रविवार, 7 अक्तूबर 2012

इज़हार

इज़हार 

आंसुओं में आज अपने, 
फिर नहा कर

मैं अपने दर्द का, 
इज़हार करना चाहती हूँ

दूर ही रहना ऐ खुशिओं,
पास तुम आना नहीं

मैं अभी कुछ और पल, 
इंतजार करना चाहती हूँ

आज तक पल छिन मिले,
सब शूलों के दंश से

मैं शूल दंशों से,
अपना श्रंगार करना चाहती हूँ

पीर का हर एक मनका,
बांध के रखा था जो

मैं उसी माला की,
भेंट चढ़ना चाहती हूँ

बात जो हमने कही, 
वो कंटकों सी चुभ गयी

मैं अपनी कही हर बात, 
वापस लेना चाहती हूँ

रास्ता हमने चुना जो, 
आज मुश्किल हो गया

एक पल जो सुख मिले, 
तो मौत के ही पल मिले

मैं इसी अहसास को, 
जीवित रखना चाहती हूँ

आज तुमको साथ में,
अपने रुला कर

मैं आंसुओं की फिर, 
बरसात करना चाहती हूँ

आंसुओं में आज अपने, 
फिर नहा कर

मैं अपने दर्द का, 
इज़हार करना चाहती हूँ

35 टिप्‍पणियां:

  1. संवेदनशील भावनाओं की अभिव्यक्ति ही कविता है ..

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  2. अभिव्यक्ति ऐसे ही अपने चरम पर जिये।

    उत्तर देंहटाएं
  3. विशेष मनोभावों की सुन्दर काव्यात्मक प्रस्तुति .

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत दर्दीला इज़हार है ..... सुंदर अभिव्यक्ति

    उत्तर देंहटाएं
  5. Chuna hua rasta jab mushkil ho jata hai to behad takleef hotee. Aprateem rachana!

    उत्तर देंहटाएं
  6. मैं शूल दंशों से,
    अपना श्रंगार करना चाहती हूँ

    सुंदर अभिव्यक्ति संवेदनशील भावनाओं की..........

    उत्तर देंहटाएं
  7. दर्द जब खुलकर बाहर आ जाए तो दर्द नहीं रह जाता है.. अमेरिका में इसे प्राइमल थेरेपी कहते हैं!! और आपने तो दर्द को झकझोरकर रख दिया!!

    उत्तर देंहटाएं
  8. दर्द का इज़हार ... मैं हूँ साथ दर्द के

    उत्तर देंहटाएं
  9. भावुक मार्मिक प्रस्तुति.
    दर्द का खूबसूरत इजहार.

    आभार रचना जी.

    समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर आईएगा.

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  10. किसी एक क्षण की पीड़ा को बखूबी उकेरती रचना ...मर्मस्पर्शी !!!!

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  11. पीर का इज़हार यूँ ही कर दिया
    एक पन्ना आँसुओं से भर दिया
    हाथ में तलवार ले वो आ गये
    मुस्कुराके सामने सर धर दिया ||

    मार्मिक और सम्वेदनशील प्रस्तुति.

    उत्तर देंहटाएं
  12. पीर का इज़हार यूँ ही कर दिया
    एक पन्ना आँसुओं से भर दिया
    हाथ में तलवार ले वो आ गये
    मुस्कुराके सामने सर धर दिया ||

    मार्मिक और सम्वेदनशील प्रस्तुति.

    उत्तर देंहटाएं
  13. राग ,विराग ,मार्मिकता से भीगी भीगी सी रचना .संवेगों से आप्लावित .अचनक ये पंक्ति याद आगई -नीड़ का निर्माण अब न हो सकेगा ...

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  14. शब्दों के इस सटीक संयोजन की अर्थपूर्ण प्रस्तुति बहुत अच्छी लगी.....

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  15. सुंदर प्रस्तुति । दर्दभरी कोमल और भावुक ।

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  16. dard ko abhivyakt karna jitna aasaan hai use jeena utna hi mushkil. fir bhi jo kaanto ki raah chun le to vo isa-maseeh se kam n hoga.

    samvedansheel prastuti.

    उत्तर देंहटाएं
  17. दर्द ही दर्द

    प्यार में सिर्फ एक इंसान को क्यों दर्द मिलता है ...जबकि प्यार दोनों बराबर करते हैं ???

    उत्तर देंहटाएं
  18. वाह! इजहारे-दर्द भी कमाल का है..

    उत्तर देंहटाएं
  19. वाह! इजहारे-दर्द भी कमाल का है..

    उत्तर देंहटाएं
  20. दर्द की पराकाष्ठा ही इजहार बन गया...अनमोल रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  21. दर्द को शब्‍दों में उतारना भावमय कर गया ...

    उत्तर देंहटाएं
  22. शूल दंशों से श्रंगार...दर्द की मीठी चुभन...
    बहुत मार्मिक अभिव्यक्ति..
    इतनी सुंदर रचनाएं हैं आपकी..मैं चाहूंगी कि आप योजना में जरूर शामिल हों...उम्दा रचनाएं ब्लॉग जगत से बाहर भी निकलेंगी...
    कुछ मित्रों के सुझाव हैं मैं जल्द सी सूचना दूंगी...

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  23. मैं अपनी इस योजना में बहुत ही चुनिंदा रचनाएं चाहती हूं...बेस्ट ऑफ 2012..आप अपनी सूची से बहुत बेहतरीन ब्लॉगर के लिंक दीजिएगा...साथ ही नए ब्लॉगर्स को भी मौका देना चाहूंगी....

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  24. मन की बातों की मोहक प्रस्तुति ,बधाई

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  25. इस इज़हार-ए-दिल ने दिल में जगह बनाई।

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  26. दर्द का इज़हार बहुत शशक्त ढंग से किया है आपने...

    नीरज

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  27. बात जो मैंने कही वह कंटकों सी चुभ गयी।
    मैं अपनी कही हर बात वापस लेना चाहती हूँ।
    वाह बहुत खूब रचना जी।मैं भी वास्तविक अंतर्खुशी का यह रहस्य धीरे-धीरे सीखने का प्रयाश कर रहा हूँ।

    उत्तर देंहटाएं
  28. बहुत अद्भुत अहसास...सुन्दर प्रस्तुति...

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  29. पीर का हर एक मनका, बांध के रखा था जो
    मैं उसी माला की, भेंट चढ़ना चाहती हूँ

    बहुत खूब ....!!

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  30. बहुत खूब! भावों की बहुत संवेदनशील अभिव्यक्ति...

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