रविवार, 11 सितंबर 2011

पुल

पुल


एक पुल ने दिल लगाया भी तो पहियों से,
छोटे-बड़े, मोटे-पतले.
दिल भले ही साफ़ रहा हो
पर दिखने में एकदम काले. 
देता रहा अपने चौड़े  सीने पर
सबको सहारा,
प्यार, लाड, दुलार
रौंदते रहे पहिये उसे हर दम
नहीं मिला उसे एक पल भी आराम
बदले में
नहीं माँगा उसने कभी
सीमेंट, सरिया, पानी, पेंट.
कभी सुना था उसने
बिन मांगे मोती मिले
मांगे मिले न भीख.
पर एक दिन
टाटा, बजाज, महिंद्रा, मारुती,
सबका प्यार सीने में दफ़न किये
अपने ही मौत मर गया बेचारा

48 टिप्‍पणियां:

  1. कमज़ोर समाज का क्या भला कर सकते हैं ?
    मनुष्य के लोभ का शिकार हो गया पुल बेचारा ।

    सोचने पर मजबूर करती रचना ।
    सुन्दर ।

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  2. पर एक दिन
    टाटा, बजाज, महिंद्रा, मारुती,
    सबका प्यार सीने में दफ़न किये
    अपने ही मौत मर गया बेचारा.

    बहुत ही गहन भाव लिए कविता।

    सादर

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  3. नया दृष्टिकोण... पुल के बहाने एक सार्थक संकेतात्मक चिंतन...
    बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति...
    सादर साधुवाद....

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  4. अंतर्मन को उद्देलित करती पंक्तियाँ....

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ||
    बधाई ||

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  6. गहन रचना |सोचने पर मजबूर करती हुई |

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  7. बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति|धन्यवाद|

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  8. रचना जी!
    चलिए वह पुल तो सद्गति को प्राप्त हुआ, लेकिन इस देश में कई ऐसे भी पुल हैं जो सिर्फ कागजों पर बने और उन्हें टाटा, महिन्द्रा और मारुती का मर्दन भी नसीब न हुआ!!

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  9. हम दूसरों के बारे में सोचते ही कब हैं , हमें तो अपने फ़ायदे से मतलब है तो पुल की क्यों सोचें ...
    बहुत सटीक ...

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  10. दो किनारों को जोड़ने वाला पुल जीवन की धड़कन है।

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  11. हमें दीवारे नहीं पुल चाहिए ....लेकिन पुल जब अपनी अवस्था पर रो रहा तो क्या किया जा सकता है ...उसकी हालत को आपने सुंदर शब्द दिए हैं ......
    बिन मांगे मोती मिले मांगे मिले न भीख.
    पर एक दिन
    टाटा, बजाज, महिंद्रा, मारुती,
    सबका प्यार सीने में दफ़न किये
    अपने ही मौत मर गया बेचारा.
    इससे और दर्दनाक स्थिति क्या हो सकती है .....!

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  12. पुल के माध्यम से सांकेतिक दुर्दशा को अभिव्यक्त किया है ... अच्छी प्रस्तुति

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  13. Ppl around u r really lucky to hav u.. u r too empathetic to feel one's pain... n dis made me love u n ur lines.. :)

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  14. बढ़िया अभिव्यक्ति ....शुभकामनायें आपको !

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  15. आदरणीय रचना जी!
    नमस्कार !
    बहुत ही गहन भाव लिए कविता।
    बेहद खूबसूरत आपकी लेखनी का बेसब्री से इंतज़ार रहता है, शब्दों से मन झंझावत से भर जाता है यही तो है कलम का जादू बधाई

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  16. एक पुल की व्यथा - अच्छा विषय है

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  17. एक बेजुबान और बेजान पुल की सहन शक्ति और परोपकार भावना से क्या हम इंसान भी सहनशीलता और परोपकार की सीख नहीं ले सकते ? आपकी कविता में यह सवाल भी तो छुपा हुआ है ! इस अच्छी ,भावपूर्ण कविता के लिए बधाई . आभार.

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  18. गहन भावों का समावेश ...बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  19. पुल ने दिल लगाया तो कीमत तो अदा करनी ही होगी...इसीलिए बुजुर्गों ने कहा है.. इस बेमुरव्वत दुनिया में किसी से दिल न लगाना...बेहतरीन रचना !

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  20. दो किनारों को पाटने/जोड़ने वाले पुल की वेदना का मार्मिक चित्रण - आभार

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  21. jahan na pahuche ravi...vaha pahuche kavi is bat ko charitarth kar diya aapki is soch ne jo pul ki vyatha likh dali. saansarik samaj me bhi ek jimmedar insan ki yahi vyatha hai. sunder bimb prayog.

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  22. wah kya baat hai .
    Par isaka jimmedaar vo nahee jisko isene dil diya .
    :(
    badiya kataksh .

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  23. AAPKEE KAVITA KE TEWAR KHOOB HAIN.
    BHAVABHIVYAKTI MARMIK HAI .BADHAEE.

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  24. Rachna jee आपको अग्रिम हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं. हमारी "मातृ भाषा" का दिन है तो आज से हम संकल्प करें की हम हमेशा इसकी मान रखेंगें...
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  25. विचारणीय मार्मिक भावाभिव्यक्ति....

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  26. पुल ने तो सबको ही सहारा दिया था।

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  27. इशारों से बहुत कुछ कह डाला आपने.....
    अच्छी रचना....!!!

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  28. सबका प्यार सीने में दफ़न किये
    अपने ही मौत मर गया बेचारा.

    ....एक पुल के माध्यम से गहन जीवन दर्शन को बहुत प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त कर दिया..बहुत सुन्दर

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  29. बेचारा पुल ... दिल लगाने की सजा मिल गयी उसे ... अच्छा लिखा है बहुत ...

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  30. काले हैं तो क्या हुआ दिल वाले हैं ....
    :))

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  31. दो किनारों पर बसे लोगों को मिलाने के लिए पुल ही तो सहारा है। समझना चाहिए सभी को..देखभाल करनी चाहिए हर एक पुल की फिर चाहे वो सिमेंट सरिया के हों या...

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  32. बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति...

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