रविवार, 20 जून 2010

आशीष

आशीष




मैं एक माँ हूँ ...

पर मैं तुम्हे हर माँ की तरह

ये आशीष नहीं दूंगी,

कि सूरज बनो, सूरज की तरह चमको,

छा जाओ पूरे ब्रह्माण्ड पर,

वश में कर लो पूरी धरती,

बंध जाओ एक समय सीमा में

अपितु, मैं तुम्हें आशीष दूंगी

तुम चाँद बनो, कुछ कम चमको,

यथार्थ में होते हुए भी

कभी अपनी उपस्थिति

न दर्ज करा पाने का दर्द समझो

अमावस के चाँद से

अपने पास बिखरे नन्हे सितारों से

घुलो, मिलो, उन्हें भी चमकने का अवसर दो.

दूज के चाँद की तरह,

कभी वेदना, संवेदना, प्रणय और बिछोह को

व्यक्त करने का माध्यम बनो,

कहीं किसी प्रेमी युगल को संरक्षण दो,

अपने उजाले में,

एक पूनम के चाँद की तरह

और हाँ !

कभी सूरज की पूर्ण उपस्थिति में

दिन के उजाले में,

आकाश के किसी कोने में,

सूरज से सिर्फ चंद क़दमों के फ़ासले पे,

अपने होने को प्रमाणित करो

ताकि लोग पूंछे

ये किसका चाँद है ??

जो आकाश में सूरज के सामने भी टिका है.





25 टिप्‍पणियां:

  1. नए बिम्बों का बड़ी ही खूबसूरती से भावाभिव्यक्ति में प्रयोग किया है रचना जी....बहुत अच्छी कविता.”

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति संवेदनशील हृदयस्पर्शी मन के भावों को बहुत गहराई से लिखा है

    उत्तर देंहटाएं
  3. Bahut sundar aasheesh!
    Sooraj bhi to sam darshitv ka prateek hai!

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर और चमत्कारिक रचना. बधाई -

    ताकि लोग पूंछे

    ये किसका चाँद है ??

    जो आकाश में सूरज के सामने भी टिका है.

    उत्तर देंहटाएं
  5. Gazab ki kalpana shakti hai aapme .. bahut khoob likha hai .. aasha ki kiran mazar aati hai rachna mein ...

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति....चाँद शीतलता भी लिए होता है....

    उत्तर देंहटाएं
  7. हर बार की तरह शानदार प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  8. rachna ji aaj apki rachna ne mujhe mazboor kar diya ki bas ab kuchh bhi baki nahi rah gaya kahne ko..lekin itni acchhi rachana par me hairan hu ki koi RACHNA itni acchhi bhi ho sakti hai?

    उत्तर देंहटाएं
  9. सोचने को मजबूर करती है आपकी यह रचना ! सादर !

    उत्तर देंहटाएं
  10. आकाश के किसी कोने में,

    सूरज से सिर्फ चंद क़दमों के फ़ासले पे,

    अपने होने को प्रमाणित करो

    ताकि लोग पूंछे

    ये किसका चाँद है ??

    जो आकाश में सूरज के सामने भी टिका है.bahut sundar rachna nai soch liye .

    उत्तर देंहटाएं
  11. सर्वथा नया बिम्ब.. अभी तक माएं सुरराज बना चाहती थी अपने बच्चों को.. आपने इसे नया आयाम दे दिया.. नई सोच दे दी.. बहुत सुंदर रचना...

    उत्तर देंहटाएं
  12. wah........
    dil kee khwahish aasheesh ka roop le hum sabhee ko prabhavit kar gayee.....
    bahut sunder rachana......

    उत्तर देंहटाएं
  13. आने पास बिखरे नन्हे सितारों से

    घुलो, मिलो, उन्हें भी चमकने का अवसर दो.

    दूज के चाँद की तरह,!!!
    ताजगी का दूसरा नाम है आपकी कविता !शायद जीने के लिए जिन चीजों की जरूरत पडती है वह सब इन कविताओं में दिख जाता है !
    कविता ! हमारे देश की माताओं में दरिद्रता आने लगी है ! ऐसे में आपकी कविता संजीवनी है ! शुभ कामनाओं के साथ !

    उत्तर देंहटाएं
  14. मंगलवार 22- 06- 2010 को आपकी रचना ... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है


    http://charchamanch.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  15. अपने होने को प्रमाणित करो

    ताकि लोग पूंछे

    ये किसका चाँद है ??

    जो आकाश में सूरज के सामने भी टिका है.

    वाह ......रचना जी बहुत ही प्रभावशाली ......!!

    रचना अपने आप में श्रेष्ठ , उदेश्यपूर्ण. सार्थक और सशक्त है .....!1

    उत्तर देंहटाएं
  16. ताकि लोग पूंछे

    ये किसका चाँद है ??

    जो आकाश में सूरज के सामने भी टिका है.

    शानदार प्रस्तुति..

    उत्तर देंहटाएं
  17. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति के साथ ही एक सशक्त सन्देश भी है इस रचना में।

    उत्तर देंहटाएं
  18. Last line touching hai
    ताकि लोग पूंछे

    ये किसका चाँद है ??

    जो आकाश में सूरज के सामने भी टिका है.

    yakeenan! aapka hi hai :-)

    उत्तर देंहटाएं
  19. एक आदर्श आशीष एक माँ कि तरफ से उसकी संतान को... बहुत सुंदर!!! साथ ही मेरा नमन आपकी उस रचना के लिए जो आप सोनी गर्ग की पोस्ट पर छोड़ आईं थीं... एक घृणित कृत्य पर इससे बेहतर (बदतर) भर्त्सना कोई हो ही नहीं सकती... पुनः नमन है आपकी अभिव्यक्ति को...

    उत्तर देंहटाएं
  20. "एक बहादुर माँ के अल्फ़ाज़ हैं ये जो कि हकीकत में अपने बच्चे का और इस समाज भला चाहती है...."

    उत्तर देंहटाएं
  21. वाह रे कवि की कल्पना..! बहुत खूब.

    उत्तर देंहटाएं
  22. ताकि लोग पूंछे
    ये किसका चाँद है ??
    जो आकाश में सूरज के सामने भी टिका है.
    कमाल की सोच है....और कमाल की पंक्तियाँ....बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं
  23. Vishay vastu aur shilp dono hi kshetron me utkrist kavita.

    उत्तर देंहटाएं
  24. ab kaise kahun...aur kya?

    aise ashish par nat hun...:)

    uttam rachna

    उत्तर देंहटाएं
  25. ताकि लोग पूछे
    ये किसका चाँद है ??
    जो आकाश में सूरज के सामने भी टिका है.
    ....बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...