रविवार, 18 जुलाई 2010

बार-कोड

बार-कोड


मेरी पलकों के  बार-कोड ने

कल जब बहुत शोर मचाया था
 
अपने बार-कोड रीडर से तुमने,

फ़ौरन मुझे पढ़वाया था

एक्सपायरी डेट पास जान


जश्न खूब मनाया था


एक्सपायरी डेट निकल गयी

तो क्या,

मैं नयी पैकिंग में आऊँगी,


अपने माथे पे बिंदिया की जगह,

क्यू टैग,  सजाऊँगी,

 अपनी देह पर जहाँ तहां,

मेग्नेटिक

सिक्योरिटी टैग  लगाउँगी  

तुम्हे छोड़ कोई हाथ लगाये,

तो बीप- बीप चिल्लाऊँगी

मार्केट के मोस्ट सेलेबल के

आगे अपनी धाक जमाऊँगी

तुम क्या समझे बहुत पढ़े हो

चालाकी तुमको आती है

घर में रहती हूँ तो क्या !!!!!

मार्केटिंग मुझको भी आती है






बार कोड, बार कोड रीडर, सेंसर टैग्स मार्केटिंग सिक्यूरिटी में उपयोग आने वाले उपकरण हैं


51 टिप्‍पणियां:

  1. मेरी पलकों के बार-कोड ने
    कल जब बहुत शोर मचाया था
    बहुत खूब 'बार कोड और पलकें' शायद बिलकुल नया प्रतीक है.
    अच्छा लगा इस साम्य को पढकर

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  2. आपकी अभिव्यक्ति के सूत्र के चयन और उसके नए , बिल्कुल नए अंदाज वाले प्रस्तुतीकरण का कायल हूँ। बहुत ध्यान से पढ़ता हूँ ये कवितायें!

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  3. तुम क्या समझे बहुत पढ़े हो

    चालाकी तुमको आती है

    घर में रहती हूँ तो क्या !!!!!

    मार्केटिंग मुझको भी आती है

    very intelligent .
    indeed.

    उत्तर देंहटाएं
  4. इस बार (BAR नहीं, हिंदी वाला बार) बस इतना ही...So sweet!! क्या ख़्वाहिश है!!!

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  5. मार्केटिंग के फ़ंडों और उसकी शब्दावली को सही सामाजिक परिपेक्ष्य मे प्रयोग किया है आपने..काश अब ऐसा ही होने लगे.बहुत खूब..

    उत्तर देंहटाएं
  6. बिलकुल नया और सोच से परे विम्ब.. बहुत सुंदर! जिंदगी के मार्केटिंग को काफी नजदीक से देख रही हैं आप! अदभुद रचना !

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  7. Hi..

    Wah, pahle 'Manequeen', aur ab 'Bar code'.. Shayad agla number 'Show case' ka ho.. Barhaal hamen pratiksha rahegi aisi anya vilakshan kavitaon ki.. Aise vishay ki jo aaj tak achhute rahe hain..

    Meri shubhkamnayen sweekar karen..

    Deepak..

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  8. घर में रहती हूँ तो क्या !!!!!

    मार्केटिंग मुझको भी आती है
    वाह बहुत बढिया रचना जी.

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  9. घर में रहती हूँ तो क्या ...मार्केटिंग मुझको भी आती ...
    क्या बात है ...सुन्दर है ये उनकी पलकों से इनकी पलकों का बार कोड ...

    उत्तर देंहटाएं
  10. सुन्दर विषय..अच्छी लगी रचना

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  11. रचना जी , आज कल कहाँ मॉल में घूम रही हैं और एक से एक नायाब कविताएँ लिख रही हैं...:):)

    नए बिम्बों से सजी खूबसूरत रचना...

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  12. बहुत सुन्दर !
    कथ्य और शैली की नवीनता मोहक लगी.

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत सुन्दर !
    कथ्य और शैली की नवीनता मोहक लगी.

    उत्तर देंहटाएं
  14. मॉल को लेकर शायद ही किसी ने कोई ऐसी कविता कही हो ?बहुत ही अनूठा प्रयोग |
    आभार

    उत्तर देंहटाएं
  15. ओह ! जवाब नहीं रचना जी ... कमाल की रचना है ...
    इतना बढ़िया और ताजातरीन बिम्बो को एक रचना में पिरोकर आपने सचमे गजब ढाया है ...

    आपकी मार्केटिंग का तो मैं कायल हो गया ...

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  16. "तुम क्या समझे बहुत पढ़े हो
    चालाकी तुमको आती है
    घर में रहती हूँ तो क्या !!!!!
    मार्केटिंग मुझको भी आती है"
    वक्त का तकाजा है इसलिए आनी भी चाहिए.
    हर बार की तरह सबसे अलग और अनूठी सोच को साकार करती जबरदस्त प्रस्तुति

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  17. हिंदी ब्लॉग लेखकों के लिए खुशखबरी -


    "हमारीवाणी.कॉम" का घूँघट उठ चूका है और इसके साथ ही अस्थाई feed cluster संकलक को बंद कर दिया गया है. हमारीवाणी.कॉम पर कुछ तकनीकी कार्य अभी भी चल रहे हैं, इसलिए अभी इसके पूरे फीचर्स उपलब्ध नहीं है, आशा है यह भी जल्द पूरे कर लिए जाएँगे.

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    हमारीवाणी.कॉम

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  18. सिर्फ एक शब्द कहूँगा.... You are Unique and amazing....

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  19. एक बहुत ही नायाब रचना....:)
    आज के माकूल

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  20. बहुत सुन्दर और मजेदार अभिव्यक्ति !

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  21. ध्यान रखियेगा आजकल एक्सपायरी माल को ही नयी डेट दे कर सजाया जाता है और मार्केट में लाया जा रहा है.

    अच्छी रचना.

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  22. रचना जी , पता नहीं क्यों आपका ब्लॉग बड़ी मुश्किल से खुलता है ।
    कृपया कुछ फेर बदल कर के देखिये टेम्पलेट में ।

    इस सुन्दर रचना के लिए बधाई ।

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  23. Very different.. infact i shd ay a intelligent poem by an intellectual lady... :)

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  24. तुम क्या समझे बहुत पढ़े हो

    चालाकी तुमको आती है

    घर में रहती हूँ तो क्या !!!!!

    मार्केटिंग मुझको भी आती है
    zabardast ,main bahar rahi is karan late ho gayi aane me .hamesha ki tarah apne andaz me kuchh naya pryog .

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  25. आज आप को पाकर हर्षित हु see www.vipravarta.org

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  26. तुम क्या समझे बहुत पढ़े हो

    चालाकी तुमको आती है

    घर में रहती हूँ तो क्या !!!!!

    मार्केटिंग मुझको भी आती है

    नए बिम्ब अच्छे प्रयोग किये .....!!

    उत्तर देंहटाएं
  27. aap ki kavitaon mein नए bimbon ka prayog bahut achha lagta hai.
    -is mein bhi bhav-abhivyakti ke liye naye bimb ka bahut khubsurati se prayog kiya gya hai.
    bahut khuub!

    उत्तर देंहटाएं
  28. तुम क्या समझे बहुत पढ़े हो
    चालाकी तुमको आती है
    घर में रहती हूँ तो क्या !!!!!
    मार्केटिंग मुझको भी आती है

    बहुत खूब!!!!!!!!!

    उत्तर देंहटाएं
  29. क्या बात है ....
    अच्छी रचना...
    सुन्दर है ये उनकी पलकों से इनकी पलकों का बार कोड ...
    बहुत खूब....
    Kabhee time mele to anna...
    http://hindihaiku.wordpress.com

    उत्तर देंहटाएं
  30. एक्सपायरी डेट निकल गयी
    तो क्या,
    मैं नयी पैकिंग में आऊँगी,


    अपने माथे पे बिंदिया की जगह,
    क्यू टैग, सजाऊँगी,
    अपनी देह पर जहाँ तहां,
    मेग्नेटिक
    सिक्योरिटी टैग लगाउँगी

    तुम्हे छोड़ कोई हाथ लगाये,
    तो बीप- बीप चिल्लाऊँगी

    शब्दों और भावों का एकदम नए ढंग का प्रयोग लेकिन बहुत ही जबरदस्त और प्रभावशाली

    उत्तर देंहटाएं
  31. bahut hiprabhvshali lagi aapki yah br-kod ki kavita.bahut hi prashansniy.
    poonam

    उत्तर देंहटाएं
  32. बारकोड को लेकर भी कविता...मजेदार लगी.
    ***********************

    'पाखी की दुनिया' में आपका स्वागत है.

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  33. are sorry kuch jyada hee vyastta chal rahee hai iseese kafee kuch mis ho rahaa hai.........
    ye bahut hee mazedar poem rahee par saavshaan aaj kal ek ke sath ek free kaa lalch kafee diya jaa rahaa hai.
    bahut niralapan rahta hai aapkee rachanaon me.........
    ati sunder .

    उत्तर देंहटाएं
  34. ek salaah hai ye orange colour eyes ko pleasing nahee lag raha hai......ho sake to ise aur dhyan denaa.........

    anytha nahee lenaa.

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  35. आदरणीया रचना जी
    आधुनिक युग में उपज आए शब्दों का अद्भुत अभिनव प्रयोग किया है आपने बार - कोड में ।

    आपकी यह कविता नहीं पढ़ता तो मैं कभी नहीं जान पाता कि ,
    बार - कोड , बार - कोड रीडर , एक्सपायरी डेट , नयी पैकिंग , क्यू टैग , मेग्नेटिक सिक्योरिटी टैग , एक्सपायरी डेट , नयी पैकिंग , मार्केट , मोस्ट सेलेबल , मार्केटिंग जैसे शब्दों को ले'कर कोई प्रेम की कविता रच सकता है क्या !
    वाह जी , कमाल है !

    … और इतनी हसीन भाव मुखरता भी !
    अपनी देह पर जहां तहां,
    मेग्नेटिक
    सिक्योरिटी टैग लगाऊंगी …

    तुम्हें छोड़ कोई हाथ लगाये,
    तो बीप- बीप चिल्लाऊंगी

    बहुत बहुत बधाई !

    शस्वरं पर भी आपका हार्दिक स्वागत है , समय निकाल कर अवश्य आइए…

    - राजेन्द्र स्वर्णकार
    शस्वरं

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  36. क्या कविता बुनी है मैम...एकदम अनूठे बिम्बों के साथ। आपके ऐसे प्रयोग हमेशा भाते हैं मुझे। एक और कविता थी ना आपकी जिसमें आपने जैव-विग्यान और वनस्पति-शास्त्र की टर्मिनोलोजी का इस्तेमाल करते हुये कविता बुनी थी।

    हैट्स आफ मैम।

    आज कई दिनों बाद आ पाया हूं आपका लिखा पढ़ने । सकून मिला।

    उत्तर देंहटाएं
  37. jai ho ..jai ho rachna ji , bahut darawana scene hai bhai .. lekin kudos .. bahut acchi tarah se aapne presentation kiya hau hai ..badhayi

    उत्तर देंहटाएं
  38. नए मिज़ाज की अभिव्यक्ति है.....वाकई बार कोड के साथ नया कोलाज तैयार किया है आपने.....बहुत सुन्दर !

    उत्तर देंहटाएं
  39. 'बार-कोड'....एक अलग ही विषय चुना है आपने रचना जी!.... कविता पढ कर मन झुम उठा, बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  40. कई शब्दों के नए अर्थ इस कोलाज से बाहर आये हैं. बहुत बढ़िया.

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  41. बहुत उम्दा.....रचना जी !

    उत्तर देंहटाएं

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