चाहता है!!

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  13. रचना जी , बिछोह का मार्मिक वर्णन.... सुंदर प्रस्तुति.

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  14. रचना जी
    बिरह व्यथा को खूब उबारा है ..सुन्दर शब्दों से रची अच्छी कविता ...

    उत्तर देंहटाएं
  15. वियोग की गुरुता पता नहीं कितनी गहराई में डुबो देती है।

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  16. shavd chayan bhav pravah sabhee prabhavit kar apne sath baha le gaye........
    Aabhar.......
    meree nayee rachana Nirbhar kisee bhee blog par update nahee ho paaee hai........
    Shayad system hee naraz hai......

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  17. रचना जी,
    वियोग के पल को आपने ऐसे शब्द चित्र में ढाला है कि लगता है हम स्वयं उसे जी रहे हैं !
    सुन्दर,अति सुन्दर !
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ

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  18. वियोग प्रेम के लिए उत्प्रेरक भी होता है . सुन्दर शब्दों में अभिनव भाव .

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  19. वियोग के पलों की सुन्दर अभिव्यक्ति

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  20. रचना जी,
    नमस्कारम्‌!
    मैं आपके ब्लॉग पर पहले भी कभी आया हूँ...आपका भाषा-अधिकार प्रशंसनीय है!

    छंदोबद्ध काव्य-लेखन में भी आपको प्रयास करना चाहिए...विनम्र सुझाव!

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  21. "वो जाने कैसा पल था,
    जब बही वियोग बयार."
    रचना जी विरह का बहुत भी भावुक और ह्रदयस्पर्शी वर्णन.सूर और तुलसी की रचनाओं में वर्णित विरह की याद ताजा हो गई.बिम्बों का ऐसा प्रयोग कि कविता जीवंत होकर सशरीर सामने आ खड़ी हुई है.

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  22. काश किसी को विरह अग्नि में जलना पडे ।
    वेदनापूर्ण रचना

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  23. वियोग का दर्द वाकई बहुत ख़राब होता है...
    समझ नहीं आता कि खुद को संभालो या अपनों को...
    दिल को छू लेने वाली कविता...

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  24. बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द रचना ।

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  25. मैं खोल व्यथा की गांठ उजवती,
    बिछोह का रो रो त्योहार.
    वो जाने कैसा पल था,
    जब बही वियोग बयार.
    xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
    विरह का दर्द बहुत सताता है .....बहुत सुंदर रचना भावनाओं को पूरी तरह से अभिव्यक्त किया है आपने ..............बहुत खूब

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  26. विरह व्यथा को बखूबी अभिव्यक्त करती बेहतरीन प्रस्तुति।

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  27. रचना जी
    विरह व्यथा का बहुत ही अच्छा वर्णन

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  28. विरह-वियोग का भी शायद अपना ही कुछ अलग सा रसास्वाद होता होगा

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  29. भाषा ने अच्‍छा साथ निभाया है भावों का.

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  30. bahut dino se computer kharab tha to net par aana nahi ho paya.aaj padh payi apki rachna.sunder shabdo se piro kar viyog ka varnan kiya hai.

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  31. जब बही वियोग बयार !!!वाह छायावादी भाषा ,भक्ति कालीन तन्मयता और आधुनिक तेवर ! मर्मस्पर्शी कविता के लिए बहुत बहुत बधाई !

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  32. rachna ji..
    bahut prabhavi rachna h aapki..
    badhai swikaren..
    kripya mere blog par bhi padhare..

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  33. खूबसूरत शब्दों में बुनी गज़ब की लय वाली कविता...

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  34. आपको एवं आपके परिवार को क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनायें !

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  35. क्रिसमस की शांति उल्लास और मेलप्रेम के
    आशीषमय उजास से
    आलोकित हो जीवन की हर दिशा
    क्रिसमस के आनंद से सुवासित हो
    जीवन का हर पथ.

    आपको सपरिवार क्रिसमस की ढेरों शुभ कामनाएं

    सादर
    डोरोथी

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  36. मर्मस्पर्शी कविता के लिए बहुत बहुत बधाई !

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  37. "बिछोह का रो रो त्योहार.
    वो जाने कैसा पल था,
    जब बही वियोग बयार."... रचना जी काफी देर से ब्लॉग पर आया.. आपकी कवितायें एक अलग धरातल पर ले जाती हैं.. अलग प्रकार की संवेदना जगाती है.. एक और सुन्दर कविता के आपको बधाई..

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  38. वियोग के घावों से मधुरिम प्रस्फुटन, सुन्दर कविता..

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  39. शब्दों का सुन्दर संयोजन ,भावों की मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति !

    ...............

    ****नव वर्ष २०११ के लिए हार्दिक मंगलकामनाएं****

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  40. सुन्दर प्रस्तुति..
    नव वर्ष(2011) की शुभकामनाएँ !

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  41. आप को नवबर्ष की हार्दिक शुभ-कामनाएं !
    आने बाला बर्ष आप के जीवन में नयी उमंग और ढेर सारी खुशियाँ लेकर आये ! आप परिवार सहित स्वस्थ्य रहें एवं सफलता के सबसे ऊंचे पायदान पर पहुंचे !

    नवबर्ष की शुभ-कामनाओं सहित

    संजय कुमार चौरसिया

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  42. बहुत भा्वपूर्ण रचना है।

    नये साल की बहुत बहुत शुभकामनाएं।

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  43. नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनायें ...कबूल करें

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  44. teen mahine baad sabke blog par aai aur bahuto ko nai tasvir me paya achchha laga ye parivartan ,rachna bahut hi laazwaab hai ,nav barsh ki dhero badhai .

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  45. आपको को नव-वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं.
    नया साल शुभ और प्रगति-दायिनी हो

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  46. आपको और आपके परिवार को मेरी और मेरे परिवार की और से एक सुन्दर, सुखमय और समृद्ध नए साल की हार्दिक शुभकामना !

    उत्तर देंहटाएं
  47. "पलक संपुटों में उलझे बिंदु,
    गिर गिर लेने लगे शून्य आकार.
    मैं खोल व्यथा की गांठ उजवती,
    बिछोह का रो रो त्योहार"

    सपरिवार नव वर्ष की मंगल कामना

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  48. नूतन वर्ष २०११ की हार्दिक शुभकामनाएं .

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  49. बेहतरीन शब्द सामर्थ्य के लिए आपको बधाई ! नव वर्ष पर शुभकामनाये स्वीकार करें !

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  50. कितनी आत्मीयता !!
    बिछोह का कितना सजीव चित्रण किया है !!

    उत्तर देंहटाएं

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