रविवार, 3 अक्तूबर 2010

वारे- न्यारे

वारे- न्यारे



धरती पे हम हैं भारी

और अंबर पे बदरा कारे.

अब तो अंबर भी चल रहा है,

आतंक के सहारे!!!

लूट, हत्या और फिरौती बिन,

अब वो भी हैं बेसहारे.

वाह!!!  हमसे ही है सीखा

और हमारे ही वारे न्यारे.

तुम्हें किसने दी सुपारी ?

ये किसके हैं इशारे.

क्यों अगवा किये हैं तुमने

मेरे सूरज, चाँद, तारे?

छुपते फिरते हैं तुमसे

रश्मि, किरण, चांदनी बेचारे

विस्फोटकों से भरे घन ने

धरती पे घर उजाड़े

है क्या गुनाह उनका

क्यों बेगुनाह मारे?


शपथ

लौटा दो मेरा सूरज

तुम जो कहो वो करेंगे

फिरौती में जो तुम मांगो

तुम्हारे आगे वो धरेंगे

प्रकृति का अनादर

माँ! अब हम न करेंगे

लेंगे जो भी तुमसे

उसे वापस भी करेंगे.

30 टिप्‍पणियां:

  1. प्रकृति को धयान में रकह्ते हुए दोनों ही सुन्दर रचनाएँ ...अच्छी लगीं

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  2. बहुत गूढ़ बातें कहीं हैं । प्रकृति का अनादर , यानि जिन्दगी का खात्मा ।
    इतनी खूबसूरत तस्वीरें आप कहाँ से लाती हैं रचना जी ? बेहतरीन ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. गहरी बात कही है ... प्राकृति का जब तक अनादर होगा ... तकलीफ़ बढ़ती ही जाएगी ....

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  4. Rachana adbhut lekhan shakti kee dhanee hai aap.......

    Bbahut hee pyaree sarthak rachana......

    Ek sandesh detee aur sath hee prakruti ko bhee

    aashvasan detee ye rachana bhee asar chod

    gayee.......man aur mashtik par....

    Aabhar

    उत्तर देंहटाएं
  5. देख तेरे इस देश की हालत, क्या हो गयी भगवान।

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  6. समसामयिक समस्याओं को प्रकृति से जोड़कर लिखी गई कविता एक अनुकरणीय संदेश देती है.

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  7. रचना जी आकी विशेषता है ... बहुत गंभीर बातों को सहजता से कहना.. आप पर्यावरण जैसे गंभीर मुद्दे को भी सहजता और सरलता से काव्य में कह जाती है.. बहुत सुंदर.. खास तौर पर सूरज को लौटने वाली बात...

    उत्तर देंहटाएं
  8. एक अनुकरणीय संदेश देती है कविता..

    उत्तर देंहटाएं
  9. sapth bahut hi aham hai ,rachna laazwaab hai .
    लौटा दो मेरा सूरज
    तुम जो कहो वो करेंगे
    फिरौती में जो तुम मांगो
    तुम्हारे आगे वो धरेंगे
    प्रकृति का अनादर
    माँ! अब हम न करेंगे
    लेंगे जो भी तुमसे
    उसे वापस भी करेंगे

    उत्तर देंहटाएं
  10. Hmmm manama to padega prakriti ko.. ab manna na manna uski marzi.. waise jab hum kisi ko aasani se maaf nahi karte to prakriti bhala kyu lar karegi? maa h isliye shayad...

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  11. बहुत नया प्रयोग है यह । अच्छा लगा ।

    उत्तर देंहटाएं
  12. मेरे ब्लॉग पर इस बार ....
    क्या बांटना चाहेंगे हमसे आपकी रचनायें...
    अपनी टिप्पणी ज़रूर दें...
    http://i555.blogspot.com/2010/10/blog-post_04.html

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  13. बहुत ही सहजता से इतनी गंभीर बात कह दी है..दोनों ही कविताएँ बहुत कुछ सोचने पर विवश करती हैं

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  14. बहुत अच्छा सन्देश देती पर्करती की एहमियत समझती सुंदर रचनाएँ. आभार.

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  15. वाह क्या बेहतरीन कविता... अनूठे रूप बादल के सितारे चाँद ..प्रकृति पे इस तरह से रची अद्भुत रचना..बहुत खूब.

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  16. बहुत अच्छी तरीके से आपने अपने भाव प्रगट किये है...

    उत्तर देंहटाएं
  17. वाह!!! हमसे ही है सीखा
    और हमारे ही वारे न्यारे.
    तुम्हें किसने दी सुपारी ?
    ये किसके हैं इशारे.
    क्यों अगवा किये हैं तुमने
    मेरे सूरज, चाँद, तारे?
    छुपते फिरते हैं तुमसे
    रश्मि, किरण, चांदनी बेचारे


    वह वह क्या बात है..सुंदर अभिवयक्ति

    उत्तर देंहटाएं
  18. ये किसके हैं इशारे.
    क्यों अगवा किये हैं तुमने
    मेरे सूरज, चाँद, तारे?
    छुपते फिरते हैं तुमसे
    रश्मि, किरण, चांदनी बेचारे

    सुन्दर और अर्थवान कविता...

    किन्तु,

    बहुत दिलफरेब चित्र...

    ये किसकी आंखें हैं जो गहरे उतर रहीं हैं
    मेरे पेरहन को हर सिरे से कुतर रहीं हैं
    किसने प्रकुति को फिर ‘वही’ बना दिया ...

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  19. Rachna jee,
    Behad samvedansheel rachna.khaskar prakriti ak anadar na karne ki sapath aik sakaratmak soch hai.

    उत्तर देंहटाएं

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