रविवार, 29 जुलाई 2012

बादल


बादल


जब आसमान पर बादल छाए
तुम याद हमें भी आयी हो.

काले बादल का जमघट
ज्यों केशावली लहराई हो.

बादल में बिजली की चम- चम
ज्यों तुम आज कहीं मुस्काई हो.

सर सर सर सर चले पवन
ज्यों चुनरी तुमने लहराई हो.

पानी में मिट्टी की खुशबू
ज्यों साँस तुम्हारी आयी हो.

खिड़की पर बूंदों की छम-छम
ज्यों झांझर तुमने झनकायी हो.

ठंडी  बूंदों की वोह सिहरन
ज्यों पास कहीं तुम आयी हो.

बारिश में वो इन्द्रधनुष
ज्यों ली तुमने अंगडाई हो.

पानी की अविरल जल धारा
ज्यों तुम आलिंगन कर आयी हो.

मेरी अश्रु धारा में 
ज्यों तुम आज नहा कर आयी हो.   

32 टिप्‍पणियां:

  1. बादल , प्रकृति और प्रेम का समन्वय है यह रचना ...!

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  2. वाह......
    बहुत बहुत सुन्दर....

    अनु

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  3. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....
    रक्षाबंधन पर्व की हार्दिक अग्रिम शुभकामनाएँ!


    इंडिया दर्पण
    पर भी पधारेँ।

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  4. Waah !waah !! Waah!!! shabd nahi hai kahne ko....bahut pasand aai rachna aapki ....

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  5. प्रकृति तत्व का अद्भुत समन्वय..

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  6. उमड़ते बादल और घुमड़ते ख्याल

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  7. खिड़की पर बूंदों की छम-छम
    ज्यों झांझर तुमने झनकायी हो
    रून झुन - रून झुन सूना रही हो .... !!

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  8. वाह ! सावन अपने पूरे यौवन पर दिखाई दे रहा है इस रचना में . बस बरखा ही नहीं आ रही .

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  9. वाह ....
    बहुत बहुत सुन्दर..
    प्रकृति में ये प्रेम की उपमाये
    बहुत सुन्दर मनभावन है...
    :-)

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  10. सावन और प्रेम का सुंदर मिलन देखने को मिला इस रचना में ...
    बहुत खूब ...
    सादर !

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  11. बहुत सुंदर .... प्रकृति के बिम्ब ले कर मनोभावों को लिखा है ...

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  12. बरसात में भीगी बहुत सुंदर कविता ....

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  13. Dua karti hun,ki,aapki srujan kshamata yuun hee banee rahe.

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  14. खिड़की पर बूंदों की छम-छम
    ज्यों झांझर तुमने झनकायी हो.

    बारिश में भीगे हुए शब्द सुंदर लग रहे हैं।

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  15. आया सावन झूम के,,,,,,
    बहुत सुंदर प्रस्तुति,,,,,,,

    RECENT POST,,,इन्तजार,,,

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  16. बहुत ही अच्छी रचना.. बहुत सुन्दर.

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  17. प्रकृति का मानवीकरण और सहज उपादान के रूप में रचना में हुआ है .सुन्दर मनोहर रचना है रचना जी की .

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  18. बहुत सुंदर शब्द संयोजन ..... प्रकृति का उम्दा चित्रण

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  19. सावन सी मन मोहक रचना ज्यों
    भीग -भाग चंचल सी मुस्काई हो ......

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  20. ठंडी बूंदों की वोह सिहरन
    ज्यों पास कहीं तुम आयी हो.

    वाह!! बड़ा प्यारा सा गीत है...
    बारिश जगा ही देती है..सुन्दर अहसास...

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  21. बरसात में भीगी बहुत सुंदर प्रस्तुति....

    उत्तर देंहटाएं
  22. बहुत खूब! बहुत भावपूर्ण और मनभावन रचना....

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  23. बहुत खूब! बहुत भावपूर्ण और मनभावन रचना....

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  24. प्राकृति ... प्रेम और समर्पण ... रचना लाजवाब बन आई है ...

    उत्तर देंहटाएं
  25. बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको
    और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

    http://madan-saxena.blogspot.in/
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    http://madanmohansaxena.blogspot.in/

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