रविवार, 24 जून 2012

पत्थर


पत्थर

मैं हूँ पत्थर
खुशबू, ख़ुशी और 
सुर्ख रंग का सौदागर.   
पीसता हूँ, 
पिसता हूँ, 
देखता हूँ, 
सुनता हूँ,
समझता हूँ 
मौन रहता हूँ 
नहीं बजती 
शहनाई 
किसी घर
मेरे बिना 
हर दुल्हन की 
हथेलियों को 
सजाता हूँ,
मैं ही,
हर सजनी को 
उसके साजन से 
मिलाता हूँ
मैं ही     
मैं हूँ पत्थर
खुशबू, ख़ुशी और 
सुर्ख रंग का सौदागर. 
दूसरों की जिंदगी में 
रंग भरता
अपनी जिंदगी में 
गम भरता
नहीं आती 
मेरे लिए  
मेरे पास 
कोई ख़ुशी. 
नहीं आती 
मेरे लिए  
मेरे पास 
सुर्ख़  हथेलियाँ , 
सुर्ख़ जोड़ा 
और सजनी.
नहीं चढ़ता 
मुझ पर 
कोई सुर्ख़ रंग कभी.
मेरे पास रहती है 
बस उसकी सुगंध 
मैं वो पत्थर हूँ
रंग लाती है 
हिना जिस पर 
पिस जाने के बाद.
मैं हूँ पत्थर
खुशबू, ख़ुशी और 
सुर्ख रंग का सौदागर.  

30 टिप्‍पणियां:

  1. पत्थर के भी दिल होता है???

    बहुत सुन्दर रचना.....................

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  2. मेरे अन्दर तुम्हें ईश्वर मिलेगा .... दर्द , ख़ुशी , प्रकृति .... हर पड़ाव

    उत्तर देंहटाएं
  3. बेचारा पत्थर...अपनी व्यथा सुना ही गया !!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. पत्थर ,जिसे लोगों ने अनदेखा कर दिया .....उसकी अकथ कहानी को सामने लाने के लिये आभार

    उत्तर देंहटाएं
  5. पत्थर तो आखिर पत्थर है,,,निर्जीव,,
    मनोभाव का सुंदर सम्प्रेषण,,,,,


    RECENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: आश्वासन,,,,,

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  6. एकदम सही बात...
    बहूत हि सुंदर रचना...
    :-)

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत ही सुन्दर भाव है !
    बहुत सुन्दर रचना.

    उत्तर देंहटाएं
  8. पत्थर के भावों को सुंदरता से कहा है .... अच्छी प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  9. पत्थर का हाल भी डॉक्टर के हाल जैसा है . खुद घिसकर ही दूसरों को रंग देता है .
    अति सूक्ष्म दृष्टि से गहरे भाव उभरे हैं रचना में . बढ़िया जी .

    उत्तर देंहटाएं
  10. इतनी व्यथा ओके बाद भी खुशी देता है ये ....शायद इसी लिए उसके दिल मे हिरा पाया जाता है!

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  11. जख्म खा के न रोने की आदत भी पत्थर में ही होती है ... बेचारा पत्थर ...

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  12. वाह बहुत सुंदर भाव ....कितना ही पत्थर दिल क्यों ना हो ....कुछ भावना सभी मे होती है ....

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  13. पत्थर का आधार तो आवश्यक ही है सबको, रोचक प्रस्तुति..

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  14. पत्थर के दर्द को मार्मिक ढंग से उकेरा है रचना जी आप ने कभी हमें भी पत्थर बनना पड़ता है ऐसे दुसरे की खुशियों के लिए ...बहुत खूब
    भ्रमर ५

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  15. कुछ अलग सी , अर्थपूर्ण भाव लिए रचना

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  16. खूबसूरत रचना.....बहुत खूब

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  17. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  18. रचना जी,
    अच्छी रचना।
    महंदी पीसनेवाले पत्थर से धन्यवाद प्राप्त करें और मशरूफ निगाहें जरा उस तरफ भी डालें..कुछ और पत्थर आपकी सशक्त लेखनी का इंतजार कर रहे हैं..यथा
    मसाले के पत्थर, मील के पत्थर, नींव के पत्थर, घाट के पत्थर, कुएं के हमामी पत्थर, पिस कर गिट्टी हो जानेवाले पत्थर, गुलेल के पत्थर...आशिकों के सर फोड़नेवाले पत्थर, गुनहगारों पर बरसनेवाले पत्थर............आदि अनादि और इत्यादि।

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  19. सुन्दर सम्प्रेषण....
    अलग ही तरह की रचना....

    सादर बधाई.

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  20. पत्थर भी दिल रखते हैं , बस हर एक को महसूस नहीं होता ...

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  21. पत्थर के भावों को सुंदरता से कहा है खूबसूरत रचना

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  22. ये वो पत्थर है तकदीर बनाती है यदि इसे देव समझकर इस पर सर रखो, वरना सर फोड़ सकती है, अगर इस पर सर पटके तो।

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  23. यह कविता मगर भावनाओं और अर्थ को समेटे हुए हैं. पत्थरों की दास्ताँ अच्छी है

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  24. मन के भावों की सुंदर प्रस्तुति,

    उत्तर देंहटाएं
  25. पत्थर की संवेदना को आपने बखूबी सुंदर शब्दों और भावों में संजो दिया है।
    बहुत बढ़िया।

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