रविवार, 23 सितंबर 2012

मौत से बातें


मौत से बातें  

आज फिर मेरी मौत हो गयी.
अपनों से बिछुड़ने का ग़म क्या कम था
जो सारी दुनिया खफा हो गयी.
आज फिर मेरी मौत हो गयी
कब से पड़ा था मेरा जनाज़ा,
कोई कांधा देने  को   न था.
एक बची थी में अकेली
आज फिर मेरी मौत हो गयी.
अपना जनाज़ा अपने
कांधों पर ले के जो निकली
एक अजनबी की बददुआ लग गयी.
आज फिर मेरी मौत हो गयी
यूँ तिल तिल जीना,
यूँ तिल तिल मरना.
आज मौत इतनी बेखौफ हो गयी.
आज फिर मेरी मौत हो गयी.
यूँ चिंदा चिंदा जिंदगी
यूँ लम्हा लम्हा मौत
आज मौत जिंदगी से बड़ी हो गयी
आज मेरी आखिरी मौत हो गयी.

35 टिप्‍पणियां:

  1. क्या सुबह सुबह करेला खिला रही हैं ...
    :(
    मंगल कामनाएं !

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  2. जीवन का अन्तिम सत्य है यह, देर सबेर इसके बारे में सहज तो होना ही होगा।

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  3. yatharth jeevan ka ...chalte hii jana hai ..ladte hii jana hai ...
    gahan abhivyakti ...!!

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  4. जीवन का यह अंतिम सत्य जब हर दिन दिखने लगे और इस अंतिम सत्य की यातना हर दिन टीसने लगे तभी ऐसी कविता जन्मती है रचना जी!!

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  5. बहुत ख़ूबसूरत सृजन, बधाई.

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  6. यथार्थपरक अभिव्यक्ति..
    मौत से मुलाकात तो जरुरी है...
    भावों की सहज अभिव्यक्ति...

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  7. न बात कर ,अभी मौत से बात की
    न बात कर ,अभी आखरी मुलाकात की .....

    खुश रहो !
    शुभकामनायें!

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  8. सब शुभ हो... कभी कभी ऐसे नकारात्मक भाव आँखों के आगे घूमते हैं

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  9. कभी कभी ऐसे भाव मन को बेचें कर देते हैं .. कड़वी सच्चाई जीने नहीं देती ...
    पर सत्य सत्य रहता है ...

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  10. यह भी जीवन का सत्य एक है...कई मौत मरते हुए भी जिन्दा रहना
    सार्थक कविता

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  11. लम्हा लम्हा मौत ....

    आज मौत जिंदगी से बड़ी हो गयी

    आज मेरी आखिरी मौत हो गयी.

    ...................................... ?

    कड़वे-कड़वे कठोर कटु अनुभूति से गुजरी हैं ?

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  12. जीवन का कटु सत्य...बहुत मर्मस्पर्शी रचना..

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  13. बहुत ही अच्छी कविता |सुनहरी कलम पर हमारा उत्साहवर्धन करने के लिए आपका विशेष आभार |

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  14. जो मौत से साक्षात्कार कर लेता है, वह अंतिम सत्य से साक्षात्कार करता है।

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  15. कल 24/09/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  16. जीवन का यही अन्तिम सत्य है...

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  17. ओह! मंगलकामनाएँ तो हम रख ही दें यहाँ...

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  18. जीवन में अक्सर ऐसे क्षण आते हैं....जब ऐसा प्रतीत होता है ....लेकिन मांगने से जो मौत मिल जाती कौन जीता इस ज़माने में .....ऐसे ही एक क्षण का यतार्थ चित्रण ...

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  19. ज़िंदगी के सफर में बहुत बार अलग अलग किस्म की मौत से सामना होता है ..... ऐसी ही किसी स्थिति को कहती गंभीर रचना

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  20. बहुत उम्दा रचा ...
    जीवन का भरोसा नहीं
    किन्तु मृत्यु अटल है...
    कोई साथ दे ना दे,
    यह साथ निभाएगी...
    अंतिम साँस में भी
    हमारे साथ जायेगी...

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  21. पोस्ट दिल को छू गयी.......कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने..........बहुत खूब
    http://madan-saxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena.blogspot.in/
    http://madanmohansaxena.blogspot.in/

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  22. "आज मौत जिंदगी से बड़ी हो गयी"
    बेशक होगी, लेकिन आपकी कलम की धार के आगे वो भी नतमस्तक हो जाएगी.

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  23. गहन भाव लिए उत्‍कृष्‍ट अभिव्‍यक्ति ।

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  24. आज मौत जिंदगी से बड़ी हो गयी आज मेरी आखिरी मौत हो गयी..........नहीं
    रचना जी ! जिन्दगी का सम्बन्ध सच्चाई से है ! सच्चाई से रचना धर्मिता जुडी हुई है ! बेहद मार्मिक !

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  25. ओह! मौत से भी ह्रदय को छूती बातें हो सकती है..

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  26. oho maut se bhi mulakaat ho gayi....kyu, kab kahan ?

    abhi na jaao rooth kar ....ke dil abhi bhara nahi....

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  27. कविता का मर्म ...मार्मिक



    आज एक बार फिर से मौत से
    मुलाकात हो गई
    हुए दो चार हम तो ,
    वो देख मेरी हिम्मत
    वो निढ़ाल हो गई ....अंजु (अनु)



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  28. जीवन के अंतिम सत्य से रूबरू कराती रचना।

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