रविवार, 11 अप्रैल 2010

प्रपंच


प्रपंच




दर्द की दीवार हैं,

सुधियों के रौशनदान.

वेदना के द्वार पर,

सिसकी के बंदनवार.

स्मृतियों के स्वस्तिक रचे हैं.

अश्रु के गणेश.

आज मेरे गेह आना,

इक प्रसंग है विशेष.

द्वेष के मलिन टाट पर,

दंभ की पंगत सजेगी.

अहम् के हवन कुन्ड में,

आशा की आहुति जलेगी.

दूर बैठ तुम सब यहाँ

गाना अमंगल गीत,

यातना और टीस की,  

जब होगी यहाँ पर प्रीत.

पोर पोर पुरवाई पहुंचाएगी पीर.

होंगे बलिदान यहाँ इक राँझा औ हीर.

खाप पंचायत बदलेगी,
 
आज दो माँओं की तकदीर.




39 टिप्‍पणियां:

  1. kya likhatee hai aap .........Aapkee lekhinee , aapkee soch ko shat shat naman.............

    Ek amit chap chodne walee rachana...........
    lekhan me naee bulandiyo ko chulo isee aasheesh ke sath................

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  2. आज के हालात के हिसाब से बहुत ही सटीक रचना है...भीतर तक हिला दिया...मेरे भीतर भी एक कविता बन रही है आपकी रचना की प्रेरणा से ......... बाहर राग / भीतर आग / भागमभाग /नाग ही नाग /.......

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  3. दर्द की दीवार, सुधियों के रोशनदान , वेदना की बंदनवार स्म्रितोयों के स्वास्तिक...वाह कितने सटीक प्रतीक लिए हैं.....बहुत भावपूर्ण रचना...एक एक शब्द मन में उतरता सा....

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  4. रचना !!! हम तो भाषा पर हुए निहाल ! कैसे लय ताल में बात करती है ! अश्रु गणेश !का बिम्ब सारी व्यथा कह देता है ! बधाइयाँ !

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  5. पोर पोर पुरवाई पहुंचाएगी पीर.
    होंगे बलिदान यहाँ इक राँझा औ हीर.
    सुन्दर कविता. सुन्दर शब्द-चित्र. बधाई.

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  6. शब्दों में अभिव्यक्ति या अभिव्यक्ति के शब्द --दोनों ही लाज़वाब।
    वर्तमान परिवेश से सम्बंधित करारी रचना ।
    इस विषय पर एक लेख मेरा भी आने वाला है।

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  7. सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने शानदार रचना लिखा है! आपकी लेखनी को सलाम!

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  8. rachna ji

    gazab ki post , aisa aaj tak nahi padha, aapki kavita me itne saare bimb hai ki bas ek nayi tasveer prastut karte hai ....badhayi sweekar kare..

    aabhar aapka

    vijay

    pls read my new poem on my blog
    www.poemsofvijay.blogspot.com

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  9. दूर बैठ तुम सब यहाँ
    गाना अमंगल गीत,
    यातना और टीस की,
    जब होगी यहाँ पर प्रीत...

    बहुत लाजवाब बात कही है ... अनूठे भाव लिए सुंदर बोल ...

    उत्तर देंहटाएं
  10. दर्द की दीवार हैं,

    सुधियों के रौशनदान.

    वेदना के द्वार पर,

    सिसकी के बंदनवार.

    स्मृतियों के स्वस्तिक रचे हैं.

    अश्रु के गणेश.
    Dard ka dariya hai yah rachana...aur kya kahun?

    उत्तर देंहटाएं
  11. पोर पोर पुरवाई पहुंचाएगी पीर.
    होंगे बलिदान यहाँ इक राँझा औ हीर.
    kya gazab likhi hai ,shabdo ka chayan behtrin hai aapka ,laazwaab ,

    उत्तर देंहटाएं
  12. पोर पोर पुरवाई पहुंचाएगी पीर.
    होंगे बलिदान यहाँ इक राँझा औ हीर...

    प्रभावित करती हुई पंक्तियाँ..
    जब हृदय व्यथित हो तो कृति भी व्यथित होती है...
    आभार...

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  13. वाह क्या बात है बेहद सुन्दर............

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  14. Pehle to ye Rachna ji ki kavita do bar padhne par bhi adhi samajh mein aayee! Ha ha ha.... (Shayad buddhijeviyon ke liye likhi hai!)
    Mazak ko darkinar karoon to wahi karoonga jo pehle bhi kiya hai, dandvat pranam apki soch ko!

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  15. kya vimvb utpann kiye hain aapne...
    vedna ke dwar
    siski ke vandanbaar
    ashru ke ganesh...
    adbhud rachna...
    maari man ki vyatha ka shayad mahadevi ke baad sabse shashakt rachna...
    anupam...

    उत्तर देंहटाएं
  16. yah aanand he..hindi ke khaas shbdo se jab bhi kuchh abhivyakt hotaa he, seedhe antarman tak jaa pethate he shabd.., aapki rachna me dharaa pravaah shbdo ka esa mel padhh kar achha lag rahaa he..
    स्मृतियों के स्वस्तिक रचे हैं.
    अश्रु के गणेश.
    आज मेरे गेह आना,
    इक प्रसंग है विशेष. bahut umda baat likhi he ji, द्वेष के मलिन टाट पर,
    दंभ की पंगत सजेगी.
    अहम् के हवन कुन्ड में,
    आशा की आहुति जलेगी.

    sach me bahut sarthak rachnaa likhi he..

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  17. "प्रपंच" की तारीफ के लिए हर शब्द छोटा है - बेमिशाल प्रस्तुति - आभार.

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  18. बेहद खुबसूरत तरीके से आपने समाज की कुसंगतियों पर प्रकाश डाला है ! बधाई !

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  19. Aaj aapko fursatme padhane chali aayi ! Aapka 'apne bareme' bhi gaurse padha...kya likhti hain aap!

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  20. ek ek shabd apne aap me ek virodhabhas liye hue puri ki puri ki rachna ko sashaktikaran pradan kar raha hai....lekin mujhe sudhiyo ka arth nahi samajh me aaya.

    aabhaar.

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  21. दर्दकी दीवार में यादों के रौशनदान बेदना का द्वार |खाप पंचायत को आधार बना बहुत ही दर्दीली रचना

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  22. ओह! एक एक शब्द से वेदना, बेबसी और आक्रोश झलकता हुआ...बहुत ही प्रभावशाली रचना

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  23. दूर बैठ तुम सब यहाँ

    गाना अमंगल गीत,

    यातना और टीस की,

    जब होगी यहाँ पर प्रीत.

    पोर पोर पुरवाई पहुंचाएगी पीर.

    होंगे बलिदान यहाँ इक राँझा औ हीर.

    वाह ......आपके ये हर बार शब्दों के नए प्रयोग एक दिन आपको शिखर तक ले जायेंगे ......!!

    बहुत सुंदर.....!!

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  24. बहुत भावपूर्ण रचना है |

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  25. दर्द से अच्छा रिश्ता जोड़ दिया आपने। हृदयस्पर्शी रचना है।

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  26. आप बहुत सुंदर लिखती हैं. भाव मन से उपजे मगर ये खूबसूरत बिम्ब सिर्फ आपके खजाने में ही हैं .

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  27. वेदना के द्वार पर,
    सिसकी के बंदनवार.
    स्मृतियों के स्वस्तिक रचे हैं.
    अश्रु के गणेश.
    आज मेरे गेह आना,
    इक प्रसंग है विशेष.
    द्वेष के मलिन टाट पर,
    दंभ की पंगत सजेगी.
    अहम् के हवन कुन्ड में,
    आशा की आहुति जलेगी.

    kya upma dii hai ..sundar shabd vinyas

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  28. क्या कहूँ...ये आपकी अभिव्यक्ति है, आपकी कला है, फिलहाल तो मेरे पास शब्द नहीं है.

    कभी कभी देर हो जाती है आप तक पहुँचने में :)

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  29. यातना और टीस की,
    जब होगी यहाँ पर प्रीत...

    बहुत लाजवाब बात कही है ... अनूठे भाव लिए सुंदर बोल ...

    उत्तर देंहटाएं
  30. आपने तो बिलकुल किसी राजनीती के खिलाडी की तरह शब्दों का खेल खेला है रचना मै बस एक कमी लगी की आजकल राजनेता लोग भी अपनी गलती कभी नहीं मानते तो आप ये भूल कैसे करबैठी

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  31. दर्दनाक अभिव्यक्ति ! निशब्द ..

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  32. सार्थक और बेहद खूबसूरत,प्रभावी,उम्दा रचना है..शुभकामनाएं।

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