रविवार, 23 जनवरी 2011

शून्य

शून्य



जब भी उलझती हूँ,
अंतर्मन की गांठों से.
याद आते हैं आर्य भट्ट,
शून्य के जनेता, प्रणेता
उनका गणित.
और शून्य से उलझा जीवन.
जीवन का आरम्भ शून्य अंत शून्य.
अकेला शून्य.
अपनों की भीड़ में भी शून्य.
कभी घटता, कभी बढ़ता,
विभाजित होता, हासिल होता.
पर अंततः होता है शून्य.
शून्य की धुरी है जीवन !
या जीवन की धुरी शून्य...
....दोनों एक दूसरे के पर्याय.
जानते हैं दोनों
सबको स्थान देना.
अपने पहले या बाद
अपने मूल्य के घटने बढ़ने से वेपरवाह.
सबके साथ समभाव से चले चलना.
शून्य पे सवार हो शून्य से,
निरपेक्ष शून्य में विलीन होना...

69 टिप्‍पणियां:

  1. जीवन का शून्य या सब ध्वस्त कर देता है या दस गुना कर देता है।

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  2. शून्य को बड़े ही प्यारे ढंग से चितेरा है आपने.

    जीवन का आरम्भ शून्य अंत शून्य.
    अकेला शून्य.
    अपनों की भीड़ में भी शून्य.
    कभी घटता, कभी बढ़ता,
    विभाजित होता, हासिल होता.
    पर अंततः होता है शून्य.

    बहुत ही बढ़िया कविता है.सलाम

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपने बिलकुल सही कहा है शून्य ही आदि है और अंत भी शून्य ही है.हम शून्य से ही जन्म लेते हैं....ऊपर उठते हैं कभी नीचे गिरते हैं...और अंत समय पर शून्य में ही चले भी जाते हैं.

    सादर
    ----------------
    क्या आज क़े नौजवान नेताजी का पुनर्मूल्यांकन करवा सकेंगे?

    उत्तर देंहटाएं
  4. शून्य आगे लगा हो तो कोई बदलाव नहीं और पीछे लगा दो तो गुणत्त्व हो जाता है ...बहुत गहन अभिव्यक्ति

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुंदर अभिव्यक्ति. वास्तव में शून्य से ही होती है सृजन की शुरुआत .

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  6. आरम्भ और जरूर शून्य है, पर शून्यों के बीच में भी तो कुछ है ! शून्य से शून्य तक चलना भी तो है ! बहुत सुन्दरता से आप ने पेश किया है जीवन का अन्तिम सत्य !

    उत्तर देंहटाएं
  7. जीवन का आरम्भ शून्य अंत शून्य.

    jevan ka sach,

    bahut badiya rachna

    aabhar rachnaji

    उत्तर देंहटाएं
  8. मानवीय व्यापकता को शब्दों में समेटकर जीवन की धूरी का गहन विश्लेषण कर कविता ने अंतर्दृष्टि को
    स्व-विश्लेषण के लिए बखूबी चेताया है.गंभीर चिंतन को प्रेरित करती सुन्दर कविता.

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  9. my laptop is ill....so unable to give comment in hindi font...
    zero...plays a vital role....poem has a deep meaning..if thought//

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  10. आध्यात्मिकता के रंग में रंगी सुन्दर रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत गहन चिंतन दर्शाती उत्कृष्ट प्रस्तुति..

    उत्तर देंहटाएं
  12. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (24/1/2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
    http://charchamanch.uchcharan.com

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  13. अपने पहले या बाद
    अपने मूल्य के
    घटने बढ़ने से वेपरवाह.
    सबके साथ समभाव से चले चलना.
    शून्य पे सवार हो शून्य से,
    निरपेक्ष शून्य में विलीन होना...
    शून्य के आधार पर रची सुन्दर रचना.

    उत्तर देंहटाएं
  14. आपका पोस्ट अच्छा लगा।अभिव्यक्ति का स्वरूप मन को भा गया क्योंकि भाव वहीं उपजते हैं जहां व्यक्तित्व अमल और धवल होता है। शून्य की सार्थकता को रेखांकित करता आपका यह पोस्ट प्रशंसनाय है।

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  15. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  16. आप की इस कविता में विचार, अभिव्यक्ति शैली-शिल्प और संप्रेषण के अनेक नूतन क्षितिज उद्घाटित हो रहे हैं।

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  17. जीवन का जोड़-घटाव हासिल- निराकार.

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  18. कहत सबै बैंदी दिये, आंकु दस गुनो होत।
    तिय लिलार बैंदी दिये, अगनित बढत उदोत ॥

    ओम पूर्णात पूर्णमादाय,पूर्णमेवावशिष्यते।

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  19. रचना जी , आपने बहुत ही अच्छा मनन किया है शुन्य पर......... बहुत ही सुंदर प्रस्तुति.

    उत्तर देंहटाएं
  20. अपने मूल्य के घटने बढ़ने से वेपरवाह.
    सबके साथ समभाव से चले चलना.
    शून्य पे सवार हो शून्य से,
    निरपेक्ष शून्य में विलीन होना...

    कमाल की अभिव्यक्ति....

    उत्तर देंहटाएं
  21. विज्ञानं और साहित्य का जबरदस्त सामजस्य होता है आपकी रचनाओं में ... इस शून्य को भी बाँध लिया आपने ... अच्छी रचना है ..

    उत्तर देंहटाएं
  22. सुन्दर अभिव्यक्ति रचनाजी!!!!!!!

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  23. शून्‍य का वर्णन इतना बेहतरीन ...लाजवाब ।

    उत्तर देंहटाएं
  24. अपने पहले या बाद
    अपने मूल्य के
    घटने बढ़ने से वेपरवाह.
    सबके साथ समभाव से चले चलना.
    शून्य पे सवार हो शून्य से,
    निरपेक्ष शून्य में विलीन होना...


    शून्य की बहुत ही व्यापक विवेचना . शुभकामना

    उत्तर देंहटाएं
  25. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 25-01-2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    http://charchamanch.uchcharan.com/

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  26. शून्य की सार्थकता को रेखांकित करता आपका यह पोस्ट प्रशंसनाय है।

    उत्तर देंहटाएं
  27. सार्थक और बेहद खूबसूरत,प्रभावी,उम्दा रचना है..शुभकामनाएं।

    उत्तर देंहटाएं
  28. आर्य भट्ट के द्वारा जिस शून्य की परिणति हुई वो जितना महत्वपूर्ण है ,जीवन में आया शून्य उतना ही भयावह जिस की कल्पना मात्र से ही अस्थियों तक सिहरन दौड़ जाती है
    सुंदर प्रस्तुति !

    उत्तर देंहटाएं
  29. गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई !
    http://hamarbilaspur.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  30. "शून्य" क्या महत्व है, संक्षिप्त आपने अपनी सुंदर अभिव्यक्ति के माध्यम से बतला दिया। "जीवन का आरम्भ शून्य अंत शून्य.
    अकेला शून्य.
    अपनों की भीड़ में भी शून्य.
    कभी घटता, कभी बढ़ता,
    विभाजित होता, हासिल होता".………बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  31. हम शून्य से ऊपर उठते हैं कभी नीचे गिरते हैं.
    सुन्दर कविता.....

    उत्तर देंहटाएं
  32. रचना जी, शून्‍य को बडे अच्‍छे से परिभाषित किया आपने। बधाई।

    -------
    क्‍या आपको मालूम है कि हिन्‍दी के सर्वाधिक चर्चित ब्‍लॉग कौन से हैं?

    उत्तर देंहटाएं
  33. शून्य की धुरी है जीवन !
    या जीवन की धुरी शून्य...
    ....दोनों एक दूसरे के पर्याय.
    जानते हैं दोनों
    सबको स्थान देना.
    अपने पहले या बाद
    अपने मूल्य के घटने बढ़ने से वेपरवाह

    शून्य का जिस तरह आपने प्रयोग रचना में किया है बहुत अच्छा लगा...यही तो आदि है और यही अंत है...

    उत्तर देंहटाएं
  34. शून्य की धुरी है जीवन !
    या जीवन की धुरी शून्य...
    दोनों एक दूसरे के पर्याय...

    गणित के शून्य को केन्द्र में रखकर रची गई एक भावपूर्ण रवना।
    कविता अच्छी लगी।

    उत्तर देंहटाएं
  35. शून्य पर सुन्दर, अच्छी कविता के लिये बधाई स्वीकारें।

    उत्तर देंहटाएं
  36. शून्य की सुंदर व्याख्या.. इसके लिये आपको एक नम्बर देकर जितने भी शून्य लगाये जाएँ कम हैं!!

    उत्तर देंहटाएं
  37. ye shoonya bhi bahut kamaal ke hai ,ghatte badhte rahte hai ,ek geet yaad kar rahi ise padhkar ----kai baar yoon bhi hota hai ......behad sundar ,is shoonya me gahre bhav bhare hai .gantantra divas ki badhai aapko ,jai hind

    उत्तर देंहटाएं
  38. आप सब को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं.
    सादर
    ------
    गणतंत्र को नमन करें

    उत्तर देंहटाएं
  39. गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई !
    http://hamarbilaspur.blogspot.com/2011/01/blog-post_5712.html

    उत्तर देंहटाएं
  40. गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई !
    http://hamarbilaspur.blogspot.com/2011/01/blog-post_5712.html

    उत्तर देंहटाएं
  41. यह शून्य भी सब कुछ है .....शुक्रिया आपका

    उत्तर देंहटाएं
  42. गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाइयाँ !!

    Happy Republic Day.........Jai HIND

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  43. शून्य सबसे अहम .
    बहुत सुन्दर कविता.

    उत्तर देंहटाएं
  44. सुन्दर रचना !

    गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत बधाई !

    उत्तर देंहटाएं
  45. बहुत ही बढ़िया कविता है|

    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं|

    उत्तर देंहटाएं
  46. वाह, यह तो बहुत सुन्दर कविता है...'पाखी की दुनिया' में भी आपका स्वागत है .

    उत्तर देंहटाएं
  47. शून्य की इतनी अच्छी विवेचना .....?

    रचना जी , हम तो शून्य हो गए .....

    उत्तर देंहटाएं
  48. आपने बिलकुल सही कहा है शून्य ही आदि है और अंत भी शून्य ही है

    उत्तर देंहटाएं
  49. जीवन का आरम्भ शून्य अंत शून्य.
    अकेला शून्य.
    अपनों की भीड़ में भी शून्य.
    कभी घटता, कभी बढ़ता,
    विभाजित होता, हासिल होता.
    पर अंततः होता है शून्य.

    शून्य की बड़ी अच्छी विवेचना की
    बहुत ही बढ़िया अभिव्यक्ति .

    उत्तर देंहटाएं
  50. शून्य पे सवार हो शून्य से,
    निरपेक्ष शून्य में विलीन होना...
    और शून्य से ही सृष्टी की उत्पति हुयी शून्य मे ही वेलीन हो जाना। शून्य से परे क्या है?। सुन्दर रचना। बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  51. रचना जी,

    अपने मूल्य के घटने बढ़ने से वेपरवाह.
    सबके साथ समभाव से चले चलना.
    शून्य पे सवार हो शून्य से,
    निरपेक्ष शून्य में विलीन होना..
    शून्य की इतनी विलक्षण परिभाषा !
    शून्य पर इतने गहन भाव !
    नमन आपको !

    उत्तर देंहटाएं
  52. शून्य का विम्ब लेकर सुन्दर रचना रची गई है... शून्य नहीं कुछ होते हुए भी बहुत मायने रखता है जीवन में.. रचना जी देर से आने के लिए क्षमा !

    उत्तर देंहटाएं
  53. बहुत ही उलझी हुई लेकिन, सार्थक कविताई की है !
    बहुत बढ़िया !

    उत्तर देंहटाएं
  54. 'जीवन का आरम्भ शून्य अंत शून्य.
    अकेला शून्य.
    अपनों की भीड़ में भी शून्य.
    कभी घटता, कभी बढ़ता,
    विभाजित होता, हासिल होता.
    पर अंततः होता है शून्य.'

    - वाह !

    उत्तर देंहटाएं
  55. गुणा-भाग लाख करो पर हाथ लगेगा शून्य।

    उत्तर देंहटाएं
  56. गुणा-भाग लाख करो पर हाथ लगेगा शून्य।

    उत्तर देंहटाएं
  57. सभी मित्रों का मेरी पोस्ट पढ़ने और अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया देने के लिए आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  58. आपकी सोच और कलम की प्रशंसा में जितना कहा जाये उतना कम होगा - "जहाँ न पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि" को आपकी लेखनी सार्थक सिद्द करती है

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