रविवार, 24 फ़रवरी 2013

पर तुम न आये


पर तुम न आये


होंठों ने कितने ही गीत गाये
आँखों ने सपने सजाये
कितने ही मौसम गुज़रे
कितने ही सावन आये
पर तुम न आये.

कभी सोचा तेरे होंठों की छू पायें
पर आस पास थे भौरों के साये
ये बात और है कि हमने
कुछ ज्यादा ही सपने सजाये
पर तुम न आये.

बिछुड़ गए अपने ही सब साए
आज मेरे ख्वाब ही ख्वाब होने की आये
शुक्र है तुम आज मेरी मजार पर आये
फूल चढाने न सही,
ले जाने तो आये.

21 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति.

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  2. कभी सोचा तेरे होंठों की छू पायें
    पर आस पास थे भौरों के साये
    ये बात और है कि हमने
    कुछ ज्यादा ही सपने सजाये
    पर तुम न आये।
    कुछ ख्वाब अधूरे क्यूँ रह जाते ....
    उम्दा अभिव्यक्ति !!

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  3. तुम आज मेरी मजार पर आये
    फूल चढाने न सही,
    ले जाने तो आये.


    बहुत उम्दा भाव पूर्ण पंक्तियाँ,,बधाई रचना जी,

    Recent post: गरीबी रेखा की खोज

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  4. मगर तुम न आये --- बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    दो जगह की -- की जगह -- को होना चाहिए शायद ।

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  5. विरह भी क्या क्या लिखा देता है .... खूबसूरत रचना

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  6. इंतज़ार में हमेशा ही ख़ुशी और अवसाद की मिट्टी गुंथी रहती है ....विरह का दर्द और मिलने की आस ...बहुत सुन्दर मूर्ति ढाली है आपने उस मिट्टी से

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  7. बहुत खूब ... प्रेमी मन की प्यास को बाखूबी शब्दों का जामा पहनाया है ...
    लाजवाब ...

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  8. आपकी टिपण्णी हमें प्रासंगिक बनाए रहती है ,ऊर्जित करती है .शुक्रिया आपका तहे दिल से .इस शिद्दते मोहब्बत का ज़वाब नहीं -शुक्र है आज तुम मेरी मज़ार पे तो आये ....

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  9. रचना जी,,,आपका कमेन्ट स्पेम था भूल बस मोबाईल द्वारा आपका कमेंट् डिलीट हो गया इसके लिए मै क्षमाप्रार्थी हूँ,,,,

    Recent post: गरीबी रेखा की खोज

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  10. जुदा हो करके के तुमसे अब ,तुम्हारी याद आती है
    मेरे दिलबर तेरी सूरत ही मुझको रास आती है

    कहूं कैसे मैं ये तुमसे बहुत मुश्किल गुजारा है
    भरी दुनियां में बिन तेरे नहीं कोई सहारा है
    बेह्तरीन अभिव्यक्ति .शुभकामनायें.

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  11. वाह ... बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ..
    आभार

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  12. कोमल भावों से सजी रचना

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  13. बहुत ख़ूबसूरत भावपूर्ण रचना...

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  14. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुतिकरण सुन्दर शब्द चयन,आभार है आपका

    आज की मेरी नई रचना जो आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही है


    ये कैसी मोहब्बत है

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  15. इंतज़ार का दर्द............खूबसूरत रचना ......

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