रविवार, 30 अक्तूबर 2011

दिले नादाँ...

दिले नादाँ...
जब से जाना है 
कोलेस्ट्राल की घनी मोटी परतों ने
मेरे शरीर में डेरा डाला है,
धमनिओं में एक अजीब सी
सिहरन और मीठा अहसास है.
तेरी तस्वीर, 
तेरी याद, 
तेरी बात,
सब उन परतों के पीछे
जो छुपा रखी है.
अब दुनिया की कोई एंजियोप्लास्टी
तुम्हें मुझसे अलग नहीं कर सकती
मेरे मरने तक
और मेरे मरने के बाद भी.  

52 टिप्‍पणियां:

  1. तस्वीर को , यादों को , बातों को दिल से लगाये रखना
    मगर नहीं है अच्छा कोलेस्ट्रोल से नाता बनाये रखना ।

    कुछ लेना चाहिए जी ।
    शुभकामनायें ।

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  2. इतना अधिक कमिटमेंट शायद कोलोस्त्राल को बढ़ने ही न दे ,शुक्र है फिक्रमंद ऐसे हैं , माफ़ी चाहेंगे जी , बहुत बढ़िया अहसास दे गया ...... शुभकामनायें //

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  3. :):) डॉक्टर साहब की बात पर क्या कहना है ? :):)

    वैसे सोच गज़ब की है

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  4. बहुत खूब.
    खूबसूरत शब्द संयोजन.

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  5. हृदय का भौतिक व भावनात्मक चित्रण।

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  6. वाह, विज्ञान का मेल संस्कार से !

    अपनी तरह की अनूठी कविता।

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  7. वाह क्या गज़ब का ख्याल निकाला है।

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  8. बेहतरीन।

    कल 31/10/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  9. नई सोच और सुंदर शब्दों के संयोजन साथ अच्छी प्रसुतिती....बधाई...

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  10. भावों को इन विम्बों से बढ़िया जोड़ा है!

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  11. अच्छी रचना...
    डा दाराल साहब की बाते काबिले गौर है...:))
    सादर...

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  12. डॉ साहब नें सही कहा है,विचारणीय.

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  13. आधुनिक बिम्ब
    सुन्दर कविता

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  14. क्या बात है !!!
    विज्ञान कविता ???

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  15. कोलेस्ट्राल घटाइये...यह क्या मजाक है।

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  16. दिल से रिश्तों की अच्छी पड़ताल की है आपने.

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  17. कोलेस्ट्रॉल माने एक ऐसा फैक्टर का आ जाना जो आसानी से एक तो जाता नहीं उस पर से मीठा-मीठा दर्द देता रहता है।

    रचना का भावनात्मक पक्ष जैविक पक्ष पर भारी पड़ गया है।

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  18. बहुत ख़ूबसूरत और भावपूर्ण रचना! बधाई!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  19. बहुत ही अनूठे ख्याल लिए उम्दा कविता ...

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  20. रचना जी,केलोस्ट्रोल से दोस्ती ठीक नहीं,वैसे आपने स्वंम ही इसे स्वीकारा है

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  21. aapne to har bad me bhi kuchh good hota hai wali baat sarthak kar di.

    lekin itni jaldi kya hai ji ?

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  22. जैसे की सभी डॉ साहब की बात से सहमत हैं मैं भी हूँ और क्या कहूँ। :-)वैसे सोच वाक़ई गजब की है आपकी no doubt ....

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  23. क्या बात है... लेकिन खतरनाक भी... दिल का मामला होता ही है खतरनाक..

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  24. बहुत खूब...मजे़दार सोच..शुभकामनायें ।

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  25. कोलेस्ट्राल की घनी मोटी परतों ने मेरे शरीर में डेरा डाला है,
    सिहरन और मीठा अहसास है
    उन परतों के पीछे
    दुनिया की कोई एंजियोप्लास्टी
    तुम्हें अलग नहीं कर सकती
    मुझसे
    मेरे मरने तक



    रचनाजी!
    दिल की यही बात तो समझ नहीं आती , जो भी अंदर आया उसे दिल से लगाकर रख लिया ..फिर चाहे वह केलोस्ट्राल से आयी क्लाटिंग ही क्यों न हो!। हद तो यह है कि ‘मरीज़ेदिल’ भी उस थक्के को एंजियो प्लास्ट नहीं कराना चाहता...क्या इसे ही दिल के रिश्तेकहते हैं.

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  26. रिश्तों की परत को कोलिस्त्रोल नहीं उतार पायेगा ... अनोखी रचना .. नए बिम्ब ले कर ...

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  27. कोलेस्ट्रोल को भी भावना में जकड़ दिया...वाह!

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  28. हरेक पंक्ति बहुत मर्मस्पर्शी है। कविता अच्छी लगी ।

    संजय भास्कर
    आदत....मुस्कुराने की

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  29. मेरी नई पोस्ट देखे...आपका स्वागत है

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  30. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल कल 3 - 11 - 2011 को यहाँ भी है

    ...नयी पुरानी हलचल में आज ...

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  31. कुछ ऐसा ही नाता तो हमारा अपना जीवन से भी है। सुंदर रचना।

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  32. विज्ञानं और काव्य का बेहतरीन मिश्रण ....
    आप मेरी पोस्ट पर आई आपका सादर धन्यवाद.

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  33. धमनियों पर कॉलेस्ट्रोल के स्थान पर यादों की मोटी परत चढ़ा लीजिये ...
    लहसुन खाएं और कॉलेस्ट्रोल घटायें !

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  34. दिल का ख़याल भी तो
    दिल वालों को ही रखना होगा ...
    आखिर
    दिल ही तो है !!

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  35. कोलेस्ट्रॉल की परतों में यादें नही रहतीं खून का दौरा रुका रुका सा हो जाता है पर कवि का क्या करें वह तो कहीं भी प्रेम ढूढ लेता है । सुंदर प्यार भरी रचना ।

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  36. दुनिया की कोई एंजियोप्लास्टी
    तुम्हें अलग नहीं कर सकती
    मुझसे
    मेरे मरने तक
    और मरने के बाद भी


    बहुत सुन्दर पंक्तिया!

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  37. कोलेस्ट्रॉल और तस्वीर, यादें , एहसास ! बहुत सुंदर । शुभकामनायें ।

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