रविवार, 10 मार्च 2013

साँसे


साँसे 

जब दूर जा रहे थे
तुम मुझसे
मुझे डर था
तुम्हारे वियोग में
कहीं टूट कर बिखर कर
खो न जाएँ मेरी सांसें
तुमने अपने शीत गृह में
सहेज कर रख ली थीं
मेरी सांसें
हर चीज़ को सजाना
संवारना
सहेजना
तुम्हारी आदत जो है
जब ही मायूस हुई हूँ
कुछ खोया है मेरा
तुमने पल भर में ही
मेरा वो मुझे
लौटा दिया है
पर आज नहीं
आज जब मांगी थी
अपनी सांसें वापस
तुमसे
कनखियों से देख
बस मुस्कराए थे
अगले ही पल
उभरी थीं बेबसी
कुछ लकीरें
तुम्हारे चेहरे पे
तुमने कहा था
अब कहाँ वो शीत गृह
अब कहाँ वो सांसें
खोई हुई हैं
मेरी सांसे
तुम्हारी सांसों में
जाने तब से।

40 टिप्‍पणियां:

  1. साँस और आस अन्तर्पाशित ही रहें...जीवन आनन्दमय बना रहता है..

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  2. सांसों का सांसों में समाना ही प्यार है .

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

    महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ !
    सादर

    आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
    अर्ज सुनिये

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  4. बहुत सुंदर रचना, जीवन से जुड़े भाव

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  5. साँसों से साँसों का मिलन ही प्यार है,सुन्दर प्रस्तुति.आपको महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  6. सुंदर कविता रचना जी महा शिवरात्री मगल्मय हो ... शिव की कृपा बनी रहे

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  7. अब कहाँ वो सांसें
    खोई हुई हैं मेरी सांसे
    तुम्हारी सांसों में जाने कब से .....

    बहुत खूब .....!!

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  8. बहुत सुन्दर रचना
    आपको भी महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ ..

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  9. सांसों का सांसो मे समाना और कुछ ना बचना ………एक बेहद खूबसूरत भावों की अभिव्यक्ति।

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  10. बढ़िया -
    आभार आदरेया -
    हर हर बम बम -

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  11. रागात्मक सम्बन्धों की सशक्त अभिव्यक्ति .

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  12. कोमल भाव लिए.कोमल अहसास लिए बहुत ही सुन्दर रचना... :-)

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  13. अब कहाँ वो सांसें
    खोई हुई हैं
    मेरी सांसे
    तुम्हारी सांसों में
    जाने तब से।
    इश्क .... ढाई अक्षर ....
    बताओ तो समुंदर .....
    समझो तो आकाश ....
    उम्दा अभिव्यक्ति !!
    शुभकामनायें !!

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  14. एहसासों से लबरेज सुन्दर अभिव्यक्ति.

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  15. गहन दर्द की अभिव्यक्ति, समझ नहीं पाते लोग :(

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  16. भावमय करते शब्‍द ...मन को छूती पोस्‍ट ...

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  17. वाह ! सांसों का भी शीत गृह होता है क्या..सुंदर भाव भीनी रचना !

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  18. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति,,,,
    आपको महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ ..


    Recent post: रंग गुलाल है यारो,

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  19. खुद को खो कर उस में ही खुद को पाने का अहसास ...बहुत खूब

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  20. बहुत उम्दा प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

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  21. सांसों की सशक्त और खूबसूरत अभिव्यक्ति।

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  22. सुन्दर प्रस्तुति .बहुत खूब,

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  23. वाह सांसों उसासों का यह सिलसिला चलता रहे ।

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  24. संजो के रखने वाला जब खुद ही जाने की राह पे हो ... तो कैसे संजोई चीज़ों को लौटा सकता है ...
    सांसों की डोर तो संभालनी होती है ...

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  25. बहुत ही उम्दा और दिल को छू जाने वाली रचना है

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  26. खोई हुई साँसों में भी साँसों का खो जाना अद्भुत बन पड़ा है.

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  27. जब साँस किसी की अमानत बन जाए तो ऐसा ही होता है ...
    सादर !

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  28. kitnee najakat se kahee gayee baat..accha laga..sadar badhayee ke sath

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  29. दूरी कहाँ... साँसें तो साँसों से मिल गई. सुन्दर रचना, बधाई.

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