रविवार, 28 फ़रवरी 2010

आतंक के साए

आतंक के साए




क्या रंग देखो क्या रंगों का त्यौहार

हर तरफ फैला है अन्धकार

अब न वो रंग, न फागुन की ठिठोली

हर तरफ है तो बस लाल रंग की होली

क्यों वो माँ गाए, क्यों वो बहन गुनगुनाये

क्यों पत्नी माथे पे, अबीर सजाये

जब रंग गया हो, सदा के लिए

लहू की होली में अपना ही चिराग़

क्यों नहीं दीखता अब अबीर में,

वो अबरक का चमकना

क्यों भूल जाता हैं चाँद,

होली की रात, कुछ घरों में निकलना

क्या तलेंगीं गुझिया, पकवान,  वो ऑंखें,

लहू के कड़ाहे में,

जो जी रहे आज भी, आतंक के साए में

दूर तक दीखता है क्यों हर रंग

स्याह सफ़ेद और सुर्ख़

क्यूँ रूठ गए वो हमसे

इन्द्रधनुषी रंग, वो सुरमयी हवाएं,

क्यूँ अब फाग नज़र नहीं आती

उन्हीं को देखने को हमने

अपनी आँखों पे रंगीन चश्मे लगा रखे हैं

 
 

27 टिप्‍पणियां:

  1. क्यों नहीं दीखता अब अबीर में,
    वो अबरक का चमकना
    क्यों भूल जाता हैं चाँद,
    होली की रात, कुछ घरों में निकलना
    बहुत ही मार्मिक रचना. होली की शुभकामनायें.

    उत्तर देंहटाएं
  2. आतंक के साए में क्या होली क्या दीपावली। अच्छी तरह से आपने अपनी बात कही है।

    उत्तर देंहटाएं
  3. "क्यों नहीं दीखता अब अबीर में,
    वो अबरक का चमकना"
    सचमुच अब वो बात नहीं है साथ ही आपका आतंक से चिंतित होना जायज और स्वाभाविक है

    उत्तर देंहटाएं
  4. lajawab..............
    kya likhooisese adhik.............
    mai to jab blog par aatee hoo pooranee rachanae mujhe peeche bhee kheech le jatee hai..............

    उत्तर देंहटाएं
  5. जब कोई बात बिगड़ जाए
    जब कोई मुश्किल पड़ जाए तो
    तो होठ घुमा सिटी बजा सिटी बजा के
    बोल भैया "आल इज वेल"
    हेपी होली .
    जीवन में खुशिया लाती है होली
    दिल से दिल मिलाती है होली
    ♥ ♥ ♥ ♥
    आभार/ मगल भावनाऐ

    महावीर

    हे! प्रभु यह तेरापन्थ
    मुम्बई-टाईगर

    ब्लॉग चर्चा मुन्ना भाई की
    द फोटू गैलेरी
    महाप्रेम
    माई ब्लोग
    SELECTION & COLLECTION

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत ही मार्मिक , दिल को छूने वाली रचना।
    होली की शुभकामनायें।

    उत्तर देंहटाएं
  7. आपको और आपके परिवार को होली पर्व की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें!

    उत्तर देंहटाएं
  8. क्या रंग देखो क्या रंगों का त्यौहार
    हर तरफ फैला है अन्धकार
    अब न वो रंग, न फागुन की ठिठोली
    हर तरफ है तो बस लाल रंग की होली

    सच कहा ... हर तरफ बस लाल रंग ही है आज .... होली के अनेक रंग आज नज़र नही आते ...
    आपको और आपके परिवार को होली की बहुत बहुत शुभ-कामनाएँ .....

    उत्तर देंहटाएं
  9. रंग बिरंगे त्यौहार होली की रंगारंग शुभकामनाए

    उत्तर देंहटाएं
  10. क्यों नहीं दीखता अब अबीर में,
    वो अबरक का चमकना
    क्यों भूल जाता हैं चाँद,
    होली की रात, कुछ घरों में निकलन
    ek dardnaak sachchai jo man ko chhalni kar gayi ,ho gaye jo rang badrang unme kaise bhare khushiyon ke rang ,aap is jyoti ki taraf se pyaar bhara rang kabool kare filhaal is rang parv par .

    उत्तर देंहटाएं
  11. क्या तलेंगीं गुझिया, पकवान, वो ऑंखें,

    लहू के कड़ाहे में,

    जो जी रहे आज भी, आतंक के साए में

    ek katu satye ko ujagar karti ye rachna...mumbai kand, train kand aur diwali kand (delhi ka) na jane kitna kuchh yaad dila gayi.

    marmik rachna. badhayi nahi keh paungi.

    उत्तर देंहटाएं
  12. होली पर एक संवेदनशील रचना ...

    आपको व आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ ।

    उत्तर देंहटाएं
  13. रचना जी सही कहा है आज के हालात जैसे भी हैं त्यौहारों का अपना ही महत्व है चशाम उतार दीजिये हम आ रहे हैं आपको रंगने। आपको सपरिवार होली की ढेरो बधाईयाँ और शुभकामनाएँ

    उत्तर देंहटाएं
  14. ये पर्व और त्यौहार इसीलिए तो है कि हम अपनी संवेदनाओं को सहेजें मगर एक आशा और नवजीवन की कामना को जगाते रहें. सुंदर और गंभीर रचना.

    उत्तर देंहटाएं
  15. इस पक्ष पर भी गौर करना ज़रूरी है ।

    उत्तर देंहटाएं
  16. sukria,
    mr. Dhar ke bare mein padh kar bahut dukh hua aur aapki rachana bhi is dukh mein aur izafa kar gayi.

    उत्तर देंहटाएं
  17. दूर तक दीखता है क्यों हर रंग
    स्याह सफ़ेद और सुर्ख़
    क्यूँ रूठ गए वो हमसे
    इन्द्रधनुषी रंग, वो सुरमयी हवाएं,
    क्यूँ अब फाग नज़र नहीं आती
    उन्हीं को देखने को हमने
    अपनी आँखों पे रंगीन चश्मे लगा रखे हैं

    रचनाजी!
    क्या बात है बहुत खूब।
    आपकी हर रचना में एक मूक-सा ,अबोध-सा दर्द भी होता है।
    इस अवसर पर एक शायर की दो पंक्तियां याद आ रही हैं..मुलाहिजा हो ...

    हंसती हुई आंखों में भी ग़म पलता है ,
    कौन मगर झांके इतनी गहराई से ?


    रंग पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं..आपको और आपके परिवार को..

    उत्तर देंहटाएं
  18. आप की पंक्तियाँ सही इशारा कर रही है.

    कहीं कहीं हालत ऐसे हैं की दो पल रंग सजाने के लिए भी बहुत सोचना पड़ता है.

    उत्तर देंहटाएं
  19. क्यों नहीं दीखता अब अबीर में,
    वो अबरक का चमकना
    क्यों भूल जाता हैं चाँद,
    होली की रात, कुछ घरों में निकलना

    बहुत सटीक प्रश्न ले कर मार्मिक भावों का चित्रण किया है.....सुन्दर अभिव्यक्ति

    उत्तर देंहटाएं
  20. बहुत ही मार्मिक रचना. होली की शुभकामनायें.

    उत्तर देंहटाएं
  21. वाह बहुत ही सुन्दर और भावपूर्ण रचना प्रस्तुत किया है आपने! बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  22. शुक्रिया ,
    देर से आने के लिए माज़रत चाहती हूँ ,
    उम्दा पोस्ट .

    उत्तर देंहटाएं
  23. अच्छी अभिव्यक्ति के लिए शुभकामनायें ! रचना जी

    उत्तर देंहटाएं

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...