रविवार, 9 दिसंबर 2012

मौन निमंत्रण

मौन निमंत्रण

ये मेरा है मौन निमंत्रण, आज तुम्हें अजमाने को,
जब मैं पहुंचा देर शाम को, खेतों औ खलिहानों को.

तेरी साँसे पास न आयीं, मेरा दिल बहलाने को,
सो अपनी साँसे भेज रहा हूँ, तुम्हे खींच कर लाने को.

तुम क्या जानो,मुझ पागल, प्रेमी,बेचारे,दीवाने को,
मेरी बाहें मचल रही हैं, तुम्हें पास ले आने को.

सोच रहा हूँ,आलिंगन कर, मजबूर करूं सकुचाने को,
सो अपनी साँसे भेज रहा हूँ, तुम्हे खींच कर लाने  को.

मेरी ऑंखें तरस रही हैं, इक दरस तुम्हारा पाने को,
सूखे अधरों पर प्यास खिली, क्या प्यासे ही रह जाने को.

क्यों पास नहीं तुम आ जाती, मधुशाला छलकाने को,
सो अपनी साँसे भेज रहा हूँ, तुम्हे खींच कर लाने को.

मैंने तो भेजा था तुमको, मेरा दिल ले जाने को,
मेरे दिल से दिल न मिले तो, मजबूर नहीं लौटने को.

याद न मेरी आएगी, अब तेरा दिल भरमाने को,
सो अपनी साँसे भेज रहा हूँ, तुम्हें भूल कर आने को.

37 टिप्‍पणियां:

  1. क्या प्यासे ही रह जाने को.
    क्यों पास नहीं तुम आ जाती, मधुशाला छलकाने को, सो अपनी साँसे भेज रहा हूँ,
    ....वाह जवाब नहीं इस पंक्ति का लाजवाब

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  2. आपके द्वारा लिखी गई हर पंक्तियाँ बेहद खूबसूरत होती हैं....आपकी समस्त रचनाओं को लिये आपको नमन .....!!!!

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  3. गजब की अपेक्षा संग बेहतरीन निमंत्रण कोई पागल लड़की ही इसे ठुकरा पायेगी ....वाह ..

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  4. तुम क्या जानो,मुझ पागल, प्रेमी,बेचारे,दीवाने को,
    मेरी बाहें मचल रही हैं, तुम्हें पास ले आने को

    बहुत सुन्दर :))
    शुभकामनायें !!

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  5. बहुत प्यारा निमंत्रण .... क्प्मल भावों से बुनी रचना

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  6. बहुत ही प्यारी रचना...
    बहुत ही सुन्दर....मनभावन....
    :-)

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  7. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  8. प्रेम रस से ओत-प्रोत. सुन्दर रचना.

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  9. अपनी साँसें भेज रहा हूँ तुम्हें खींच कर लाने को....
    बहुत बढ़िया गज़ल रचना जी...

    अनु

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  10. इतने प्यारे नेह आमन्त्रण को कोई कैसे ठुकरा सकता है बहुत सुन्दर

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  11. वाह! क्या सुन्दर भावपूर्ण निमंत्रण है..कौन ठुकरा पायेगा इसको?

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  12. दम ही नहीं सुगंध भी होती है साँसों में जो ज़रूरी है एक टिकाऊ सम्बन्ध बनाने को .मौन निमंत्रण अनुपम है .

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  13. प्रेम भरा निमंत्रण ...
    सुन्दर शब्दों में संजोया गीत ...

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  14. "तेरी साँसे पास न आयीं, मेरा दिल बहलाने को,
    सो अपनी साँसे भेज रहा हूँ,तुम्हे खींच कर लाने को"

    गेयता से परिपूर्ण रचना आपके ब्लॉग पर पहली बार पढ़ी - बहुत सुंदर - बधाई

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  15. इस तरह तो कभी नहीं सोचा। यह अदला बदली भी खूब रही।
    अति सुन्दर .

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  16. बहुत ही प्रभावी एवं भावमय प्रस्तुति। मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा। धन्यवाद।

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  17. शिद्दत से लिखी भावप्रबल रचना ...शुभकामनायें रचना जी ...

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  18. वाह !!!!! बहुत शिद्दत से लिखी शानदार प्रस्तुति !!

    बधाई,रचना जी,,,

    recent post: रूप संवारा नहीं...

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  19. क्या बात है...वाह!! शुभकामनाएँ.

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  20. याद न मेरी आएगी, अब तेरा दिल भरमाने को,
    सो अपनी साँसे भेज रहा हूँ, तुम्हें भूल कर आने को.
    वाह ... मन को छूती हुई यह पंक्तियां

    अनुपम प्रस्‍तुति

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  21. सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

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  22. प्रेम की अभिव्यक्ति की पराकाष्ठा है यह और उसपर आपके शब्द!! कहाँ रह जाता है बाकी कुछ कहने को!!

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  23. waah is baar to hat k hai jara....khul k aamantran diya ja raha hai....yahi hai pyar.

    bahut khoob.

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  24. @ अपनी साँसे भेज रहा हूँ, तुम्हे खींच कर लाने को...

    कमाल की रचना ...

    बधाई रचना जी !

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  25. कोमल अहसासों भरा निमंत्रण ...
    खुबसूरत !

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  26. विशिष्ट भाव को रेखांकित करती अच्छी रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  27. अपनी साँसें भेज रहा हूँ तुम्हें खींच कर लाने को....

    कोमल अहसासों से भरे इतने प्यारे नेह आमन्त्रण को कोई कैसे ठुकरा सकता है. बहुत सुन्दर निमंत्रण ...

    तुम क्या जानो,मुझ पागल, प्रेमी,बेचारे,दीवाने को,
    मेरी बाहें मचल रही हैं, तुम्हें पास ले आने को

    बहुत खुबसूरत ! कमाल की रचना ! मन को छू

    गई 'रचना'.......सार्थक अभिव्यक्ति.

    बहुत-बहुत बधाई,उत्कृष्ट सृजन के लिए.

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  28. बहुत ही प्यारी रचना...
    बहुत ही सुन्दर....

    उत्तर देंहटाएं

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