रविवार, 25 जुलाई 2010

नीरवता

नीरवता




मेरी स्मृति की निर्जनता में,
मेरी सांसें सेंध लगा जाती हैं
मेरे नीरव आभूषण भी
उच्छवासों को दे जाती हैं
मैं गीत विरह के अक्सर गाती
वो प्रणय- राग सुनाती हैं
पर मेरी नीरवता तो कैद
मेरे कजरौटे में,
सुबह सबेरे आँखों में सज जाती है
मेरे नैनों की निर्जन घाटी

हिमाच्छादित होती जाती है
हिम की पसरी रेती में
निष्ठुर  यादें  संरक्षित होती जाती है
मेरी ऑंखें मौन, विरह का
स्वप्न सजाती जाती हैं
मुझे विस्मृत करती सारी स्मृतियाँ
स्वयमेव ही आ जाती हैं
मेरे जीवन के निःस्पंदन को
निःस्वन करती जाती हैं
मेरी स्मृति की निर्जनता में,
मेरी सांसें सेंध लगा जाती हैं.

40 टिप्‍पणियां:

  1. मेरे जीवन के निःस्पंदन को
    निःस्वन करती जाती हैं
    रचना जी , इतनी मुश्किल हिंदी क्यों लिखती हैं ?
    खैर इस खूबसूरत रचना के लिए बधाई ।
    सावन के महीने में विरह गीत भी सुन्दर लगते हैं जी ।

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  2. मेरे नीरव आभूषण भी
    उच्छवासों को दे जाती हैं

    बहुत खूबसूरत एहसास हैं
    शायद ये मन के विश्वास हैं

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  3. "मेरी स्मृति की निर्जनता में,
    मेरी सांसें सेंध लगा जाती हैं"

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  4. वाह क्या बात है....कलम की धार तेज होती जा रही है. बहुत सुंदर रचना कर डाली.

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  5. मेरी स्मृति की निर्जनता में,
    मेरी सांसें सेंध लगा जाती हैं.
    ये प।म्क्तिया मन को छू गई ।

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  6. कितनी सुंदर काव्य-रचना!... बधाई!

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  7. बहुत अच्छी प्रस्तुति संवेदनशील हृदयस्पर्शी मन के भावों को बहुत गहराई से लिखा है

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  8. मुझे विस्मृत करती सारी स्मृतियाँ
    स्वयमेव ही आ जाती हैं
    मेरे जीवन के निःस्पंदन को
    निःस्वन करती जाती हैं ...

    सादगी से लिखी रचना ... संवेदनशील है बहुत ... विरह का रंग लिए ...

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  9. मेरी स्मृति की निर्जनता में,
    मेरी सांसें सेंध लगा जाती हैं.

    बेह्द सुन्दर भाव भरे हैं………………बहुत ही गहन अभिव्यक्ति।

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  10. ..मेरी नीरवता तो कैद
    मेरे कजरौटे में..
    ..गज़ब की पंक्ती है. अनूठा और प्रभावशाली.

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  11. अभी भी सांसों में इक आस बाकी है जो विरह के बीच प्रेम का संचार करती हैं ....और निष्ठुर यादें इक और कोशिश करती हैं नैनो की निर्जनता को दूर करने की .....

    बहुत ही सुन्दरता से आपने अपने मन के भावों को पिरोया है .....!!

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  12. सावन और इतनी हृदयस्पर्शी रचना ! मन भीग गया ! विरह कि तपन सावन में ज्यदाद चुभती है ! अदभुद रचना के लिए बधाई !

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  13. निर्जन स्मृति में साँसों की सेंध… क्या बात है!!! एक एक शब्द, नाप तौल के बिठाया हुआ...अद्भुत! रचना जी धन्यवाद!!

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  14. मुझे विस्मृत करती सारी स्मृतियाँ
    स्वयमेव ही आ जाती हैं
    मेरे जीवन के निःस्पंदन को
    निःस्वन करती जाती हैं
    मेरी स्मृति की निर्जनता में,
    मेरी सांसें सेंध लगा जाती हैं.
    kuchh kah na sakoon ,is khoobsurat rachna ke liye shabd kahan se doon .sirf anubhav loon aur khamosh rahoon.badhiya bahut hi .

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  15. पर मेरी नीरवता तो कैद
    मेरे कजरौटे में,
    सुबह सबेरे आँखों में सज जाती है
    मेरे नैनों की निर्जन घाटी

    jabardast!!!!!!!!!!

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  16. खूबसूरत एहसास.....
    खूबसूरत रचना के लिए बधाई ।

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  17. मेरी स्मृति की निर्जनता में,
    मेरी सांसें सेंध लगा जाती हैं.

    वाह ! बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति !

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  18. "मेरे जीवन के निःस्पंदन को
    निःस्वन करती जाती हैं
    मेरी स्मृति की निर्जनता में,
    मेरी सांसें सेंध लगा जाती हैं."
    रचना जी,भाषा की क्लिष्टता को छोड दीजिये तो आपकी कविता हम जैसे जमीन से जुडे लोगो को आपने अतीत से गहराई से जुडे रहने को प्रेरित करती है.संप्रेषण की गहराई लिये एक अत्यंत संवेदनशील रचना के लिये बधाई.

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  19. शब्दों के माध्यम से अद्भुत चित्र बनाया है.भावपूर्ण और कलात्मक.बधाई.

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  20. शब्द-शब्द छिपी
    मन की बेकली और
    नैनो की निर्जन घाटी में
    यादों का मेला ....
    बहुत ही प्रभावशाली काव्य ..... !

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  21. स्मृति की निर्जनता
    सांसें की सेंध
    नीरव आभूषण
    गीत विरह के
    प्रणय- राग
    कजरौटे में कैद नीरवता
    नैनों की निर्जन घाटी

    रचना जी! चिन्तन और अनुभूतियों की ये किन गहराइयों में जाकर खड़ी हो गई हैं आप। आपके मुख-चित्र की तरह ही जिसके पीछे आकाश छूता तूफान या उत्ताल लहरें हैं
    और यह भयावह पुल जिसका अंत अनंत में है।...मुक्तिबोध के रहस्यमय किले में , अंधेरे में कविता का अहसास ...कविता ने चित्रों को और चित्रों ने कविता को बहुआयामी बना दिया है।
    बधाई।

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  22. आपकी यह प्रस्तुति कल २८-७-२०१० बुधवार को चर्चा मंच पर है....आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा ..


    http://charchamanch.blogspot.com/

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  23. तेरी स्मृतियों के स्पंदन से...

    आँखें भी सजल हो आयीं हैं...

    एक दर्द भरा सा लगता है...

    नयनों में जल भर लायी हैं...

    hamesha ki tarah...sundar bhav..

    Deepak

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  24. स्मृति की निर्जनता में साँसों की सेंध...
    बहुत ही ख़ूबसूरत अहसास, लिए हुए रचना...

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  25. शब्द और भाव दोनों ही लाज़वाब ..एक बढ़िया रचना के लिए बधाई ..प्रस्तुति के लिए आभार

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  26. खूबसूरत एहसास ....
    बहुत गहराई से लिखा है मन के भावों को ...

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  27. वाह...अद्बितीय...एक एक शब्द जैसे कविता रूपी आभूषण में रत्नों की तरह जड़ा है.

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  28. आज बड़े दिनों बाद अपने इस प्रिय ब्लॉग पर आना हुआ. पुरे इत्मीनान से ४-५ रचनाएं पढ़ा. नीरवता ने चुपचाप बाते की. बार कोड, मैनेक्विन, समय ने अपना महत्वपूर्ण अहसास कराया. आपको पढना तो सुखद है ही मेरे लिए और जिज्ञासा भी बढती है.

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  29. aapkee rachana ne naa jane kitne bichude hindi shavdo se mera sakshatkar kara diya iseka aapko andaza bhee nahee hoga......

    saalo se south me rahte hindi bolne sunne ko bhee taras jate hai ...........

    khushkismat hai ki blog ke madhyam se aap jaisee pratibha se mulakat huee..........
    Aabhar.

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  30. likhaa to bahut badhiyaa hain.

    lekin, aapne thodi hard-hindi use kii hain.

    thanks.

    WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

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  31. rachna ji ,
    lazwaab prastuti.shabdon ka chyan bahut hi prabhavit kr gaya.
    poonam

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  32. निष्ठुर यादें मौन बन कर निह्स्पंदन और नीरवता को भेद जाती है ...
    भावविह्वाल करती अनुभूतियाँ ...!

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  33. बहुत सारे अहसास और घनीभूत होते हुए. खूबसूरत.

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