रविवार, 20 मार्च 2011

पिटारा

पिटारा  


रंगों का अजब फुहारा हूँ मैं.
खुशिओं का पिटारा हूँ मैं.
रह जाऊं अन्दर तो गुमसुम.
बिखर जाऊं तो नज़ारा हूँ मैं.
बढ़ जाये मन का समंदर कितना ही क्यों ना. 
उसको बांधे  इक मजबूत किनारा हूँ मैं.
बांध लूँ  दूब की पाजेब जिस पल.
मखमली गलियारा हूँ मैं.
पहनूं अनगिनत कलियों का नीला घाघरा ऐसे.
कि आसमां सारा हूँ मैं.
कभी बरसती कभी तरसती कभी बिफरती.
कुदरत का इशारा हूँ मैं.
मन में बसा लो तो शबनम.
निकालो तो शरारा हूँ मैं.
ओढ़ लूँ श्वेत चूनर तो संगेमरमर.
लाल हो जाऊं तो प्यार तुम्हारा हूँ मैं.
रंगों का अजब फुहारा हूँ मैं.
न्द्रनु सारा का सारा हूँ मै.

45 टिप्‍पणियां:

  1. ऐसे ही इन्द्रधनुषीय रंग बिखेरते रहिये।

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  2. नेह और अपनेपन के
    इंद्रधनुषी रंगों से सजी होली
    उमंग और उल्लास का गुलाल
    हमारे जीवनों मे उंडेल दे.

    आप को सपरिवार होली की ढेरों शुभकामनाएं.
    सादर
    डोरोथी.

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  3. बहुमुखी रंगों में सरोबार होली पर एक अच्छी रचना ।
    होली की हार्दिक शुभकामनायें जी ।

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  4. बढ़ जाये मन का समंदर कितना ही क्यों ना.
    उसको बांधे इक मजबूत किनारा हूँ मैं.
    बांध लूँ दूब की पाजेब जिस पल.
    मखमली गलियारा हूँ मैं.

    बहुत सुन्दरता से भावों को अभिव्यक्त किया है आपने ....होली के रंगों की तरह ....आपको होली की हार्दिक शुभकामनायें

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  5. बेहतरीन!

    होली की हार्दिक शुभकामनाएं!

    सादर

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  6. वाह क्या रंगीली रचना है !
    आपको और आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनाएं !

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  7. bahut hi sundar rachna ,main likhkar bhi holi par kuchh na daal paayi magar mitro ki rachna me apni dil ki baat ko anubhav kiya ,tyohaar yahi sachche hote jahan hum na chal paaye ,to hamare saathi saath nibhaye .aaj sabki rachnao ko padhkar bahut khushi hui .manavata sada ujaagar rahe .

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  8. .होली पर्व पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं ...

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  9. मन में बसा लो तो शबनम.
    निकालो तो शरारा हूँ मैं.
    सुन्दर रंग बिखेरे हैं आपने.
    शुभकामनाये!!

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  10. होली पर क्या पिटारा खोला है आपने।
    रंग से सराबोर रचना।
    हैप्पी होली!

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  11. इन्द्रधनुषी रचना रुपी पिटारा मनमोहक लगा ..

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  12. बांध लूँ दूब की पाजेब जिस पल.
    मखमली गलियारा हूँ मैं.
    पहनूं अनगिनत कलियों का नीला घाघरा ऐसे.
    कि आसमां सारा हूँ मैं.....

    बहुत सुन्दर उपमाएं...बहुत सुन्दर काव्यरचना...
    हार्दिक बधाई...

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  13. कुदरत का इशारा हूँ मैं.
    मन में बसा लो तो शबनम.
    निकालो तो शरारा हूँ मैं... bahut hi pyaari rachna

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  14. रंगों का अजब फुहारा हूँ मैं...
    इन्द्रधनुष सारा का सारा हूँ मै.
    बहुत अच्छे भाव .. आपको रंगो के पर्व होली की हार्दिक शुभकामनाएँ !

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  15. Kya gazab rang bikhere hain is rachaname!
    Holi bahut mubarak ho!

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  16. बहुत सुंदर चित्र ओर उतनी ही सुंदर रचना, धन्यवाद

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  17. होली पर एक अच्छी रचना ।
    आप को सपरिवार होली की ढेरों शुभकामनाएं.

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  18. Rachana bahut hee sunder rachana rang birange bhav holi ka mahoul bana gaye.
    aap me anupam pratibha hai.aasheesh aur shubhkamnae.

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  19. आदरणीय रचना जी
    नमस्कार !
    सुन्दर रंग बिखेरे हैं आपने.
    शुभकामनाये!!
    रंगों का त्यौहार बहुत मुबारक हो आपको और आपके परिवार को|

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  20. बहुत सुन्दर रंगों का इन्द्रधनुष. शुभकामना.

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  21. बहुत ही सुंदर रचना है जी !हवे अ गुड डे ! मेरे ब्लॉग पर आये !
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  22. रंगबिरंगी मोहक रचना ! होली मुबारक!

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  23. बेहद भावभरी मनमोहक रचना।

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  24. यह कविता खुद में रंगमयी है ऊपर से विविध रंगों से सजे शब्द, सब कुछ रंगीन लग रहा है। यह पिटारा असरदार है।

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  25. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 22 -03 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    http://charchamanch.uchcharan.com/

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  26. सुंदर उपमाएं लिए रंगबिरंगी रचना ...बेहतरीन

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  27. बिखर जाऊं तो नजारा हूँ मैं ...
    बड़े खूबसूरत नज़ारे देखे आपकी कविता में ...!

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  28. वाह . प्रकृति और मनुष्य के सारे रंग एक साथ . सुन्दर रचना .

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  29. बेहद खूबसूरत रचना.


    ओढ़ लूँ श्वेत चूनर तो संगेमरमर.
    लाल हो जाऊं तो प्यार तुम्हारा हूँ मैं.


    पहनूं अनगिनत कलियों का नीला घाघरा ऐसे.
    कि आसमां सारा हूँ मैं.

    बहुत खूब.
    शुभ कामनाएं.

    उत्तर देंहटाएं
  30. दूब की पाजेब
    कलियों का नीला घाघरा

    मन में बसा लो तो शबनम.
    निकालो तो शरारा हूँ मैं.

    ओढ़ लूँ श्वेत चूनर तो संगेमरमर.

    वाह रचना दीक्षित जी वाह| मान प्रफुल्लित हो गया इस कविता को पढ़ कर|

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  31. बढ़ जाये मन का समंदर कितना ही क्यों ना.
    उसको बांधे इक मजबूत किनारा हूँ मैं.
    बांध लूँ दूब की पाजेब जिस पल.
    मखमली गलियारा हूँ मैं.
    बहुत ही खूबसूरत भावों के साथ बेहतरीन शब्‍द रचना ।

    उत्तर देंहटाएं
  32. ओढ़ लूँ श्वेत चूनर तो संगेमरमर.
    लाल हो जाऊं तो प्यार तुम्हारा हूँ मैं.!!!
    वाह ! रंगों की शानो शौकत तो आज पता चली है !लाल रंग लोंगो को लाल कब और कैसे करता है,शब्दों में साकार हो गया ! होली की शुभ कामनाएं !

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  33. इंद्र धनुषी रंगों की छटा बिखेरती मनमोहक रचना ..

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  34. vaah gubbare par itna bada vivran mano apne man rupi gubbare ki tulna kar di ho. sunder vivechan.

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  35. हर रंग को बहुत खूबसूरती से व्याख्यायित करती बहुत ही सुन्दर रचना ! बधाई एवं शुभकामनायें !

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  36. बांध लूँ दूब की पाजेब जिस पल,
    मखमली गलियारा हूँ मैं।
    पहनूं अनगिनत कलियों का नीला घाघरा ऐसे,
    कि आसमां सारा हूँ मैं।

    विविध रंगी शब्दों से आपने प्रकृति को रंग दिया है,
    या यूं कहें कि प्रकृति से रंग लेकर आपने शब्दों को रंग दिया है।
    वाह, अद्भुत शब्द, अनोखी भावनाएं।
    बधाई स्वीकार करें।

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  37. आपकी कविता में इन्द्रधनुषी छटा है.वाह

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  38. रह जाऊं अन्दर तो गुमसुम
    बिखर जाऊं तो नज़ारा हूँ मैं .....

    एक प्रभावशाली रचना !!

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  39. rachna ji
    holi ke rang me puri tarah se bheegi aapki indra-dhanishhi kavita bahut bahut hi achhi lagi
    padh kar aisa laga ki sach me pura man hi rang may ho gaya.
    us par shbdp ka behtreen chunav usko aur nikhaar gaya
    shandar prastuti
    dhanyvaad
    poonam

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  40. शब्दों का ऐसा इन्द्रधनुष पहले ऐसा कभी नहीं देखा.. देर से ही लेकिन होली की हार्दिक शुभकामनाये !

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